राजस्थान में गरीब परिवारों को बिजली बिल से राहत देने और सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए भजन लाल सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है. योजना के तहत 15 अगस्त से पात्र गरीब उपभोक्ताओं के घरों की छत पर रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने का काम शुरू होगा. सोलर प्लांट लगने के बाद लाभार्थी परिवारों को हर महीने 150 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिलने का लाभ मिलेगा.
पहले चरण में बीपीएल परिवार शामिल
योजना के पहले चरण में बीपीएल और अन्य पात्र परिवारों को शामिल किया जाएगा. इसके लिए संबंधित विभागों की ओर से लाभार्थियों का चयन करने और सोलर प्लांट लगाने की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है. योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों के बिजली खर्च को कम करने के साथ ही उन्हें स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा से जोड़ना है.
10 लाख परिवारों के घर पर लगेगा सोलर प्लांट
सरकार की तैयारी के अनुसार, पहले चरण में करीब 10 लाख परिवारों के घरों पर रूफटॉप सोलर प्लांट लगाए जाएंगे. इसके लिए अलग-अलग क्षेत्रों में वेंडरों की नियुक्ति की जाएगी. वेंडर उपभोक्ताओं के घरों की छत पर सोलर प्लांट लगाने के साथ ही लंबे समय तक उसकी देखरेख और रखरखाव की जिम्मेदारी भी संभालेंगे.
एक किलोवाट का प्लांट लगाया जाएगा
योजना के तहत एक किलोवाट क्षमता का रूफटॉप सोलर प्लांट लगाया जाएगा. एक प्लांट पर करीब 77 हजार रुपये खर्च आने का अनुमान है. केंद्र और राज्य सरकार की ओर से मिलने वाली सहायता के बाद पात्र उपभोक्ताओं को योजना का लाभ दिया जाएगा.
सोलर प्लांट से दिन के समय बिजली का उत्पादन होगा. इससे परिवारों की घरेलू बिजली जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी. सरकार का दावा है कि योजना से पात्र उपभोक्ताओं को हर महीने 150 यूनिट तक बिजली का लाभ मिलेगा, जिससे उनके बिजली बिल में बड़ी राहत आ सकती है.
घरों की छत पर लगाए जाएंगे सोलर प्लांट
योजना के तहत लाभार्थियों के घरों की छत का सर्वे किया जाएगा. यह देखा जाएगा कि छत पर सोलर पैनल लगाने के लिए पर्याप्त जगह है या नहीं. छत की स्थिति और तकनीकी मानकों की जांच के बाद सोलर प्लांट लगाया जाएगा.
इन्वर्टर और अन्य उपकरण लगाए जाएंगे
सोलर पैनल लगाने के साथ ही इन्वर्टर और अन्य जरूरी उपकरण भी लगाए जाएंगे. सोलर प्लांट को घरेलू बिजली कनेक्शन से जोड़ा जाएगा, जिससे सौर ऊर्जा से बनने वाली बिजली का उपयोग घर में किया जा सके. योजना में ऐसे परिवारों को प्राथमिकता दी जाएगी, जो तय पात्रता मानकों को पूरा करते हैं. लाभार्थियों का चयन संबंधित विभागों के रिकॉर्ड और निर्धारित मानदंडों के आधार पर किया जाएगा.
10 साल तक मेंटेनेंस करेंगे वेंडर
योजना की खास बात यह है कि सोलर प्लांट लगाने के बाद उपभोक्ताओं को उसके रखरखाव की चिंता नहीं करनी होगी. प्लांट लगाने वाले वेंडर 10 साल तक सोलर सिस्टम की देखरेख और मेंटेनेंस करेंगे. इस दौरान सोलर पैनल, इन्वर्टर और अन्य उपकरणों में तकनीकी खराबी आने पर वेंडर को उसे ठीक करने की जिम्मेदारी होगी. इससे गरीब परिवारों पर रखरखाव का अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा.
ऑनलाइन होगी सोलर प्लांट की निगरानी
सोलर प्लांट लगाने के बाद उसकी ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जाएगी. प्लांट से हो रहे बिजली उत्पादन और उसके संचालन की स्थिति पर तकनीकी माध्यम से नजर रखी जाएगी. ऑनलाइन निगरानी के जरिए यह भी देखा जाएगा कि सोलर प्लांट सही तरीके से काम कर रहा है या नहीं. किसी तकनीकी खराबी की स्थिति में संबंधित वेंडर को इसकी जानकारी दी जा सकेगी, ताकि समय पर समस्या का समाधान किया जा सके.
किस्तों में होगा वेंडरों को भुगतान
योजना के तहत सोलर प्लांट लगाने वाले वेंडरों को भुगतान भी चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा. प्लांट की स्थापना के बाद वेंडर को पहली किस्त मिलेगी. इसके बाद सोलर प्लांट के सुचारु संचालन और तय अवधि तक रखरखाव के आधार पर बाकी भुगतान किया जाएगा. इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सोलर प्लांट केवल लगाए ही नहीं जाएं, बल्कि लंबे समय तक सही तरीके से काम भी करें. रखरखाव की जिम्मेदारी वेंडर से जोड़ने से प्लांट की गुणवत्ता और तकनीकी सेवा पर भी निगरानी रखी जा सकेगी.
बिजली बिल में राहत, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा
योजना से गरीब परिवारों के बिजली खर्च में कमी आने की उम्मीद है. सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन बढ़ने पर पारंपरिक बिजली पर निर्भरता भी कम होगी. इससे पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा. सरकार का मानना है कि रूफटॉप सोलर योजना से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के गरीब परिवारों को समान रूप से लाभ मिल सकेगा. योजना के विस्तार के बाद अधिक परिवारों को सौर ऊर्जा से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जा सकता है.
राजस्थान में पहले से ही सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर काम हो रहा है. अब गरीब परिवारों के घरों की छत पर सोलर प्लांट लगाने की योजना को ऊर्जा क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है. इससे एक तरफ परिवारों को बिजली बिल में राहत मिलेगी,वहीं दूसरी तरफ राज्य में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को भी नई गति मिल सकती है.
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