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TCS धर्मांतरण केस में निदा को जमानत देते समय कोर्ट ने किया भगवान कृष्ण का जिक्र

निदा खान को अदालत ने मानवीय आधार पर जमानत दी है, लेकिन जांच के दौरान जो बातें सामने आई हैं, वो अहम हैं. कोर्ट के दस्तावेजों में निदा खान पर लगे आरोपों का विस्तार से जिक्र किया गया है.

TCS धर्मांतरण केस में निदा को जमानत देते समय कोर्ट ने किया भगवान कृष्ण का जिक्र
निदा खान को मिली जमानत
NDTV
  • अदालत ने कहा कि नवजात शिशु और माँ दोनों के हित में जेल में जन्म का आघात और सामाजिक कलंक अस्वीकार्य है
  • निदा खान पर TCS में एक महिला कर्मचारी को इस्लाम धर्म अपनाने के लिए मजबूर करने लगे हैं
  • पुलिस ने मामले की जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल की है, इसलिए निदा को हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं बताई गई है
मुंबई:

नासिक की सत्र अदालत ने चर्चित TCS धर्मांतरण और उत्पीड़न मामले में गिरफ्तार पूर्व कर्मचारी निदा खान को जमानत दे दी है. इस मामले में बेल ऑर्डर कॉपी से अहम जानकारी सामने आई है. ज़मानत देने के फैसले के दौरान अदालत ने एक बेहद मार्मिक टिप्पणी की है. अदालत ने फैसला सुनाते हुए भगवान कृष्ण के जेल में जन्म का जिक्र किया और कहा कि कोई भी महिला या उसका बच्चा जेल में जन्म लेने का आघात और सामाजिक कलंक नहीं झेलना चाहिए. विशेष न्यायाधीश के.जी. जोशी ने 6 जुलाई को मामले की सुनवाई करते हुए निदा खान को जमानत दे दी. निदा खान फिलहाल पांच महीने की गर्भवती हैं.

अदालत ने आदेश सुनाते हुए कहा कि यह विवादित नहीं है कि आवेदिका निदा पांच महीने की गर्भवती है. भगवान कृष्ण की तरह जेल में जन्म लेने का आघात या इससे जुड़ा सामाजिक कलंक कोई भी सहने योग्य नहीं है. ऐसी दुखद स्थिति से बचने और नवजात शिशु के स्वागत व उसके समग्र कल्याण के लिए, आरोपी के पक्ष में न्यायिक विशेषाधिकार का प्रयोग करना ही उचित होगा, जज ने यह भी स्पष्ट किया कि चूंकि इस मामले में जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दायर की जा चुकी है, इसलिए आरोपी को आगे हिरासत में रखने की कोई आवश्यकता नहीं है. 

अदालत ने माना कि जेल के भीतर किसी बच्चे का जन्म लेना माँ और नवजात, दोनों के लिए अत्यंत कष्टदायक और मुश्किल स्थिति है! नवजात शिशु के स्वागत और उसके हित को ध्यान में रखते हुए, न्यायालय ने अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल किया और निदा को जमानत देने का फैसला सुनाया. 

जमानत मिलने के मुख्य कारण

गर्भावस्था: आरोपी निदा खान 5 महीने की गर्भवती है, जिस पर कोई विवाद नहीं है

जांच पूरी होना: पुलिस इस मामले में अपनी जांच पूरी कर चुकी है और कोर्ट में चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है.

कस्टडी की आवश्यकता नहीं: निदा से अब कोई वस्तु या जानकारी बरामद नहीं करनी है और ट्रायल में लंबा समय लगेगा, इसलिए उसे जेल में रखने का कोई विशेष उद्देश्य नहीं रह गया था.

क्या है नासिक का TCS धर्मांतरण मामला?

इस पूरे मामले की शुरुआत फरवरी 2026 में हुई थी. एक राजनीतिक कार्यकर्ता ने नासिक पुलिस को सूचना दी थी कि टीसीएस (TCS) में काम करने वाली एक हिंदू महिला रमजान के रोजे रख रही है.अदालत ने 75,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की एक जमानत पर निदा खान को रिहा करने का आदेश दिया.

क्या हैं निदा खान पर आरोप?

