27 साल की भारतीय हर्डलर ने विथ्या रामराज ने आइची-नागोया में हुए एशियन गेम्स 2026 में महिलाओं की 400 मीटर हर्डल्स रेस में 54.75 सेकंड का अपना बेस्ट समय निकालकर ब्रॉन्ज़ मेडल जीता. इसके साथ ही उन्होंने अगस्त 1984 से दिग्गज उषा के नाम दर्ज नेशनल रिकॉर्ड को तोड़ दिया. 2023 में हांग्जो एशियन गेम्स में, रामराज ने 55.42 सेकंड का समय लेकर ब्रॉन्ज़ मेडल जीता था और 8 अगस्त 1984 को लॉस एंजिल्स ओलंपिक्स में उषा द्वारा बनाए गए रिकॉर्ड की बराबरी की थी. उस समय तक वह रिकॉर्ड 39 साल से कायम था.
अब नागोया में, रामराज ने और बेहतर प्रदर्शन किया. उन्होंने पुराने नेशनल रिकॉर्ड से 0.67 सेकंड कम समय लिया और एशियाई खेलों में अपना दूसरा व्यक्तिगत मेडल जीता. उनकी साथी खिलाड़ी अनु राघवन 55.88 सेकंड के समय के साथ पांचवें स्थान पर रहीं और उन्होंने भी अपना अब तक का सबसे अच्छा समय दर्ज किया.
26 साल की अनु खेलों में भारत की सिल्वर मेडल जीतने वाली मिक्स्ड 4x400 मीटर रिले टीम का हिस्सा थीं. उन्होंने एंकर लेग में दौड़ते हुए शानदार फिनिश किया और भारत को दूसरे स्थान पर बनाए रखने में मदद की. इस मेडल से रामराज के एशियाई खेलों के रिकॉर्ड में भी इजाफा हुआ है. उन्होंने 2023 हांग्जो खेलों में महिलाओं की 400 मीटर बाधा दौड़ में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता था, साथ ही 4x400 रिले और मिक्स्ड इवेंट्स में सिल्वर मेडल भी जीते थे.
एशियन गेम्स 2026 में सोमवार को मेडल जीतने के बाद विथ्या ने इन्हें अपनी जुड़वां बहन को समर्पित किया.इसके साथ ही उन्होंने पिता से मिले समर्थन को भी याद किया, जिन्होंने समाज के ताने सुनते हुए और आर्थिक संकट से जूझकर देश का नाम रोशन किया. सोमवार को ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद विथ्या ने से कहा,"मैं यह मेडल अपनी जुड़वां बहन को समर्पित करती हूं, क्योंकि वह हमेशा मेरे साथ रहती हैं. वह हमेशा मेरा साथ देती हैं. जब भी मैं उससे कुछ मांगती हूं, वह मुझे भेज देती हैं. मैं खुश हूं."
विथ्या को यह सफलता परिवार के कई वर्षों के संघर्ष के बाद मिली है. विथ्या के पिता ट्रक ड्राइवर थे. जो बमुश्किल महीनेभर में 15,000 रुपये कमा पाते. आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपनी बेटियों का साथ देना जारी रखा. विथ्या ने बताया,"मेरे पिता ड्राइवर हैं. वह लगभग 15,000 रुपये कमाते थे, इसलिए हमारे पास ज्यादा पैसे नहीं होते थे. साल 2009 में भी जूतों की कीमत 2,000 से 5,000 रुपये तक होती थी. फिर भी उन्होंने हम पर वो पैसे खर्च किए. जब मैं और मेरी जुड़वां बहन एक साथ दो खेल खेल रही थीं, तो हर चीज, ड्रेस, जूते और उपकरण पर बहुत खर्च आता था, लेकिन उन्होंने इसका इंतजाम किया. इसीलिए हम आज यहां हैं."
विथ्या ने चुनौतियों को याद करते हुए बताया कि उनका परिवार किराए के घर में रहता था और पिता को अपनी तीन बेटियों के भविष्य को लेकर लोगों के सवालों का सामना करना पड़ता था. उन्होंने कहा,"पहले हम किराए के घर में रहते थे. जब हम बड़े हो रहे थे, तो लोग कहते थे, 'बच्चे बड़े हो रहे हैं, अब तुम क्या करोगे?' यहां तक कि मेरी दादी और पिता से भी कहा जाता था, 'तुम्हारी तीन बेटियां हैं, उनका क्या करोगे?'"
28 वर्षीय विथ्या ने अपने कोच को भी इस उपलब्धि का श्रेय दिया, जिन्हें विश्वास था कि विथ्या 55 सेकंड का बैरियर तोड़ सकती हैं, जबकि खुद विथ्या को इसका भरोसा नहीं था. विथ्या ने कहा, "नहीं, मुझे विश्वास नहीं था. सिर्फ मेरे कोच को विश्वास था. मुझे अपने कोच पर भरोसा है, इसलिए वह जो भी कहते हैं, मैं करती हूं. मैं इतने वर्षों से वही कर रही हूं, जो उन्होंने मुझे करने के लिए कहा है. बस ऐसा ही हुआ."
विथ्या नागोया के ट्रैक से खुश हैं. उन्होंने कहा,"यह ट्रैक बहुत ही बढ़िया है. मैंने सिंथेट और मोंडो ट्रैक देखे हैं, लेकिन यह ट्रैक थोड़ा अलग है. मुझे लगता है कि यह एक स्पीड ट्रैक है, इसलिए मैं इस ट्रैक से बहुत खुश हूं." इस ब्रॉन्ज मेडल के साथ विथ्या ने इस इवेंट में लगातार दूसरा एशियाई गेम्स मेडल जीता और एक यादगार प्रदर्शन किया. इसी संस्करण में विथ्या ने मिक्स्ड 4x400 मीटर रिले टीम इवेंट में सिल्वर दिलाया था और अब उनकी नजरें तीसरे मेडल पर हैं.
(आईएएनएस से इनपुट के साथ)
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