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क्रिकेट-हॉकी के अलावा, एशियन गेम्स 2026 के अनजान खेल, जहां भारत रच सकता है इतिहास

इन खास इवेंट्स में कई उभरते हुए एथलीटों के हिस्सा लेने के साथ, भारत को उम्मीद है कि उसके कुछ कम मशहूर खेल 2026 एशियन गेम्स में चौंकाने वाली सफलता और शायद मेडल भी दिला सकते हैं.

क्रिकेट-हॉकी के अलावा, एशियन गेम्स 2026 के अनजान खेल, जहां भारत रच सकता है इतिहास
इन 5 अनोखे खेलों में भारत एशियन गेम्स 2026 में रच सकता है इतिहास

एशियन गेम्स 2026 जापान के आइची-नागोया में आगाज हो गया है. जिसमें लगभग 11,000 एथलीट कई तरह के खेलों में हिस्सा लेंगे. भारतीय एथलीट न केवल एथलेटिक्स, हॉकी, क्रिकेट और कबड्डी जैसे पारंपरिक गेम्स में मेडल जीतने की तैयारी कर रहे हैं, बल्कि वे उन कम चर्चित गेम्स के लिए भी तैयारी कर रहे हैं जिनमें देश को अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीद है. टेकबॉल और कुराश से लेकर सॉफ्ट टेनिस और स्पोर्ट क्लाइंबिंग तक, भारतीय खिलाड़ी महाद्वीपीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ने की कोशिश करेंगे. हालांकि टेकबॉल में भारत की क्विम्सी डिसूजा को एशियन गेम्स में महिलाओं के एकल टेकबॉल इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल से चूक गईं.  उन्हें जापान की युइना साकामोटो से करीबी मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा.

टेकबॉल: फ़ुटबॉल और टेबल टेनिस का संगम

टेकबॉल एक खास तरह से डिजeइन की गई घुमावदार टेबल पर खेला जाता है, इसमें खिलाड़ियों को हाथों और बाहों को छोड़कर शरीर के किसी भी हिस्से का इस्तेमाल करके फुटबॉल को कंट्रोल करना और वापस भेजना होता है, फुटबॉल स्किल्स को टेबल टेनिस की लय और बनावट के साथ मिलाकर खेले जाने वाले इस खेल में, गेंद को विरोधी खिलाड़ी के पास वापस भेजने से पहले ज्यादा से ज्यादा तीन बार टच किया जा सकता है. इसके मुकाबले सिंगल्स और डबल्स फॉर्मेट में होते हैं.

हंगरी में शुरू हुआ टेकबॉल पिछले दशक में दुनिया भर में तेजी से लोकप्रिय हुआ है,  मार्च 2026 में ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया ने इसे आधिकारिक तौर पर एशियन गेम्स के प्रोग्राम में शामिल किया और यह आइची-नागोया में पहली बार खेला जा रहा है.  भारत का प्रतिनिधित्व मोहम्मद अनस इमरान बेग, डेक्लान मार्शल गोंसाल्वेस और क्विंसी डिसूजा कर रही हैं, जो पुरुष डबल्स, मिक्स्ड डबल्स और महिला सिंगल्स इवेंट्स में हिस्सा लेंगे, हालांकि  महिला सिंगल्स इवेंट्स में क्विंसी डिसूजा मेडल जीतने से चूक गई हैं लेकिन क्विम्सी के लिए अब फोकस मिक्स्ड डबल्स मुकाबले में मेडल जीतने पर होगी. क्योंकि वह और मोहम्मद अनस बेग इमरान वियतनाम के गुयेन होआंग मिन्ह टैन और ट्रिन्ह जियान्घी का सामना करेंगीं.

कुराश: बिना ग्राउंडवर्क वाली कुश्ती

कुराश मध्य एशिया की कुश्ती का एक पुराना रूप है, जिसमें खिलाड़ी पूरे मुकाबले के दौरान खड़े रहकर अपने प्रतिद्वंद्वी को पीठ के बल गिराने की कोशिशृ करते हैं. यह मुकाबला 'गिलम' नाम की मैट पर होता है. जूडो और कुश्ती के उलट, इसमें ग्राउंडवर्क की मनाही है, इसलिए प्रतिद्वंद्वी को पटकना और संतुलन बनाए रखना इस खेल की मुख्य बातें हैं. खिलाड़ी पारंपरिक जैकेट पहनते हैं जिसे 'याख्ताक' कहा जाता है, साथ ही सफेद पतलून और लाल बेल्ट पहनते हैं और नंगे पैर मुकाबला करते हैं.

किक मारना, प्रहार करना, गला दबाना और बेल्ट के नीचे पकड़ना जैसे काम पूरी तरह मना हैं. एक साफ थ्रो जिसमें प्रतिद्वंद्वी को पूरे नियंत्रण के साथ पीठ के बल गिराया जाता है, उसे 'हलाल'कहा जाता है, जिससे तुरंत जीत मिल जाती है. मुकाबले के दौरान कई पारंपरिक कमांड का इस्तेमाल किया जाता है, जैसे कुराश, तोख्ता (रोकना) और बेकार (स्कोर रद्द करना) शामिल है.  भारत ने एशियन गेम्स में कुराश में दो मेडल जीते हैं. जकार्ता 2018 में पिंकी बल्हारा ने महिलाओं के 52 किग्रा वर्ग में सिल्वर मेडल जीता, जबकि मालाप्रभा जाधव ने ब्रॉन्ज़ मेडल हासिल किया.

