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गौशाला के नाम पर MLA ने हड़पी 20 बीघा जमीन, आरोप लगे तो विधायक बैरवा ने दी ये सफाई

बीजेपी विधायक डॉ. लालाराम बैरवा के ट्रस्ट ने गौशाला के नाम पर चारागाह की ज‍िस जमीन पर तारबंदी करके कब्‍जा क‍िया गया है, वहां एक भी गाय नहीं है. मामला सामने आया तो MLA ने आरोपों को स‍िरे से ख‍ार‍िज कर द‍िया, और कहा कि वे ट्रस्ट से इस्तीफा दे चुके हैं. 

गौशाला के नाम पर MLA ने हड़पी 20 बीघा जमीन, आरोप लगे तो विधायक बैरवा ने दी ये सफाई
गौशाला के नाम पर चारागाह की जमीन पर कब्जा.
NDTV Reporter

भीलवाड़ा के शाहपुरा से बीजेपी विधायक डॉ. लालाराम बैरवा पर खुद के परिवार का ट्रस्ट बनाकर चारागाह भूमि पर कब्जे का आरोप लगा है. व‍िधायक बैरवा के ट्रस्‍ट ने गौशाला के लिए चारागाह की 20 बीघा जमीन मांगी थी. आरोप है कि आवंटन से पहले ही उन्होंने उस जमीन को कब्जा कर लिया. हलांकि, कलेक्टर ने उनकी मांग को खारिज कर दिया है. 

बिजली का कनेक्शन भी लिया 

विधायक डॉ. बैरवा पर आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर सरकारी जमीन पर कब्जा क‍िया, और राजनीतिक रसूख के चलते आवंटन निरस्त की गई जमीन पर बाकायदा बिजली कनेक्शन भी ले लिया गया.  इस पूरे विवाद के बाद शाहपुरा विधायक डॉक्टर लालाराम बैरवा ने एनडीटीवी को बताया कि इस पूरे मामले से उनका कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने 2025 में ही इस संस्थान से इस्तीफा दे दिया, जो पुराने दस्तावेज लगे हुए थे. उन्हीं के आधार पर कुछ लोग मेरी राजनीतिक छवि धूमिल करना चाहते हैं. 

गौशाला खोलने के लिए मांगी थी जमीन 

शाहपुरा विधानसभा क्षेत्र की माता जी का खेड़ा ग्राम पंचायत की चरागाह भूमि पर गौशाला खोलने के लिए डॉक्टर विधायक बैरवा की संस्था ने जमीन मांगी थी. संस्था देव गौशाला सेवा संस्थान को कलेक्टर भीलवाड़ा की भूमि आवंटन से इनकार कर दिया. चरागाह की जमीन देने से कलेक्टर के इनकार के बावजूद संस्था का बोर्ड लगाकर तारबंदी कर अतिक्रमण कर लिया गया है. 

यह है मामला

शाहपुरा-केकड़ी मार्ग पर आराजी नंबर 2543 की कुल 78 हेक्टेयर चारागाह भूमि है. इसमें से बीजेपी विधायक डॉ. लालाराम बैरवा की ट्रस्ट देव गौशाला सेवा संस्थान ने 5 हेक्टेयर (लगभग 5 बीघा) जमीन गौशाला को आवंटित करने का प्रस्ताव था.  राजस्थान भू राजस्व नियम 1957 के तहत आवंटन के लिए तीन शर्तें पूरी करना आवश्यक था.  इसमें राजस्थान सोसाइटी पंजीयन अधिनियम 1958 के तहत संस्थान का वैध पंजीकरण,  राजस्थान गौशाला अधिनियम 1960 के अधीन विधिवत्त पंजीयन और गौशाला के पिछले तीन सालों का संचालन आवश्यक है. इन शर्तों की अनुपालन नहीं होने पर कलेक्टर भीलवाड़ा ने 25 फरवरी 2026 में ही आवंटन प्रक्रिया को बंद कर दिया. 

मौके के हालात

भूमि आवंटन प्रक्रिया निरस्त और फाइल बंद करने के आदेश के बावजूद ट्रस्‍ट का जमीन पर कब्जा है. मौके पर तीन टीन सेड भी लगे हुए हैं. तारबंदी के अंदर ट्यूबवेल की खुदाई हो गई है और बिजली भी कनेक्शन है. बिजली का बिल देव गौशाला सेवा संस्थान और चिनार देवातवाल के नाम पर आ रहा है. 

कलेक्टर ने मंगवाई रिपोर्ट

देव गौशाला सेवा संस्थान भूमि आवंटन के आवेदन कलेक्टर को किया गया था. आवेदन की शर्तों में खामियां और पात्रता पूरी नहीं होने पर नियमानुसार आवेदन खारिज कर दिया गया था. मौके पर कलेक्टर जसमीत सिंह को अतिक्रमण की शिकायत मिलने पर शाहपुरा एसडीएम और तहसीलदार को वस्तुस्थिति देखकर रिपोर्ट पेश करने के लिए निर्देश दिए हैं. प्रशासन अब इसमें कार्रवाई के मूड में दिख रहा है. 

विधायक बोले- ट्रस्ट से इस्तीफा दे चुके 

विधायक डा. लालाराम बैरवा ने कहा, "मेरा इस संस्थान से कोई लेना-देना नहीं है. साल 2025 में ही मैंने इस संस्थान से त्यागपत्र दे दिया था. मेरे परिवार का ब्लड रिलेशन का कोई भी आदमी संस्थान से जुड़ा हुआ नहीं है. कुछ लोग पुराने दस्तावेज, जो कि मैंने तैयार करवाए थे सेवा के हिसाब से उन्हीं के आधार पर राजनीतिक छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं." 

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