NDTV Yuva के मंच पर पूर्व वर्ल्ड नंबर 1 साइना नेहवाल ने बताया है कि रिटायरमेंट का फ़ैसला वह नहीं लेना चाहती थीं, लेकिन खराब फ़ॉर्म से लंबे समय तक जूझने और कॉम्पिटिटिव बैडमिंटन से लंबे समय तक दूर रहने की वजह से उन्हें आख़िरकार यह फ़ैसला लेना पड़ा. साइना ने कहा कि वह लगभग दो साल से कॉम्पिटिटिव बैडमिंटन नहीं खेल रही थीं और यह मुश्किल फ़ैसला लेने से पहले उन्होंने अपने परिवार के साथ अपने भविष्य के बारे में बात की थी. उनके अनुसार, रिटायरमेंट किसी भी एथलीट की ज़िंदगी के सबसे मुश्किल दौर में से एक होता है, खासकर शुरुआती कुछ महीनों में, जब खेल से दूर ज़िंदगी को अपनाना मुश्किल होता है.
ओलंपिक ब्रॉन्ज मेडलिस्ट ने माना कि एथलीट अपने खेल से किसी बच्चे की तरह भावनात्मक रूप से जुड़े होते हैं, जिससे उससे दूर होना मुश्किल हो जाता है। हालाँकि, समय के साथ उन्हें एहसास हुआ कि आगे बढ़ने का यही सही समय है.
अपने शानदार करियर को याद करते हुए, साइना ने अपने ओलंपिक मेडल को अपने सफर की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया, उनका मानना है कि उनकी ऐतिहासिक सफलता ने भारतीय युवाओं की एक नई पीढ़ी को बैडमिंटन अपनाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाने का सपना देखने के लिए प्रेरित किया. भावनात्मक विदाई के बावजूद, साइना ने कहा कि उन्हें अपनी उपलब्धियों पर गर्व है और भारतीय बैडमिंटन पर उनके असर से वह संतुष्ट हैं, क्योंकि उन्होंने देश में इस खेल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मदद की.
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