NEET पेपर लीक और एजुकेशन सिस्टम को लेकर उठते सवालों के बीच केंद्र सरकार ने एक हाई पावर टास्क फोर्स बनाई है, जो एजुकेशन रिफॉर्म्स पर काम करेगी. इस टास्क फोर्स का नेतृत्व इंफोसिस के को-फाउंडर नंदन नीलेकणी कर रहे हैं. इसी कमेटी में शामिल आईआईटी मद्रास के डायरेक्टर वी. कामाकोटि ने बताया है कि पेपर लीक रोकने के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्या है. उन्होंने कहा कि परीक्षा आयोजित करने में सबसे बड़ी चुनौती क्वेश्चन पेपर सेटर की ईमानदारी और उस पर भरोसा बनाए रखना है, ये बेहद जरूरी है.
कामाकोटि ने बताया क्या है जरूरी
पद्म पुरस्कार से सम्मानित कामाकोटि ने कहा कि पिछले चार दशकों में सरकारी और प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले छात्रों की संख्या बहुत बढ़ गई है, जिससे तकनीक का इस्तेमाल बेहद जरूरी हो गया है. उन्होंने कहा, "किसी भी परीक्षा प्रणाली में दो तरह के लोगों का भरोसेमंद होना बहुत जरूरी है. पहले, प्रश्नपत्र तैयार करने वाले लोग, ये सबसे जरूरी लोग हैं. दूसरे, परीक्षा केंद्रों पर मौजूद इनविजिलेटर. मेरी राय में, सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हम क्वेश्चन पेपर बनाने वालों के बीच विश्वास कैसे बनाएं और उसे बनाए रखें."
2024 में ऐसे लीक हुआ था पेपर
आईआईटी के डायरेक्टर ने कहा कि भले ही इनविजिलेशन के लिए कैमरे लगाए गए हों, लेकिन सबसे जरूरी मुद्दा क्वेश्चन पेपर बनाने वाले की ईमानदारी और विश्वसनीयता का ही बना हुआ है. उन्होंने आगे बताया, "जो बदला है, वह है परीक्षा का दायरा है, इसमें छात्रों की संख्या बढ़ गई है. अगर आप नीट (NEET) 2024 को देखें, तो लीक तब हुआ था जब प्रश्नपत्र छपने के बाद रास्ते में थे. उन्हें बक्सों में पैक करके डिस्ट्रिब्यूशन सेंटर भेजा गया था और वहां से परीक्षा केंद्रों तक. उस प्रक्रिया के दौरान कहीं लीक हुआ था. जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया था कि वह घटना सीमित थी और उससे केवल 40 से 50 छात्र ही प्रभावित हुए थे."
उन्होंने आगे ताजा मामले का जिक्र करते हुए कहा कि "2026 में फिर से लीक हुआ, लेकिन इस बार लीक वितरण प्रक्रिया के दौरान नहीं हुआ, जैसा कि 2024 में हुआ था. क्वेश्चन पेपर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के कैंपस से निकलने के बाद छपा, बक्सों में पैक हुआ और परीक्षा वाले दिन छात्रों तक पहुंचने तक सुरक्षित रहा. इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कोई लीक नहीं हुआ. जांच एजेंसियों की रिपोर्ट से संकेत मिला है कि इस बार लीक की शुरुआत प्रश्नपत्र बनाने वाले के स्तर से ही हुई थी."
सबसे बड़ी चुनौती भरोसे की है
कामाकोटि ने कहा कि असली और बुनियादी चुनौती भरोसे की ही है.उन्होंने कहा, "हमें ऐसे टीचर्स की जरूरत है जिन पर हम भरोसा कर सकें, ऐसे लोग जो क्वेश्चन पेपर बनाएं, उसकी गोपनीयता पूरी तरह बनाए रखें और बिना किसी जानकारी को बाहर किए अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाएं. यही हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती है."
ये भी पढ़ें - IIT, IIM और UPSC से सीखिए, पेपर लीक रोकने के क्या हैं सबसे सटीक मॉडल
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं