विज्ञापन

जीणमाता के चमत्कार के सामने औरंगजेब को भी होना पड़ा था नतमस्तक, हारकर मांगी थी क्षमा, नवरात्रि पर रहती भीड़

राजस्थान के सीकर जिले के पास जीणमाता मंदिर की बहुत मान्यता है और औरंगजेब से जुड़ी कथा भी यहां के बड़े-बुजर्ग बहुत चाव से सुनाते हैं. नवरात्रि के मौके पर यहां भारी भीड़ रहती है.

जीणमाता के चमत्कार के सामने औरंगजेब को भी होना पड़ा था नतमस्तक, हारकर मांगी थी क्षमा, नवरात्रि पर रहती भीड़
राजस्थान के सीकर जिले में है जीण माता मंदिर

नवरात्रि के मौके पर जानते हैं जीणमाता मंदिर की उस मान्यता के बारे में जिसे आज भी बड़े चाव से वहां के बड़े-बुजुर्ग सुनाते हैं. दरअसल, राजस्थान के सीकर जिले के पास अरावली पर्वतमाला की तीन पहाड़ियों के बीच बसा जीण माता मंदिर मां भवानी की शक्ति, भक्ति और चमत्कारों के लिए जाना जाता है. कहा जाता है कि हजारों वर्षों से यहां अखंड ज्योति जल रही है. इस मंदिर के इतिहास की बात करें तो मुगल बादशाह औरंगजेब के आक्रमण करने और मां  जीण की शक्ति और चमत्कार के किस्से भी यहां बहुत प्रचलित हैं. जीणमाता मंदिर के भवानी शंकर पुजारी ने इस पर बताया कि जब मुगल बादशाह औरंगजेब की सेना ने शेखावटी के मंदिरों को तोड़ना शुरू किया तो जीण माता के भक्तों ने मां से गुहार लगाई, जिसके बाद कहा जाता है कि माता ने औरंगजेब की सेना पर भौरों (मधुमक्खियों) के झुंड को छोड़ दिया. इससे औरंगजेब के सैनिक घायल और परेशान होकर वहां से भाग खड़े हुए. कहा जाता है इस चमत्कार के बाद औरंगजेब ने मंदिर में अखंड ज्योति यानी दीपक के लिए तेल दिल्ली दरबार से भेजने का वायदा किया. जीण माता के मंदिर में मुगल बादशाह ने चांदी का छत्र भी चढ़ाया था और सेवा करने के लिए एक मुस्लिम परिवार को भी यहीं छोड़ दिया था, जिनके वंशज आज भी जीणमाता मंदिर की सीढ़ियों को धोने की सेवा करते हैं. पुजारी ने बताया कि जीण माता मंदिर में पहले दिल्ली दरबार से तेल भेजा जाता था और उसके बाद जयपुर राजघराने से तेल का इंतजाम किया जाता था. आज भी सरकार के देवस्थान विभाग की ओर से तेल के अनुदान की परंपरा जारी है. मां जीण भवानी के दरबार में अखंड ज्योति जलती रहती है. औरंगजेब की सेना पर इसी हमले को लेकर जीण माता को भंवरों की देवी भी कहा जाता है.

Latest and Breaking News on NDTV

भाई से स्नेह की कहानी

लोक मान्यताओं के मुताबिक जीणमाता का जन्म राजस्थान के चुरू के गांव घांघू के चौहान वंश राजघराने में हुआ था. उनके पिता का नाम राजा घांघू सिंह था. मान्यता के मुताबिक- वह एक बार शिकार करने गए और जंगल में एक तपस्वी से मिले. वहां उन्होंने तपस्वी से कहा कि उनके कोई संतान नहीं है. उसी वरदान से जीण माता का जन्म हुआ था. वह अपने भाई से बहुत स्नेह करती थीं, एक दिन वह अपनी भाभी के साथ पानी लेने जाती हैं, वहां इस बात पर विवाद हो जाता है कि भाई किसे अधिक स्नेह करता है, तो दोनों के बीच तय होता है कि जिसका वह पहले मटका उतारेगा वही उसे ज्यादा प्रिय होगा. वह भाभी का मटका पहले उतारता है. इससे नाराज होकर जीण माता नाराज होकर सीकर के नजदीक अरावली पर्वत माला की पहाड़ियों पर आ गई थीं. जीण को मनाने के लिए कहते हैं उनका भाई हर्ष भी पीछे-पीछे गया लेकिन जीण ने वापस जाने से मना कर दिया और वहीं पहाड़ी पर तपस्या शुरू कर दी. बहन नहीं लौटी थी हर्ष भी वहीं भैरव की तपस्या में लीन हो गया. मां जीण को शक्ति का अवतार माना जाता है. मां जीण का प्राचीन मंदिर जीणमाता के गांव में है तो वहीं भाई हर्, का कुछ ही दूरी पर अरावली की पहाड़ियों में हर्षनाथ नाम से बना हुआ है.

Latest and Breaking News on NDTV

नवरात्रि में होती है भारी भीड़

देशविदेश से हजारों श्रद्धालु जीणमाता के मंदिर अपनी मन्नत मांगने जाते हैं, कहा जाता है कि यहां दर्शन करने से कुष्ठ रोग में आराम मिलता है. मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु सिर पर जलते कोयले की सिगड़ी रखकर या पैदल जीण भवानी का ध्वज लेकर धाम तक पहुंचते हैं. इस मंदिर को भाई बहन के प्रेम यानी जीण और हर्ष के प्रेम के रूप में भी जाना जाता है. नवरात्रि के मौके पर यहां मेले का आयोजन किया जाता है. बच्चों का मुंडल और नवविवाहित जोड़े भी यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं. नवरात्रि के मौके पर यहां खास मेले का आयोजन होता है, लोग दूर दूर से यहां आते हैं.

(ये स्टोरी लोकमान्यता और मंदिर के पुजारी से बातचीत के आधार पर लिखी गई है, एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता)

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Rajasthan Temple, Navratri Special, Jeen Mata Madir, Jeen Mata Mandir Rajasthan, Jeen Mata Temple Controversy
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com