कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 (Commonwealth Games 2026) के आगाज में अब महज कुछ घंटे शेष रह गए हैं. प्रतिष्ठित टूर्नामेंट का 23वां सीजन 23 जुलाई से दो अगस्त के बीच स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में खेला जाएगा. जहां कुल 74 देशों के करीब तीन हजार एथलीट्स 10 खेलों में हिस्सा लेंगे. इस दौरान कुल 215 गोल्ड मेडल दांव पर लगे होंगे. प्रतिस्पर्धा के दौरान बिहार के 'लाल' झंडू कुमार (Jhandu Kumar) की भी नजरें पदक पर होंगी. खेल के दौरान वह पैरा पावरलिफ्टिंग में अपना दम दिखाएंगे. झंडू कुमार की कहानी बेहद प्रेरणादायक और संघर्षों से भरी है, जो कुछ इस प्रकार है-
नालंदा में हुआ था झंडू कुमार का जन्म
झंडू कुमार का जन्म बिहार के नालंदा जिले में स्थित हरनौत में हुआ था. मौजूदा समय में वह 28 साल के हैं. बताया जाता है कि झंडू कुमार का प्रारंभिक जीवन काफी संघर्षों से भरा था. एक समय पर उन्होंने गुजर-बसर करने के लिए ई रिक्शा चलाने से लेकर सब्जी बेचने तक का काम किया था. अब वह लोगों की उम्मीद बनकर ग्लासगो पहुंच गए हैं. लोगों को उम्मीद है कि उन्होंने अपने निजी जीवन में आई चुनौतियों को जैसे मात दिया. ठीक उसी प्रकार वह ग्लासगो में भी देश का झंडा बुलंद करेंगे.
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झंडू कुमार को बचपन में ही लेना पड़ा बैसाखी का सहारा
झंडू कुमार ने महज पांच साल की उम्र में ही अपने पैरों की मजबूती गंवा दी थी. उन्हें पोलियो हो गया था. जिसके बाद उन्हें बैसाखी का सहारा लेना पड़ा. पोलियो की मार से वह उबर भी नहीं पाए थे कि गरीबी ने उन्हें अपनी चंगुल में फंसा लिया. परिवार का पालन-पोषण करने के लिए उन्होंने सब्जी बेचने का काम शुरू कर दिया. मगर यहां से भी गुजारा नहीं चला तो उन्होंने कोरोना काल में ई-रिक्शा चलाना शुरू कर दिया. मगर स्थिति जस की तस बनी रही. नतीजन एक समय पर उन्हें अपना ई-रिक्शा भी बेचना पड़ा.
गोला फेंक, भाला फेंक और चक्का फेंक में भी आजमाया हाथ
पैरा पावरलिफ्टिंग में आने से पहले झंडू कुमार ने गोला फेंक, भाला फेंक और चक्का फेंक जैसे खेलों में भी हाथ आजमाया था. मगर यहां उन्हें कुछ खास कामयाबी हाथ नहीं लगी. जिसके बाद उन्होंने पैरा पावरलिफ्टिंग पर फोकस किया. फिलहाल यहां वह लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और देशवासियों की उम्मीग बने हुए हैं.
कैसे पैरा प्रॉवरलिफ्टिंग में आए झंडू कुमार?
जनसत्ता की रिपोर्ट के मुताबिक झंडू कुमार जब शॉट पुट के दौरान डिस्कस फेंकते थे तो वह बाइसेप्स और ट्राईसेप्स की एक्सरसाइज किया करते थे. जहां उनका कंधा पूरी तरह खुल नहीं पाया था. उसी दौरान बिहार में एक सिक्रेटरी ने उन्हें सुझाव दिया कि वह पावरलिफ्टिंग को आजमा सकते हैं. क्योंकि उनकी बॉडी काफी अच्छी और ताकतवर है. उन्होंने सुझाव को माना और आज एक अलग मुकाम पर हैं.
भारतीय पैरा पावरलिफ्टिंग के अध्यक्ष जेपी सिंह का बयान
भारतीय पैरा पावरलिफ्टिंग के अध्यक्ष जेपी सिंह ने ग्लासगो से NDTV के स्पोर्ट्स एडिटर विमल मोहन से बातचीत करते हुए कहते हैं, 'झंडू कुमार ने काफी मेहनत की है और हमें उनसे काफी उम्मीद है. यहां ग्लासगो में भी उनका फोकस मेडल पर बना हुआ है. मुझे उम्मीद है कि वह पोडियम पर अच्छे नंबर पर दिखेंगे.'
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