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सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार ब्रेकफास्ट टेबल पर होंगे आमने-सामने, क्या कर्नाटक कांग्रेस की खींचतान होगी खत्म

कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर सीएम सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के बीच खींचतान जारी है. ऐसे में दोनों दिग्गज नेता ब्रेकफास्ट मीटिंग में एक-दूजे के सामने-सामने होंगे.

सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार ब्रेकफास्ट टेबल पर होंगे आमने-सामने, क्या कर्नाटक कांग्रेस की खींचतान होगी खत्म
  • कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच पावर की लड़ाई
  • कांग्रेस हाईकमान ने दोनों नेताओं को विवाद समाप्त करने के लिए ब्रेकफास्ट पर बैठक करने का निर्देश दिया है
  • शिवकुमार ने सोशल मीडिया पर अपनी बात पर कायम रहने और शब्दों की ताकत पर जोर देते हुए पावर-शेयरिंग का जिक्र किया
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बेंगलुरु:

सत्ता का खेल भी अजीब होता है या कब क्या हो जाए कुछ नहीं कहा जा सकता. इसी की बानगी इन दिनों कर्नाटक कांग्रेस में देखने को मिल रही है. कर्नाटक की राजनीति इन दिनों सिर्फ महज कुर्सी की नहीं, बल्कि शब्दों की ताकत पर भी लड़ाई लड़ रही है. एक तरफ मुख्यमंत्री सिद्धारमैया हैं, तो दूसरी तरफ डिप्टी डीके शिवकुमार हैं. सोशल मीडिया पर शुरू हुई यह ‘शब्दों की जंग' अब पार्टी के गलियारों में गूंज रही है, जहां हर पोस्ट सत्ता समीकरणों की नई कहानी गढ़ता दिख रही है. हाईकमान की चेतावनी के बाद दोनों दिग्गजों को अब एक ही मेज पर आमने-सामने बैठना है. ब्रेकफास्ट की प्लेटों के बीच सत्ता का स्वाद तय होगा. लेकिन सवाल यह है कि क्या यह मुलाकात सिर्फ दिखावे की होगी या कर्नाटक कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान को खत्म किया जा सकेगा.

कर्नाटक में पावर गेम

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी डीके शिवकुमार के बीच चल रही पावर की खींचतान के बीच, सूत्रों ने बताया कि दोनों को कांग्रेस हाईकमान से इस दरार को भरने के लिए कॉल आए हैं. हाईकमान के इशारे के बाद, सिद्धारमैया ने शिवकुमार को ब्रेकफास्ट पर मीटिंग के लिए बुलाया है. खबर है कि टॉप नेताओं ने सीनियर नेताओं की "शब्दों की लड़ाई" के लिए भी आलोचना की है. गुरुवार के दिन ही डिप्टी सीएम शिवकुमार ने X पर लिखा, "अपनी बात पर कायम रहना दुनिया की सबसे बड़ी ताकत है! शब्दों की ताकत ही दुनिया की ताकत है... दुनिया की सबसे बड़ी ताकत अपनी बात पर कायम रहना है." उन्होंने लिखा, "जज बनो, प्रेसिडेंट बनो या कोई और, मैं भी, हर किसी को अपनी बात पर चलना होगा. शब्दों की ताकत ही दुनिया की ताकत है,"

उनका ये पोस्ट कांग्रेस हाईकमान को 2023 में पावर-शेयरिंग एग्रीमेंट की याद दिलाने जैसा था, जब पार्टी के राज्य चुनाव जीतने के बाद सिद्धारमैया और वह दोनों ही मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नज़र लगाए हुए थे. इसके तुरंत बाद सिद्धारमैया ने अपनी पोस्ट के साथ जवाब दिया: "एक शब्द तब तक ताकत नहीं है जब तक वह लोगों के लिए दुनिया को बेहतर न बनाए." उनकी पोस्ट में लिखा था, "कर्नाटक के लोगों का दिया हुआ जनादेश एक पल नहीं, बल्कि एक ज़िम्मेदारी है जो पूरे पांच साल तक चलती है." उनके इस पोस्ट को शिवकुमार की पोस्ट का जवाब माना जा रहा है. सूत्रों ने NDTV को बताया कि सोशल मीडिया पर "शब्दों" की ये जंग आलाकमान को किसी हाल रास नहीं आई. अब दोनों नेताओं से आने वाले दिनों में दिल्ली में होने वाली किसी भी मीटिंग से पहले एक साथ आने को कहा गया है.

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ब्रेकफास्ट का न्योता

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें इस मुद्दे पर बात करने के लिए शिवकुमार से मिलने के लिए कहा है. जब वह ब्रेकफ़ास्ट के लिए आएंगे, तो हम इस पर बात करेंगे. सिद्धारमैया ने कहा कि मेरे स्टैंड में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं हुआ है और मैंने कहा है कि हाईकमान जो भी कहेगा, मैं सुनूंगा. हम दोनों ने कहा है कि पार्टी हाईकमान जो भी कहेगा, हम मानेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि अगर हाईकमान उन्हें बुलाएगा तो वह दिल्ली जाएंगे. अपनी तरफ से, डीके शिवकुमार ने कहा कि उन्हें कुछ नहीं चाहिए और उन्हें कोई जल्दी नहीं है. डीके शिवकुमार ने रिपोर्टर्स से कहा, "पार्टी वर्कर्स शायद उत्सुक हों, लेकिन मुझे कोई जल्दी नहीं है, पार्टी सारे फैसले लेगी."

अफवाहों वाला 'फॉर्मूला'

2023 में, ऐसी खबरें आईं कि "रोटेशनल चीफ मिनिस्टर फॉर्मूला" के आधार पर समझौता हो गया है, जिसके अनुसार शिवकुमार ढ़ाई साल बाद चीफ मिनिस्टर बनेंगे, लेकिन पार्टी ने इसे ऑफिशियली कन्फर्म नहीं किया है. इस महीने अफवाहें तब और तेज हो गईं जब 20 नवंबर को राज्य में कांग्रेस सरकार अपने पांच साल के टर्म के आधे सफर पर पहुंच गई. अलग-अलग नेताओं, जाति ग्रुप्स और धार्मिक हस्तियों के पब्लिक बयानों से ये पूरी तरह से पावर की लड़ाई में बदल गईं. जब शिवकुमार से सो-कॉल्ड फ़ॉर्मूले के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने सीधा जवाब देने से मना कर दिया और "सीक्रेट डील" वाली बात कहने लगे.

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क्या है सीक्रेट डील

उन्होंने कहा, "मैंने मुख्यमंत्री बनाने के लिए नहीं कहा है. यह हम पांच और छह लोगों के बीच एक सीक्रेट डील है. मैं इस पर पब्लिकली कुछ नहीं कहना चाहता, मुझे अपनी अंतरात्मा पर भरोसा है. हमें अपनी अंतरात्मा से काम लेना चाहिए. मैं किसी भी तरह से पार्टी को शर्मिंदा नहीं करना चाहता और उसे कमज़ोर नहीं करना चाहता. अगर पार्टी है, तो हम हैं. अगर कार्यकर्ता हैं, तो हम हैं." सूत्रों ने बताया कि इस महीने की शुरुआत में, शिवकुमार का समर्थन करने वाले छह कांग्रेस विधायकों का एक बैच हाईकमान से मिलने दिल्ली गया था. जब शिवकुमार से इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है और हो सकता है कि वे मंत्री बनने की कोशिश कर रहे हों.

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