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राजस्थान में अब 3 बच्चों वाले भी बनेंगे प्रधान, लेकिन सरकारी नौकरी और स्कीम में 'नो एंट्री'! 

राजस्थान में पंचायत और नगर न‍िकाय चुनाव में दो बच्‍चों की बाध्‍यता खत्‍म हो गई है, लेक‍िन ये केवल पंचायत और न‍िकाय चुनाव में ही हुआ है.

राजस्थान में अब 3 बच्चों वाले भी बनेंगे प्रधान, लेकिन सरकारी नौकरी और स्कीम में 'नो एंट्री'! 
एआई की मदद से बनाई तस्वीर.

जनसंख्‍या न‍ियंत्र‍ित करने के ल‍िए साल 1995 में भैरों स‍िंह शेखावत की सरकार ने न‍ियम लाया था कि दो से अधिक बच्चे वाले पंचायत और निकाय चुनाव नहीं लड़ सकते हैं. इसके साथ ही जनसंख्‍या न‍ियंत्रण के ल‍िए कई अन्‍य कदम भी उठाए गए थे. सरकारी नौकर‍ियों में भी दो से अधिक बच्‍चे वाले लोग नहीं जा सकते हैं. साल 2002 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने एक नियम बनाया था कि 2 से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवार सरकारी नौकरी के पात्र नहीं होंगे. साथ ही दो से अधिक बच्‍चे वाले लोगों को कई कल्‍याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित कर दिया गया था.  

सुप्रीम कोर्ट ने सराहना की थी 

मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो साल 2004 में कोर्ट ने न‍ियम को बरकरार रखने का आदेश द‍िया, साथ में कहा क‍ि यह कानून भेदभावपूर्ण नहीं है, और कहा कि पर‍िवार नियोजन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नियम बनाया गया है. राजस्थान जैसे राज्य ने जनसंख्या नियंत्रण के ऐसे उपायों में अग्रणी भूमिका निभाई थी, लेकिन अब समय मानो पीछे लौट गया है. हालांकि, यह बदलाव केवल पंचायत और न‍िकाय चुनाव तक सीम‍ित है.

सदन में 9-10 मार्च को हुई बहस  

राजस्‍थान व‍िधानसभा के बजट सत्र में 9-10 मार्च 2026 कोराजस्थान म्युनिसिपैलिटीज संशोधन विधेयक और राजस्थान पंचायती राज संशोधन विधेयक पर चर्चा हुई. इन विधेयकों के जरिए पंचायत और नगर निकाय चुनाव लड़ने के लिए दो-बच्चे की शर्त हटाने का प्रस्ताव रखा गया. बजट सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने से पहले यह विधानसभा का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला मुद्दा बन गया. 9 मार्च को 30 विधायक और 10 मार्च को 29 विधायक, दोनों पक्षों से, इस संशोधन पर बहस में शामिल हुए. 

सरकार का तर्क

सरकार का कहना है कि यह बिल इसलिए लाया गया है, ज‍िससे ऐसे लोगों को भी चुनावी प्रक्रिया में आने का मौका मिल सके, जिनमें जनता की सेवा करने की क्षमता और दृष्टि है, लेकिन 2 से अधिक बच्चे होने के कारण उन्हें मौका नहीं मिल पाता. 

कांग्रेस ने RSS से प्रेरित बताया  

कांग्रेस ने सरकार पर आरोप लगाया कि यह कदम आरएसएस की विचारधारा से प्रेरित है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा, “जनसंख्या नियंत्रण इस देश का एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है. क्या हमने देश में जनसंख्या को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया है? आज भी सरकार की कल्याणकारी योजनाएं सिर्फ दो बच्चों तक ही सीमित हैं. क्या कोई सर्वे किया गया है कि जनसंख्या की स्थिति क्या है? किस वैज्ञानिक आधार पर सिर्फ चुनावों के लिए यह छूट दी जा रही है? साफ है कि यह फैसला केवल राजनीतिक मकसद से लिया गया है."

उन्होंने कहा,   "यह निर्देश नागपुर और दिल्ली से आया है. यह RSS का एजेंडा है, और यहां की बीजेपी सरकार दिल्ली और नागपुर से आने वाले निर्देशों पर काम करती है.  असली मुद्दा यह है कि राजस्थान में पंचायत और नगर निकाय चुनाव होने वाले हैं, लेकिन अदालत के आदेश के बावजूद सरकार उनकी तारीख घोषित नहीं कर रही है."

"RSS दखल नहीं देता'

इन आरोपों को खारिज करते हुए संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा, "RSS राजनीतिक मामलों में दखल नहीं देता, यह कोई राजनीतिक संगठन नहीं है. यह बिल इसलिए लाया गया है, क्योंकि अब जनसंख्या विस्फोट की स्थिति नहीं रही. पहले प्रजनन दर 3.2 थी, जो अब घटकर लगभग 2 रह गई है. यह और कम नहीं होनी चाहिए. अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों ने कहा कि अब इस नियम की जरूरत नहीं है. हमने इस बिल को लाने से पहले वैज्ञानिक तथ्यों पर विचार किया है."

सरकारी नौकरियों में नियम लागू 

लेकिन असली विरोधाभास तब सामने आता है जब सरकारी नौकरियों की बात होती है. जून 2002 के बाद 2 से अधिक बच्चों वाले लोग सरकारी नौकरियों के लिए अयोग्य हैं. हालांकि, पदोन्नति के मामलों में सरकार ने कुछ छूट दी है, लेकिन नई भर्तियों में यह नियम अभी भी लागू है. विडंबना यह है कि राजस्थान विधानसभा के विधायक खुद इस दो-बच्चे के नियम से बंधे नहीं हैं, और अब पंचायत तथा नगर निकाय चुनावों में भी इसे हटा दिया गया है, लेकिन सरकारी कर्मचारियों और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वालों के लिए यह छूट लागू नहीं होती. 

योजनाओं में भी दो बच्चों की सीमा

राजस्थान में कई कल्याणकारी योजनाओं में केवल दो बच्चों तक ही लाभ दिया जाता है. प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में पहले बच्चे के जन्म पर 5000 रुपये और दूसरे बच्चे पर 6000 रुपये दिए जाते हैं. निर्माण श्रमिक शिक्षा एवं कौशल विकास योजना के तहत बच्चों की छात्रवृत्ति भी दो बच्चों तक सीमित है. मुख्यमंत्री राजश्री योजना में भी लड़की के जन्म पर आर्थिक सहायता केवल दो बच्चों तक दी जाती है. मुख्यमंत्री मातृत्व पोषण योजना (2020) के तहत गर्भवती महिलाओं को दूसरे बच्चे के लिए 6000 रुपये की पोषण सहायता किस्तों में दी जाती है. इसी तरह कई योजनाओं में स्पष्ट तौर पर लिखा है कि जन्म, गर्भावस्था, शिक्षा छात्रवृत्ति या विवाह सहायता जैसी सुविधाएं केवल दो बच्चों तक ही मिलेंगी. 

नियम में बदलाव की फिलहाल कोई योजना नहीं सरकारी सूत्रों ने बताया कि कल्याणकारी योजनाओं के लिए दो-बच्चे की शर्त में फिलहाल कोई ढील देने की योजना नहीं है. जमीनी स्तर पर यह नियम कई सरकारी कर्मचारियों को तीसरा बच्चा करने से रोकता रहा है. 

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