अदालत ने मानवीय आधार पर जमानत दी है, लेकिन जांच के दौरान जो बातें सामने आई हैं, वो अहम हैं. कोर्ट के दस्तावेजों में निदा खान पर लगे आरोपों का विस्तार से जिक्र किया गया है. निदा, जो कि टीसीएस में 'ट्रेनी ग्रेड ऑफिसर' थीं (जिसे 9 अप्रैल 2026 को नौकरी से निकाल दिया गया था), उसपर पीड़िता का सुनियोजित तरीके से ब्रेनवॉश करने का आरोप है.निदा ने पीड़िता का वैचारिक मत परिवर्तन करने के लिए उसे 'बुर्का' और पैगंबर मोहम्मद के जीवन पर आधारित किताब ('द होली लाइफ ऑफ प्रोफेट मोहम्मद') दी.इस्लाम धर्म और धार्मिक उपक्रमों से जुड़े विशेष एप्लिकेशन Apps पीड़िता के मोबाइल में इंस्टॉल किए गए. यूट्यूब और इंस्टाग्राम रील्स के जरिए उसे लगातार धार्मिक शिक्षा भेजी जाती थी.

निदा समय-समय पर पीड़िता के घर जाती थी और उसे 'नमाज़' पढ़ने का तरीका और 'हिजाब/बुर्का' पहनने की ट्रेनिंग देती थी.जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि पीड़िता का नाम बदलकर 'हानिया' रखने की योजना थी. इसके अलावा, मालेगांव के एक व्यक्ति की मदद से फर्जी कागजात तैयार कर पीड़िता को रोजगार के बहाने मलेशिया भेजने की साजिश रची जा रही थी.निदा और अन्य आरोपियों पर यह भी गंभीर आरोप है कि उन्होंने इस्लाम को श्रेष्ठ बताने के लिए भगवान शिव, भगवान श्रीकृष्ण और भगवान ब्रह्मदेव के बारे में अपमानजनक और अश्लील टिप्पणियां कीं, जिससे पीड़िता की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं.

न्यायालय की कानूनी टिप्पणियां

अदालत ने दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद स्पष्ट किया कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 और 75 (जो यौन उत्पीड़न या शारीरिक संबंध से जुड़ी हैं) निदा पर लागू नहीं होतीं, बल्कि ये मुख्य आरोपियों (दानिश और तौसीफ) पर लागू होती हैं.हालांकि, प्रथम दृष्टया निदा पर BNS की धारा 299 (धार्मिक भावनाओं को आहत करना) और एट्रोसिटी एक्ट (Atrocities Act) की धारा 3 के तहत अपराध सिद्ध होते प्रतीत होते हैं.

जमानत की शर्तें 

इन सभी आरोपों के बावजूद, केवल मानवीय आधार गर्भावस्था को प्राथमिकता देते हुए कोर्ट ने निदा खान को इन शर्तों पर रिहा करने का आदेश दिया है: 75,000/- रुपये का पी.आर. बॉन्ड . समान राशि 75,000 रुपये का एक सक्षम जमानतदार पेश करना.टीसीएस धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न मामले में शुक्रवार को तीन और आरोपियों को नासिक जिला सत्र न्यायालय से बड़ी राहत मिली है. सत्र न्यायाधीश ने मामले की सुनवाई करते हुए संदिग्ध आरोपी रजा मेमन, तौसीफ अख्तर और शाहरुख कुरेशी की जमानत अर्जी मंजूर कर ली है.इन तीनों से पहले इस मामले में आरोपी निदा खान के साथ-साथ तौसीफ अख्तर को जमानत दी, जबकि शादी का झांसा देकर शोषण करने वाले मुख्य आरोपी दानिश शेख की अर्जी खारिज कर दी गई थी 

पुलिस की बड़ी कार्रवाई और SIT जांच

आपको बता दें कि यह मामला केवल एक एफआईआर तक सीमित नहीं है. यह नासिक पुलिस की विशेष जांच दल SIT द्वारा की जा रही एक व्यापक जांच का हिस्सा है.26 मार्च से 3 अप्रैल के बीच TCS की नासिक यूनिट में महिला कर्मचारियों के यौन शोषण, जबरन धर्मांतरण के प्रयास, धार्मिक भावनाओं को आहत करने और मानसिक उत्पीड़न के आरोप में कुल 9 एफआईआर दर्ज की गई हैं.

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