विज्ञापन

40 हजार करोड़ अपराध की कमाई, रिलायंस कम्युनिकेशंस केस में ED का खुलासा

ईडी ने इस मामले में ₹40,185.55 करोड़ की रकम को प्रोसीड्स ऑफ क्राइम यानी अपराध से हासिल रकम के तौर पर चिन्हित किया है।

40 हजार करोड़ अपराध की कमाई, रिलायंस कम्युनिकेशंस केस में ED का खुलासा
रिलायंस कम्युनिकेशंस के खिलाफ एक्शन
NDTV

रिलायंस कम्युनिकेशंस केस में ईडी ने ₹40 हजार करोड़ से ज्यादा की रकम को अपराध से कमाई आय बताया है. इसके ऊपर जांच एजेंसी ने ₹8,078 करोड़ की संपत्तियों की जब्ती की मांग की है.

प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 8 अगस्त 2026 को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट स्थित स्पेशल पीएमएलए कोर्ट में इस मामले में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है। यह 27 मार्च 2026 को दाखिल की गई मुख्य चार्जशीट के आगे की कार्रवाई है। चार्जशीट में ईडी ने 40,000 करोड़ रुपए को प्रोसीड ऑफ क्राइम यानी अपराध से हासिल रकम बताया है।

इस मामले में रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड यानी आरकॉम, रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड यानी आरटीएल के अलावा गौतम भाईलाल दोशी, सतीश सेठ, अमिताभ झुनझुनवाला और कुछ अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है। ईडी का आरोप है कि इन लोगों ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े अपराध किए हैं। इन पर पीएमएलए की धारा 3 और धारा 3 के साथ धारा 70 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

ईडी की जांच सीबीआई की बैंकिंग सिक्योरिटीज एंड फ्रॉड ब्रांच, नई दिल्ली की ओर से दर्ज की गई कई एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। ये एफआईआर बैंकों और वित्तीय संस्थानों की शिकायतों पर दर्ज की गई थीं। इनमें रिलायंस कम्युनिकेशंस, रिलायंस टेलीकॉम और रिलायंस इंफ्राटेल लिमिटेड से जुड़ी कथित वित्तीय गड़बड़ियों की जांच की जा रही थी।

ईडी का आरोप है कि कंपनियों ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों से बड़ी रकम का कर्ज लिया, लेकिन जिस काम के लिए यह पैसा लिया गया था, उसका इस्तेमाल उस काम में नहीं किया गया। जांच में एजेंसी को पता चला कि नए कर्ज से पुराने कर्ज और देनदारियां चुकाई जाती रहीं। यानी एक तरह से नए पैसे से पुराने कर्ज को संभालने का सिलसिला चलता रहा।

ईडी के मुताबिक, नई क्रेडिट फैसिलिटीज का इस्तेमाल पुराने घरेलू और विदेशी कर्ज चुकाने, पैसों को एक जगह से दूसरी जगह भेजने और पुराने कर्ज को लगातार चलाए रखने के लिए किया गया। एजेंसी का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया के जरिए कंपनियों की वास्तविक वित्तीय स्थिति को छिपाने की कोशिश की गई।

जांच के दौरान ईडी को यह भी पता चला कि रकम को कई कंपनियों और बैंक खातों के जरिए इधर-उधर किया गया। कुछ पैसे अलग-अलग ग्रुप कंपनियों और दूसरी संस्थाओं के जरिए घुमाए गए, जबकि कुछ रकम को लिक्विड म्यूचुअल फंड्स में भी लगाया गया। ईडी के मुताबिक, इन पैसों का इस्तेमाल पुराने एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग्स यानी ईसीबी और फॉरेन करेंसी कन्वर्टिबल बॉन्ड्स यानी एफसीसीबी की देनदारी चुकाने में भी किया गया।

ईडी का कहना है कि पैसों के इन लेन-देन को बाद में सामान्य कारोबारी खर्च या वैध कारोबारी आय के तौर पर दिखाने की कोशिश की गई।

जांच एजेंसी का दावा है कि यह पूरा मामला हाल के कुछ वर्षों तक सीमित नहीं है। ईडी के मुताबिक, कथित वित्तीय गड़बड़ी का सिलसिला कम से कम साल 2007 से शुरू हुआ था और इसके बाद भी जारी रहा। एजेंसी का कहना है कि अलग-अलग लेन-देन आपस में जुड़े हुए थे और इन्हें एक लगातार चलने वाली कथित आपराधिक गतिविधि के तौर पर देखा गया है।

ईडी का आरोप है कि कर्ज के पैसों का एक हिस्सा रिलायंस ग्रुप की दूसरी कंपनियों, जैसे रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और रिलायंस कैपिटल लिमिटेड की तरफ भी भेजा गया।

जांच में ईडी ने यह भी आरोप लगाया है कि कर्ज की रकम का कुछ हिस्सा प्रमोटर्स की निजी संपत्तियां खरीदने के लिए विदेश भेजा गया। एजेंसी के मुताबिक, पैसों को अलग-अलग रास्तों से घुमाकर उनके असली इस्तेमाल को छिपाने की कोशिश की गई।

ईडी का यह भी दावा है कि कुछ रकम का इस्तेमाल रिलायंस कम्युनिकेशंस के मुनाफे को वास्तविक स्थिति से ज्यादा दिखाने के लिए किया गया।

ईडी ने इस मामले में ₹40,185.55 करोड़ की रकम को प्रोसीड्स ऑफ क्राइम यानी अपराध से हासिल रकम के तौर पर चिन्हित किया है। एजेंसी के मुताबिक, यह रकम कंसोर्टियम बैंक्स, फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस और बॉन्डहोल्डर्स के सामने बॉरोअर कंपनियों की कुल बकाया और डिफॉल्ट की गई रकम से जुड़ी है।

ईडी ने अपनी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में आरोपियों की अलग-अलग भूमिका का भी जिक्र किया है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि किस आरोपी की भूमिका पैसा जुटाने, उसे दूसरी जगह भेजने, छिपाने और बाद में वैध दिखाने में क्या थी।

ईडी की जांच में यूएस$ 1 बिलियन के एफसीसीबी प्रोसीड्स को लेकर भी गंभीर सवाल सामने आए हैं। एजेंसी का आरोप है कि इस रकम का जिस काम के लिए इस्तेमाल किया जाना था, उसके बारे में गलत सर्टिफिकेशन की गई।

यानी विदेशी मुद्रा में जुटाई गई इतनी बड़ी रकम वास्तव में कहां और किस काम में इस्तेमाल हुई, इसे लेकर ईडी ने कथित गड़बड़ियां पाई हैं। ईडी ने कोर्ट से करीब ₹8,078.06 करोड़ की संपत्तियों को जब्त करने की मांग की है। ये वे संपत्तियां हैं जिन्हें ईडी ने पहले ही अटैच किया था और जिन्हें एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने कन्फर्म भी कर दिया है।

इन संपत्तियों में दिल्ली के अलावा नवी मुंबई, भुवनेश्वर, चेन्नई और पुणे में मौजूद जमीन और दूसरी अचल संपत्तियां शामिल हैं। ईडी का कहना है कि इन संपत्तियों को कथित तौर पर अपराध से हासिल रकम से जोड़ा गया है। इस मामले में ईडी ने गौतम भाईलाल दोशी को 12 जून 2026 को गिरफ्तार किया था। इसके बाद सतीश सेठ को 9 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया गया। दोनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट स्थित स्पेशल पीएमएलए कोर्ट ने 15 जून 2026 को मुख्य चार्जशीट पर संज्ञान लिया था। अब 8 अगस्त को ईडी ने सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल कर जांच के दौरान सामने आए नए तथ्यों और आरोपों को कोर्ट के सामने रखा है। ईडी का कहना है कि इस मामले में अभी आगे की जांच जारी है।

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Enfocement Directorate, Reliance Communications
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com