'फ्लाइंग सिख' मिल्खा सिंह के जैसा कोई नहीं, एक नजर उनकी उपलब्धियों पर

'Flying Sikh' Milkha Singh: भारत के महान फर्राटा धावक मिल्खा सिंह (Milkha Singh) का कोरोना वायरस (COVID-19) से जूझने के बाद शुक्रवार को निधन हो गया.

'फ्लाइंग सिख' मिल्खा सिंह के जैसा कोई नहीं, एक नजर उनकी उपलब्धियों पर

मिल्खा सिंह के जैसा कोई नहीं, एक नजर उनकी उपलब्धियों पर

'Flying Sikh' Milkha Singh: भारत के महान फर्राटा धावक मिल्खा सिंह (Milkha Singh) का कोरोना वायरस (COVID-19) से जूझने के बाद शुक्रवार को निधन हो गया. शुक्रवार रात 11:30 बजे अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली थी. बता दें कि इससे पहले उनकी वाइफ भारतीय वॉलीबॉल टीम की पूर्व कप्तान निर्मल कौर का भी निधन कोरोना वायरस के कारण हो गया था. धावक मिल्खा सिंह (Milkha Singh) भारत के ऐसे एथलिथ रहें हैं जिनकी सफलता ने भारत का नाम विश्व पटल में शीर्ष पर पहुंचाया था. खासकर फर्राटा रेस में उनके जैसे कोई दूसरा भारतीय धावक आजतक नहीं आया है. मिल्खा सिंह जी ने अपने करियर में जो कारनामें किए उसी के चलते उन्हें 'फ्लाइंग सिख' के उपाधि से नवाजा गया. मिल्खा भारत के उन महान हस्तियों में शामिल हैं जिनके ऊपर फिल्म बन चुकी है, उनके जीवन की उपलब्धियों को लेकर फिल्म मेकर राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने फिल्म 'भाग मिल्खा भाग' बनाई थी जो सुपरहिट रही थी. आज जब वो हमारे बीच नहीं हैं तो डालते हैं एक नजर उनकी उपलब्धियों पर..

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एशियाई खेलों में 4 गोल्ड मेडल
एशियाई खेलों में मिल्खा सिंह जी ने 4 बार गोल्ड मेडल हासिल किए हैं. 1958 में इंग्लैंड में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने 400 मीटर की रेस में भारत को गोल्ड मेडल जीताया था. ऐसा कर वो भारत के पहले ऐसे एथलिथ बने थे जिन्होंने भारत की ओर से भारत को पहला व्यक्तिगत गोल्ड मेडल दिलाया था. इसके साथ-साथ जापान में खेले गए खेलो में मिल्खा सिंह का जलवा बरकरार रहा, उन्होंने यहां पर भी कमाल करते हुए भारत को  200 मीटर और 400 मीटर की रेस में गोल्ड मेडल दिलाया. इसके बाद जकार्ता में  आयोजित हुए एशियाई खेलो में फ्लाइंग सिख ने 200 मीटर की रेस में गोल्ड और 400 मीटर की रिले रेस में भी गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया था. 

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रोम ओलंपिक में इतिहास रचने से चूके लेकिन बनाया यह रिकॉर्ड
1960 के रोम ओलंपिक में मिल्खा सिंह ने एक कमाल का रिकॉर्ड बना दिया. हालांकि वो कांस्य मेडल जीतने से चूक गए लेकिन रेस में जिस तरह से उ्न्होंने दौ़ड़ लगाई वो अपने-आप में काबिलेतारीफ वाली बात थी. हालांकि वो कांस्य मेडल मामूली अंतर से जीतने से रह गए थे. जिस धावक ने कांस्य पदक जीता था उसने दौड़ 45.5 सेकंड में पूरी की थी, वहीं. मिल्खा सिंह जीत ने रेस 45.6 सेकंड में पूरी की थी. मिल्खा सिंह को कास्य पदक नहीं जीतना का मलाल हमेशा रहा. वो अपने इंटरव्यू में इस बात को हमेशा कहा करते थे. बता दें कि उन्होंने 1956 और 1964 ओलंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया है. साल 1959 में उन्हें पद्मश्री अवॉर्ड से नवाजा गया था. इसके अलावा 2001 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया लेकिन उन्होंने सरकार के अर्जुन पुरस्कार को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया था कि "इसको हुए 40 साल हो गए हैं बहुत देर हो चुकी है.'