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जयपुर एयरपोर्ट पर 'लैंड' हुआ घायल ग‍िद्ध, दो द‍िन बाद भरी उड़ान; खराब मौसम के कारण भटक गया था रास्‍ता

इलाज करने के बाद ग‍िद्द को खुले आसमान में र‍िलीज कर द‍िया गया. बताया जा रहा है क‍ि प्राकृत‍िक रास्‍ता भटककर शहर की ओर पहुंच गया था. 

जयपुर एयरपोर्ट पर 'लैंड' हुआ घायल ग‍िद्ध, दो द‍िन बाद भरी उड़ान; खराब मौसम के कारण भटक गया था रास्‍ता
दो दिन बाद गिद्द को खुले आसमान में छोड़ दिया गया.
NDTV Reporter

राजधानी जयपुर के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर घायल और डिहाइड्रेट अवस्था में मिले एक दुर्लभ इंडियन ग्रिफिन वल्चर (Indian Griffon Vulture) का सफलतापूर्वक रेस्क्यू क‍िया गया. इलाज के बाद उसे छोड़ दिया गया. वन विभाग, रक्षा संस्थान, वाइल्ड लाइफ वेट्स इंटरनेशनल और जयपुर एयरपोर्ट अथॉरिटी के संयुक्त प्रयास से ग‍िद्द को बचाया गया. 

रिहैबिलिटेशन सेंटर में इलाज 

रक्षा संस्थान के रोहित गंगवाल ने बताया कि 25 जुलाई को जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट की वाइल्ड लाइफ हैजार्ड मैनेजमेंट टीम के सदस्य लोकेश यादव ने एयरपोर्ट की बाउंड्री के पास एक घायल भारतीय ग्रिफिन वल्चर दिखाई देने की सूचना दी. वन विभाग और रक्षा संस्थान की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची, और गिद्ध का रेस्क्यू कर रक्षा संस्थान के रिहैबिलिटेशन सेंटर ले जाया गया. 

गंभीर चोट नहीं, डिहाइड्रेशन 

वेटरनरी विशेषज्ञों की जांच में सामने आया कि गिद्ध को कोई गंभीर शारीरिक चोट नहीं लगी थी, वह अत्यधिक डिहाइड्रेशन का शिकार था. विशेषज्ञों के अनुसार यह संभवतः पहली बार घोसले से उड़ान भरने वाला युवा गिद्ध था, जो खराब मौसम के कारण पर्याप्त थर्मल एयर करंट्स नहीं मिलने से अपने प्राकृतिक मार्ग से भटककर शहर की ओर पहुंच गया. भारतीय ग्रिफिन वल्चर उड़ान के दौरान थर्मल एयर करंट्स का उपयोग करते हैं, और अनुकूल परिस्थितियों में एक बार में 200 से 300 किलोमीटर तक की दूरी तय करने की क्षमता रखते हैं.  

रास्ता भटककर जयपुर एयरपोर्ट पर पहुंच गया था गिद्द. NDTV

रास्ता भटककर जयपुर एयरपोर्ट पर पहुंच गया था गिद्द. NDTV

दो दिन के उपचार के बाद मिली नई उड़ान

रिहैबिलिटेशन सेंटर में दो दिनों तक सपोर्टिव थेरेपी और देखभाल के बाद गिद्ध पूरी तरह स्वस्थ हो गया. इसके बाद वन विभाग की निगरानी में उसे उसके प्राकृतिक आवास में सफलतापूर्वक रिलीज कर दिया गया. इस दौरान एसीएफ जितेंद्र सिंह शेखावत, रेंज ऑफिसर जोगिंदर सिंह, जयपुर एयरपोर्ट की वाइल्डलाइफ हैजार्ड मैनेजमेंट टीम के लोकेश यादव, रक्षा संस्थान के रोहित गंगवाल, यशवंत सिंह सिसोदिया सहित अन्य अधिकारी एवं विशेषज्ञ मौजूद रहे.

यह रेस्क्यू अभियान वन्यजीव संरक्षण के प्रति विभिन्न एजेंसियों के समन्वित प्रयास का एक सफल उदाहरण माना जा रहा है. समय पर रेस्क्यू और उपचार के कारण एक महत्वपूर्ण शिकारी पक्षी को नई जिंदगी मिल सकी.  

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