सविता पूनिया भारतीय महिला हॉकी के इतिहास में सबसे ज्यादा इंटरनेशनल मैच खेलने वाली खिलाड़ी बन गई हैं. हॉकी इंडिया ने सोमवार को भारतीय महिला हॉकी टीम की अनुभवी गोलकीपर सविता की सराहना की. इस खास उपलब्धि पर हॉकी इंडिया ने कहा कि यह सविता के करीब दो दशकों के अनुशासन, मेहनत और बेहतरीन नेतृत्व का नतीजा है. उनके शानदार योगदान को सम्मान देने के लिए हॉकी इंडिया ने उन्हें 10 लाख का नकद इनाम देने की घोषणा भी की. सविता ने भारत की पूर्व स्ट्राइकर वंदना कटारिया के 320 सीनियर इंटरनेशनल मैच खेलने के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है.
उन्होंने जापान में चल रहे एशियन गेम्स में इंडोनेशिया के खिलाफ भारत के पूल बी मैच के दौरान यह मुकाम हासिल किया और अपने शानदार करियर में एक और उपलब्धि जोड़ी. ओपन प्ले में शॉट रोकने की अपनी काबिलियत और पेनल्टी शूटआउट में बिना घबराए खेलने के रिकॉर्ड के कारण हॉकी की दुनिया में 'द वॉल ऑफ इंडिया' के नाम से मशहूर 36 साल की सविता ने 2009 में अपना सीनियर इंटरनेशनल डेब्यू किया था.
सविता पूनिया ने अपने शानदार करियर में भारत के लिए लगातार बड़े टूर्नामेंट खेले हैं. वह तीन ओलंपिक, दो एशियाई खेल, कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी और एफआईएच प्रो लीग जैसे कई अहम टूर्नामेंटों का हिस्सा रही हैं.
एक युवा और प्रतिभाशाली गोलकीपर के रूप में शुरुआत करने वाली सविता समय के साथ भारतीय महिला हॉकी टीम की सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल हो गईं. उन्होंने लंबे समय तक टीम की कप्तानी भी की. बाद में टीम की कमान सलीमा टेटे को सौंप दी गई, लेकिन सविता आज भी भारतीय टीम की मजबूत स्तंभ बनी हुई हैं.
सविता ने फरवरी 2025 में एफआईएच हॉकी प्रो लीग में नीदरलैंड के खिलाफ अपना 300वां इंटरनेशनल मैच खेला था. वह वंदना के बाद 300 मैच खेलने वाली दूसरी भारतीय महिला और पीआर श्रीजेश के बाद ऐसा करने वाली दूसरी भारतीय गोलकीपर बनी थीं. उन्होंने 20 सितंबर, 2026 को एशियन गेम्स 2026 के ओपनिंग मैच में उज्बेकिस्तान के खिलाफ भारत की 19-0 की शानदार जीत के दौरान वंदना के 320 मैचों के ऑलटाइम रिकॉर्ड की बराबरी की और सोमवार को उसे पीछे छोड़ दिया.
सविता पूनिया ने जिस रिकॉर्ड को अपने नाम किया है, वह पहले भारत की दिग्गज फॉरवर्ड वंदना कटारिया के नाम था. वंदना ने 2009 में सविता के साथ ही इंटरनेशनल हॉकी में कदम रखा था. उन्होंने भारत के लिए 320 मैच खेले और 158 गोल किए. अप्रैल 2025 में उन्होंने इंटरनेशनल हॉकी से संन्यास ले लिया था. वंदना का 16 साल लंबा करियर कई यादगार उपलब्धियों से भरा रहा. टोक्यो ओलंपिक में उन्होंने भारत के लिए ऐतिहासिक हैट्रिक लगाई थी. उनके शानदार योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार के प्रतिष्ठित पद्म श्री सम्मान से भी नवाजा गया था.
इंडोनेशिया के खिलाफ मैच के बाद सविता ने कहा, "मैं सबसे पहले धन्यवाद कहना चाहती हूं. अपने परिवार, कोच, टीम के साथियों और उन सभी लोगों का, जो तब से मेरे साथ खड़े रहे हैं जब मैं एक छोटी बच्ची थी और अपना पहला पेनल्टी कॉर्नर रोकना सीख रही थी. सच कहूं तो मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं इस मुकाम तक पहुंच पाऊंगी."
उन्होंने कहा, "जब मैंने शुरुआत की थी, तो मैं बस टीम में अपनी जगह बनाना चाहती थी और अपने परिवार को गर्व महसूस कराना चाहती थी. मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन मुझे भारतीय महिला हॉकी के इतिहास में सबसे जयादा मैच खेलने वाली खिलाड़ी कहा जाएगा. यह रिकॉर्ड सिर्फ मेरा नहीं है. यह उन सभी का है जिन्होंने मेरे साथ खेला है, और वंदना का भी, क्योंकि उन्होंने एक स्टैंडर्ड सेट किया और हम सभी को और बेहतर करने के लिए प्रेरित किया. अब मेरी सबसे बड़ी उम्मीद यह है कि आने वाली युवा पीढ़ी इसे देखे और विश्वास करे कि उनके लिए भी यह मुमकिन है. मैं चाहती हूं कि वे आगे बढ़ती रहें, मेहनत करती रहें और भारतीय हॉकी के लिए बड़े सपने देखती रहें. इस खेल ने मुझे सब कुछ दिया है, और जब तक मैं कर सकती हूं, मैं इसके लिए योगदान देती रहूंगी."
सविता के लंबे करियर की तारीफ करते हुए हॉकी इंडिया के प्रेसिडेंट दिलीप टिर्की ने कहा, "सविता का रिकॉर्ड दो दशकों के अनुशासन और शांत नेतृत्व का सबूत है. वह इस टीम की रीढ़ रही हैं और आज का यह मुकाम पूरी तरह से उनके हक में है." हॉकी इंडिया के सेक्रेटरी जनरल भोला नाथ सिंह ने कहा, "हॉकी इंडिया की ओर से सविता को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए बधाई. उनका सफर हर उस युवा गोलकीपर के लिए प्रेरणा है जो भारत की जर्सी पहनने का सपना देखता है."
(IANS इनपुट के साथ)
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