भारत की कुराश टीम

पुरुष:

विपिन कुमार (-66 किग्रा)
विशाल (+90 किग्रा)
यश कुमार (+90 किग्रा)

महिलाएं:

पिंकी चौहान (-78 किग्रा)
भारती बल्हारा (-57 किग्रा)
संगीता बल्हारा (-57 किग्रा)

एशियन गेम्स में पुरुष टीम सिंगल्स, टीम इवेंट्स और मिक्स्ड डबल्स में हिस्सा लेगी.
महिला: आध्या तिवारी,  महिला सिंगल्स और मिक्स्ड डबल्स में हिस्सा लेंगी.

सेपक टकरा: वॉलीबॉल कोर्ट में फुटबॉल

सेपक टकरा दक्षिण-पूर्व एशिया का एक लोकप्रिय टीम खेल है जिसे वॉलीबॉल और फुटबॉल का मिश्रण ("किक वॉलीबॉल") माना जाता है. इसमें तीन खिलाड़ियों की टीमें (जिन्हें 'रेगु' कहा जाता है) नेट के आर-पार मुकाबला करती हैं.  खिलाड़ियों को अपने हाथों या बाहों का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं होती है, इसके बजाय, वे गेंद को कंट्रोल करने के लिए अपने पैरों, छाती और सिर का इस्तेमाल करते हैं. विरोधी टीम को गेंद वापस भेजने से पहले टीमें ज्यादा से ज्यादा तीन बार गेंद को छू सकती हैं. यह खेल अपने शानदार कलाबाजी वाले किक, फ्लिप और हवा में दिखाए जाने वाले करतबों के लिए जाना जाता है. 

साउथ-पूर्व एशिया में शुरू हुए सेपक टकरा ने 1990 में एशियन गेम्स में अपनी शुरुआत की थी.  भारत में यह खेल देखने में बहुत रोमांचक होने के बावजूद कम मशहूर खेलों में से एक है. जब कोई टीम विरोधी टीम के कोर्ट में गेंद गिराती है या विरोधी टीम को गलती करने पर मजबूर करती है, तो उसे एक पॉइंट मिलता है. सेट 21 पॉइंट के होते हैं और जीतने के लिए टीम को कम से कम दो पॉइंट के अंतर से जीतना जरूरी होता है।

भारत ने इस खेल में एशियन गेम्स में दो मेडल जीते हैं, और दोनों ही ब्रॉन्ज़ मेडल हैं।. पुरुषों की टीम रेगु ने जकार्ता 2018 में ब्रॉन्ज मेडल जीता, जबकि महिलाओं की रेगु टीम ने हांग्जो 2022 में यही कारनामा दोहराया था. 

भारत की सेपक टकरा टीम

पुरुष: अरुण, जसवीर, आशीष चुंडावत, श्याम सिंह, लोखोन सिंह इलांगबम, बॉबी कुमार, अशोक सिंह मायेन्गबम, राम कुमार शर्मा, ओ अमरजीत सिंघा, मालेमन्गनबा सिंह सोरोखाइबम, हेनरी सिंह वाहेन्गबम और आकाश युमनाम

महिलाएं: लेइरेन्टोनबी देवी इलांगबम, प्रीति लांगोलजाम, मेनेनु त्सुकुरू, माइपाक देवी आयेकबम, प्रिया देवी इलांगबम, शिल्पा इलांगबम, चाओबा देवी ओइनाम, सेयेख्रिएनो टेपा और मालेमन्गनबी युमनाम

स्पोर्ट क्लाइंबिंग: रफ्तार, ताकत और हुनर ​​की परीक्षा

 स्पोर्ट क्लाइंबिंग एक रोमांचक और चुनौतीपूर्ण खेल है, जो पर्वतारोहण का एक आधुनिक और नियंत्रित रूप है.  इस खेल ने जकार्ता 2018 में एशियाई खेलों में अपनी शुरुआत की थी।

इस खेल में तीन इवेंट होते हैं:

स्पीड

जैसा कि नाम से ही पता चलता है, स्पीड क्लाइंबिंग एक रेस है, इसमें खिलाड़ी 15 मीटर ऊंची दीवार पर चढ़ते हैं और जो एथलीट सबसे पहले ऊपर पहुंचता है, उसे विजेता घोषित किया जाता है.

बोल्डर

बोल्डरिंग में क्लाइंबर्स को बिना रस्सी के छोटे लेकिन बहुत मुश्किल और तकनीकी रास्ते पूरे करने होते हैं. इस इवेंट में ताकत, संतुलन और समस्या सुलझाने की क्षमता पर जोर दिया जाता है.

लीड

लीड क्लाइंबिंग में दीवार पर बने सेफ्टी पॉइंट्स में रस्सी को क्लिप करते हुए ऊपर चढ़ना होता है, इसमें सफलता सहनशक्ति, तकनीक और रास्ते को सही ढंग से तय करने की क्षमता पर निर्भर करती है, ये तीनों इवेंट मिलकर एथलीट की रफ्तार स्टैमिना, ताकत और संतुलन की परीक्षा लेते हैं. हालांकि भारत ने एशियन गेम्स के उन दोनों संस्करणों में हिस्सा लिया है जिनमें स्पोर्ट क्लाइंबिंग शामिल थी, लेकिन इस इवेंट
 में भारत को एक भी मेडल अभी तक नहीं मिल पाई है. 

भारत की स्पोर्ट क्लाइंबिंग टीम

पुरुष: दीपू मल्लेश (स्पीड)

महिला: जोगा पुर्ती (स्पीड)

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