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श्री गंगानगर के किन्नू को मिलेगी नयी पहचान, बनेगा देश का पहला 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस'

श्रीगंगानगर के किन्नू की मिठास और गुणवत्ता दूसरे फलों से अलग बनाती है, लेकिन किसानों को अब तक उम्मीद के मुताबिक कीमत नहीं मिल पाई है. इसे देखते हुए सरकार ने नया सेंटर खोलने का फैसला लिया है.

श्री गंगानगर के किन्नू को मिलेगी नयी पहचान, बनेगा देश का पहला 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस'
श्रीगंगानगर में किन्नू के लिए देश का पहला 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' बनेगा.

श्रीगंगानगर के किन्नू को अब देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी नई पहचान दिलाने की तैयारी है. राजस्थान सरकार ने इसके लिए 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' स्थापित करने का फैसला लिया है. नए सेंटर के जरिए वैज्ञानिकों के साथ मिलकर किन्नू की बागवानी को आगे बढ़ाने, नई वैरायटी तैयार करने और एक्सपोर्ट की संभावनाओं पर काम किया जाएगा. ऐसे पौधे तैयार करने की कोशिश होगी, जिन्हें किसानों को उपलब्ध कराया जा सके और फल प्राप्त करने के लिए चार साल तक इंतजार न करना पड़े. 

सेंटर में आधुनिक तकनीक को ट्रेनिंग भी मिलेगी

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में किन्नू की क्वालिटी और क्वांटिटी बढ़ाने के लिए रिसर्च के साथ किसानों को आधुनिक तकनीक की ट्रेनिंग भी दी जाएगी. डॉ. एमएम सक्सेना ने बताया कि किन्नू देश में अपनी पहचान रखता है. ऐसे में किसानों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार का रास्ता भी खुलने की संभावना है. वहीं, वैज्ञानिक रिसर्च के जरिए उत्पादन बढ़ाने के साथ कृषि विद्यार्थियों के लिए भी यह सेंटर अहम रहेगा.  

आधुनिक तकनीक से किन्नू की गुणवत्ता में सुधार की संभावना है.

आधुनिक तकनीक से किन्नू की गुणवत्ता में सुधार की संभावना है.

किसानों को अब तक नहीं मिल पाई कीमत

इस सेंटर का जिम्मा टांटिया ग्रुप को सौंपा गया है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने वर्चुअल तौर पर शिलान्यास किया. केंद्र सरकार की राष्ट्रीय कृषि योजना के तहत यह सेंटर अनुदानित होगा. टांटिया ग्रुप के वाइस चेयरपर्सन डॉ. मोहित टांटिया के मुताबिक, श्रीगंगानगर के किन्नू की मिठास और गुणवत्ता इसे दूसरे फलों से अलग बनाती है, लेकिन किसानों को अब तक इसका अपेक्षित बाजार और कीमत नहीं मिल पाई है.

गेमचेंजर साबित हो सकता है सेंटर

हॉर्टिकल्चर विभाग की उपनिदेशक प्रीती गर्ग ने रिसर्च प्रोग्राम के बारे में जानकारी दी.

हॉर्टिकल्चर विभाग की उपनिदेशक प्रीती गर्ग ने रिसर्च प्रोग्राम के बारे में जानकारी दी.

नई वैरायटी, बेहतर पौधे, वैज्ञानिक रिसर्च, आधुनिक तकनीक और एक्सपोर्ट पर फोकस के साथ यह सेंटर किन्नू की खेती के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है. हॉर्टिकल्चर विभाग की उपनिदेशक प्रीती गर्ग के मुताबिक सेंटर को सरकारी अनुदान से विकसित किया जाएगा. रिसर्च और किसानों के लिए प्रस्तावित प्रशिक्षण निश्चित रूप से क्षेत्र के बागवानों के लिए फायदेमंद साबित होगा. उत्पादन से लेकर गुणवत्ता और आधुनिक तकनीक तक, किन्नू की खेती को वैज्ञानिक आधार देने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. 

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