भारत की स्क्वैश स्टार अनाहत सिंह को एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा है. उन्हें महिला सिंगल्स फाइनल में शिवसांगरी सुब्रमण्यम से 11-4,11-4 और 11-7 से सीधे सेटों में हार का सामना करना पड़ा. भले ही अनाहत को सिल्वर मेडल ही मिल पाया लेकिन स्क्वैश जगत में अपने परफॉर्मेंस से सबका दिल जीतने में जरूर सफल हो गईं हैं. बता दें कि सिर्फ़ तीन साल में अनाहत के मेडल का रंग बदल गया है. और, बदल गई है भारत में स्क्वॉश की फ़िज़ा. रैकेट स्पोर्ट को एक और सानिया मिर्ज़ा मिल गई है. स्क्वॉश देखने वालों की तादाद लगातार बढ़ रही है. बड़ी बात ये है कि फ़ैन्स जिसर तरह से सानिया मिर्ज़ा की वजह से ग्रैंड स्लैम और कई बड़े टेनिस टूर्नामेंट देखते नज़र आते थे, अब अनाहत भारत र दुनिया भर के फ़ैन्स को स्क्वॉश कोर्ट तक खींच कर लाने लगी हैं. दिल्ली की अनाहत सिंह स्क्वॉश का वही X फ़ैक्टर (एक्स फ़ैक्टर) बन गई है, जैसे सानिया मिर्ज़ा ने जूनियर स्तर से उठकर क़रीब दो दशक तक भारतीय टेनिस का परचम लहराया. अनाहत भी 11 साल की उम्र से बड़े ख़िताब जीत रही हैं और उम्र उनके साथ है. पिछले तीन साल से अनाहत लगातार एशियाड के साथ, एशियन चैंपियनशिप और वर्ल्ड कप का गोल्ड जीतकर अपना रुतबा बढ़ाती जा रही हैं.
पूर्व स्क्वॉश वर्ल्ड चैंपियन और अनाहत के मेंटॉर सौरव घोषाल NDTV से बात करते हुए कहते हैं, “अनाहत की वजह से यकीनन भारत में ही नहीं दुनिया भर में स्क्वॉश में लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है. उनका गेम लगातार बेहतर हो रहा है. उनमें मैच्योरिटी भी आई है. और उनमें सानिया की तरह ही एक एक्स फ़ैक्टर है. सानिया ने अपने गेम के लिए बहुत किया. लेकिन सानिया और अनाहत दोनों अलग पर्सनैलिटीज़ हैं.”
पीवी सिंधु को देखकर रैकेट स्पोर्ट में आईं अनाहत
कमाल की बात है कि जब अनाहत 8 साल की थीं तब उन्होंने पीवी सिंधु को रियो ओलिंपिक्स में मेडल जीतते देखा. अनाहत पीवी सिंधु से प्रेरित होकर पहले बैडमिंटन खेलने लगीं. लेकिन फिर बाद में उनका रुझान स्क्वॉश में बढ़ा और फिर स्क्वॉश कोर्ट पर वो धूम मचाने लगीं. उन्होंने 2019 में U11 ब्रिटिश जूनियर ओपन का ख़िताब जीता और तबसे उनपर सबकी नज़रें टिक गईं. अंडर 17 में इसी टूर्नामेंट की वो उपविजेता भी रहीं. उन्होंने एशियन जूनियर चैंपियनशिप के 3 गोल्ड और 3 ब्रॉन्ज़ के अलावा वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप का ख़िताब भी जीते.
ग्रेगरी-स्टीफ़ान-घोषाल जैसे दिग्गजों ने निखारा
तीन साल पहले हांगझोऊ एशियाड में अनाहत ने महिला टीम और मिक्स्ड डबल्स के कांस्य पदक भी जीते. पूर्व वर्ल्ड चैंपियन और 2022 एशियाड के सिल्वर मेडल विजेता सौरव घोषाल NDTV संवाददाता विमल मोहन से कहते हैं, “पिछली बार जब अनाहत एशियाड खेल रही थीं तब सिर्फ़ 15 साल की थीं. तब बतौर खिलाड़ी भी वो खुद की पहचान बना रही थीं और निखर रही थीं. तब वो एक जूनियर खिलाड़ी थीं. लेकिन पूर्व वर्ल्ड नंबर 1 और वर्ल्ड चैंपियन फ़्रेंच खिलाड़ी ग्रेगरी गॉल्टियर, स्टीफ़ान गैलिफि और मैंने भी उनके खेल को बेहतर करने की कोशिश की है. अनाहत लगातार बेहतर हुईं हैं.”
पूर्व हॉकी खिलाड़ी माता-पिता कराते रहे सपनों का सफ़र
अनाहत पढ़ाई में भी अच्छी रही हैं. उनके माता-पिता पूर्व हॉकी खिलाड़ी रहे हैं. उनके माता-पिता ने शुरुआत से ही अनाहत को अपना सपना पूरा करने की पूरी छूट दे दी. इस महंगे खेल के लिए वो दुनिया भर में अनाहत को लेकर जाते रहे हैं. वो PSA टूर पर भी धूम मचाती रही हैं. उनके नाम कई टूर ख़िताब हैं और दुनिया के नामी खिलाड़ियों को भी वो धूल चटाती रही हैं.
एशियाड की ऐतिहासिक कामयाबी
18 साल की अनाहत अबतक सीनियर स्तर पर वर्ल्ड टूर में कम से कम 15 और जूनियर स्तर के 10 ख़िताब अपने नाम कर चुकी हैं. ये अनाहत सिंह का एशियाड में तीसरा मेडल है. हांगझोऊ एशियाड में तीन साल पहले वो मिक्सड डबल्स और महिला टीम के ब्रॉन्ज मेडल्स भी अपने नाम कर चुकीं हैं. एशियाड की कामयाबी ने उनके नाम के आगे एक स्टार का तमगा परमानेंट कर दिया है.
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