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Heera Group investment scam: ईडी ने नाज़नीन को किया गिरफ्तार, निवेशकों से ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग में भूमिका का है आरोप

यह पूरा मामला तेलंगाना और आंध्र प्रदेश पुलिस की ओर से दर्ज कई एफआईआर (FIR) पर आधारित है. आरोप है कि हीरा ग्रुप ने देश भर के हजारों निवेशकों को ऊंची ब्याज दरों और आकर्षक रिटर्न का लालच देकर करोड़ों रुपये की ठगी की और बाद में उस पैसे का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया.

Heera Group investment scam: ईडी ने नाज़नीन को किया गिरफ्तार, निवेशकों से ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग में भूमिका का है आरोप
हीरा ग्रुप निवेश घोटाला: ईडी ने नाज़नीन को किया गिरफ्तार
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ED Action News: हैदराबाद (Hyderabad) में प्रवर्तन निदेशालय  ने हीरा ग्रुप निवेश घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए नाज़नीन अंसारी उर्फ आबिदा को गिरफ्तार किया है. यह मामला हीरा ग्रुप और उसकी प्रमुख Nowhera Shaik पर निवेशकों से करोड़ों रुपये की कथित ठगी से जुड़ा है. 

ईडी की जांच तेलंगाना और आंध्र प्रदेश पुलिस की ओर से दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी. आरोप है कि हीरा ग्रुप और उसके संचालकों ने आकर्षक निवेश योजनाओं का लालच देकर बड़ी संख्या में लोगों से भारी रकम जमा करवाई और बाद में निवेशकों के पैसे का दुरुपयोग किया. 

नाज़नीन अंसारी के खिलाफ हैं ये आरोप

दरअसल, जांच में सामने आया था कि नाज़नीन अंसारी, नौहेरा शेख की निजी सहायक  के रूप में काम कर रही थीं. ईडी के मुताबिक वह उन संपत्तियों की देख-रेख कर रही थीं, जिन्हें पहले ही एजेंसी की ओर से अटैच किया जा चुका था. उन संपत्तियों से किराया वसूलने, नए लोगों को हीरा ग्रुप में निवेश के लिए प्रेरित करने और विभिन्न सरकारी अधिकारियों को गुमराह करने में भी उनकी सक्रिय भूमिका पाई गई. ईडी का कहना है कि नाज़नीन अंसारी को इस बात की पूरी जानकारी थी कि हीरा ग्रुप के खिलाफ जांच चल रही है, इसके बावजूद वह निवेशकों से पैसे जुटाने की गतिविधियों में शामिल रहीं. जांच एजेंसी के अनुसार वह अपराध से कमाई गई संपत्तियों के कब्जे, उपयोग और उनसे होने वाली आय को बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही थीं. 

प्रीम कोर्ट के आदेशों को भी कर दिया था दरकिनार

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि जिन संपत्तियों को ईडी ने अटैच किया था और जिन्हें सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत नीलाम किया जाना था, उन पर भी नाज़नीन अंसारी का कब्जा था. ईडी का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की जानकारी होने के बावजूद उन्होंने नीलामी प्रक्रिया में बाधा डालने का काम किया. उन्होंने अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि अटैच संपत्तियों का निरीक्षण न होने दिया जाए और उन्हें सामान्य और विवाद-मुक्त संपत्ति के रूप में दिखाया जाए.  

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ईडी का कहना है कि जांच में मिले सबूतों से यह साबित होता है कि नाज़नीन अंसारी ने जानबूझकर अपराध से अर्जित धन और संपत्तियों को छिपाने, उनका इस्तेमाल करने और उनसे आगे आर्थिक लाभ पैदा करने में मदद की. इस तरह वह मनी लॉन्ड्रिंग की गतिविधियों में सीधे तौर पर शामिल थीं. 

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