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गंदे पानी से सब्‍ज‍ियों की स‍िंचाई करने वालों पर क‍ितनी FIR हुई? हाई कोर्ट ने पूछा सवाल 

राजस्‍थान हाई कोर्ट ने कहा पूरे प्रदेश में गंदे पानी से सब्‍जियों की स‍िंचाई करने वालों पर एफआईआर हो. कोर्ट ने ज‍िला स्‍तर के अध‍िकार‍ियों को न‍िर्देश द‍िया. 

गंदे पानी से सब्‍ज‍ियों की स‍िंचाई करने वालों पर क‍ितनी FIR हुई? हाई कोर्ट ने पूछा सवाल 

राजस्थान हाई कोर्ट ने खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस.पी. शर्मा और जस्टिस मनीष शर्मा की खंडपीठ ने राज्य सरकार को सरस, अमूल, लोटस और मदर डेयरी सहित सभी डेयरी कंपनियों के दूध और दूध उत्पादों की जांच करने के आदेश दिए हैं. 

यूरिया पशु आहार में मिलाया जा रहा 

अदालत ने कहा है कि जांच के दौरान यह भी परखा जाए कि ये कंपनियां सिंथेटिक और मिलावटी उत्पादों पर रोक लगाने के लिए क्या कदम उठा रही हैं. सुनवाई के दौरान न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता एम.एस. सिंघवी ने कोर्ट को बताया कि औद्योगिक उपयोग में आने वाला यूरिया बड़े पैमाने पर पशु आहार में मिलाया जा रहा है. इससे पशुओं के शरीर में नाइट्रोजन और यूरिया का स्तर बढ़ने की आशंका रहती है, जो दूध की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है. 

कोर्ट ने निर्देश दिए कि सभी संबंधित एजेंसियों का निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की जाए.  यह सुनवाई खाद्य मिलावट के खिलाफ स्वप्रेरणा से दर्ज जनहित याचिका सहित अन्य याचिकाओं पर चल रही थी. 

कोर्ट ने जवाब तलब किया 

इसी मामले में अदालत ने प्रदूषण नियंत्रण मंडल से भी जवाब तलब किया है. कोर्ट ने पूछा कि जयपुर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में गंदे पानी से सब्जियां उगाने वालों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में दर्ज एफआईआर की संख्या और रोकथाम के लिए उठाए गए कदमों का पूरा विवरण प्रस्तुत किया जाए. 

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि यह आदेश केवल जयपुर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे राज्य में लागू होगा.  सभी जिला स्तर के अधिकारी सुनिश्चित करें कि गंदे पानी से खेती न हो. 

4 अगस्त को होगी अगली सुनवाई 

सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि देशभर में असुरक्षित कीटनाशकों के उपयोग से अब तक 535 किसानों की मौत हो चुकी है.  अदालत ने इस रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लेने के निर्देश दिए हैं. 

वहीं, राज्य सरकार की ओर से खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण आयुक्तालय ने नमूनों और उनकी जांच रिपोर्ट पेश करने के लिए समय मांगा.  कोर्ट ने अनुरोध स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 4 अगस्त तक स्थगित कर दी. 

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