- राजस्थान में बीजेपी के पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना की पीट-पीटकर हत्या कर दी.
- घटना भरतपुर जिले के भौंड़ा गांव की बताई जा रही है, जहां उन पर हमला किया गया.
- घटना रविवार शाम की बताई जा रही है. पूरा विवाद क्रेशर प्लांट से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है.
राजस्थान के भरतपुर जिले के बयाना में गांव में बीजेपी के पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना पीट-पीटकर हत्या कर दी. घटना क्रेशर विवाद से जुड़ी हुई बताई जा रही है. उनके ऑफिस में तोड़फोड़ की गई और लाठी-पत्थरों से हमला कर दिया. जिसमें वह बुरी तरह से घायल हो गए. उन्हें अस्पताल भेजा गया. लेकिन यहां उनकी मौत हो गई. जबकि उनके सहयोगी गगन शर्मा की हालत भी गंभीर बनी हुई है. घटना के बाद पुलिस अलर्ट पर हैं. 68 साल के अतर सिंह भड़ाना मूल रूप से हरियाणा के रहने वाले थे, वह बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों में रह चुके हैं. उनकी मौत के बाद फिलहाल पुलिस अलर्ट पर हैं.
अतर सिंह भड़ाना का क्रेशर को लेकर था विवाद
पुलिस का कहना है कि अतर सिंह भड़ाना का विवाद क्रेशर से जुड़ा हुआ है. चार साल पहले उन्होंने भरतपुर जिले के बयाना में आने वाले भौंड़ा गांव में स्टोन क्रशर प्लांट माइनिंग लीज पर लिया था. लेकिन यहां उनका स्थानीय ग्रामीणों से पिछले 3 से 4 सालों से विवाद चल रहा था. ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने चारागाह की भूमि पर कब्जा किया था, जबकि लगातार होने वाले ब्लास्टिंग से ग्रामीणों को परेशानी होती थी. क्रेशर प्लांट और माइनिंग लीज के आने जाने वाले रास्ते को लेकर भी ग्रामीणों और अतर सिंह भड़ाना के बीच विवाद चल रहा था. पहले भी इस मुद्दे पर एक बार मारपीट हो चुकी है. लेकिन रविवार को जब अतर सिंह भड़ाना यहां पहुंचे तो विवाद बढ़ गया और यह घटना हुई.
हरियाणा के फरीदाबाद में होगा अंतिम संस्कार
अतर सिंह भड़ाना की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी आ गई है, उनके सिर में गंभीर चोट लगी थी, जबकि दोनों पैर भी टूट गए थे. इसके अलावा भी शरीर में कई जगहों पर चोट के निशान थे. भड़ाना मूल रूप से हरियाणा के फरीदाबाद के रहने वाले थे. ऐसे में उनका अंतिम संस्कार यही किया जाएगा. परिजन उनका शव लेकर फरीदाबाद स्थित उनके पाली गांव के लिए निकले हैं. भरतपुर के एसपी राजेश मीणा का कहना है कि घटना के बात टीमों का गठन किया गया और मामले की जांच की जा रही है.
ये वीडियो देखिए
बीजेपी से विधायक रह चुके हैं अतर सिंह भड़ाना
अतर सिंह भड़ाना बीजेपी और कांग्रेस दोनों दलों में रह चुके हैं. 2003 में वह भरतपुर जिले की बयाना विधानसभा सीट से बीजेपी के टिकट पर विधायक बने थे. इसके बाद वह शेरगढ़ गांव में ही रहने लगे थे. गुर्जर आरक्षण आंदोलन के खिलाफ उनकी बीजेपी से नाराजगी हो गई थी, जिसके बाद वह भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए और 2008 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे. लेकिन इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. बाद में वह फिर से बीजेपी में लौट आए थे.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं