भारत के एमएमए (मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स) फाइटर वरुण सान्याल को प्रतिस्पर्धा किए बिना ही रविवार को यहां एशियाई खेलों से हटने के लिए बाध्य होना पड़ा क्योंकि वह क्रूज जहाज पर ‘सौना बाथ' सत्र के दौरान अत्यधिक थकान और ‘डिहाइड्रेशन' (शरीर में पानी की कमी) के कारण बेहोश हो गए. संजीव सान्याल के बेटे वरुण रविवार की प्रतियोगिता के लिए अपना वजन कम करने की कोशिश कर रहे थे, तभी यह घटना हुई. 27 वर्षीय सान्याल को रविवार को पुरुषों के 77 किग्रा वर्ग के क्वार्टरफाइनल मुकाबले में हिस्सा लेना था, लेकिन उन्हें प्रतियोगिता के लिए चिकित्सकीय रूप से अनफिट घोषित कर दिया गया.
भारतीय एमएमए खेल महासंघ के अध्यक्ष निखिल कुंदर ने बताया, 'गनीमत रही कि नेपाल के एक खिलाड़ी ने उन्हें उस हालत में देखा और उन्हें होश में लाने की कोशिश की. फिर वरुण ने मुझे फोन किया और हम उन्हें अस्पताल ले गए.' उन्होंने कहा, 'चिंता की कोई बात नहीं थी. उन्हें रात करीब तीन बजे क्रूज़ जहाज पर वापस लाया गया. उन्हें पर्याप्त पानी दिया गया है और यहां डॉक्टर उनकी देखभाल कर रहे हैं. उनकी हालत स्थिर है, वह बात कर सकते हैं और अब खतरे से बाहर हैं.'
सान्याल इससे पहले एशियाई खेलों में अव्यवस्थाओं को लेकर अपने अनुभव के कारण सुर्खियों में आए थे. उन्होंने बताया था कि उन सहित कई खिलाड़ियों को अपने कमरों के लिए आठ से 10 घंटे तक बिना भोजन के इंतजार करना पड़ा था. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि उस परेशानी का रविवार को उनकी तबीयत बिगड़ने में कोई योगदान था या नहीं.
कुंदर ने कहा, 'निश्चित रूप से अब वह प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लेंगे. वह चिकित्सकीय रूप से अनफिट हैं.' भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने एक बयान में कहा कि सान्याल को ‘‘पिछली शाम अपने क्रूज़ आवास में ‘सौना' सत्र के दौरान पूरे शरीर में ऐंठन और दर्द हुआ था.'
आईओए ने कहा, 'उनकी चिकित्सकीय जांच की गई और एहतियात के तौर पर रक्त की जांच भी की गई जो सामान्य रही. आराम करने के बावजूद अगली सुबह उन्हें लगा कि वह प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लेने के लिए पूरी तरह फिट नहीं हैं. अपने कोच से सलाह मश्विरा करने के बाद उन्होंने चिकित्सीय कारणों से हटने का फैसला किया.'
सान्याल एशियाई खेलों में भाग लेने वाले दो भारतीय एमएमए खिलाड़ियों में से एक हैं. उन्हें टीम में अंतिम समय में शामिल किया गया था.
एमएमए टीम की दूसरी सदस्य सुचिका तारियाल ने रविवार को महिलाओं की 60 किग्रा स्पर्धा के सेमीफाइनल में पहुंचकर आइची-नागोया एशियाई खेलों में भारत का पहला पदक पक्का कर दिया है.
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