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आईवीएफ से 'बेटा' पैदा करने की गारंटी देनेवाले फर्टिलिटी सेंटर पर गिरी गाज, रजिस्ट्रेशन सस्पेंड

एक अंग्रेजी अखबार में एक फर्टिलिटी सेंटर का विज्ञापन छपने के बाद इस संस्थान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है.

आईवीएफ से 'बेटा' पैदा करने की गारंटी देनेवाले फर्टिलिटी सेंटर पर गिरी गाज, रजिस्ट्रेशन सस्पेंड
फर्टिलिटी सेंटर के विज्ञापन को भ्रामक बताकर कार्रवाई की गई (प्रतीकात्मक तस्वीर)
Pixabay

राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने आईवीएफ तकनीक के जरिए 'मेल चाइल्ड' यानी बेटा होने का भ्रामक दावा करने पर उदयपुर के नीलकंठ फर्टिलिटी एंड वुमन केयर हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड पर सख्त कार्रवाई की है. विभाग ने अस्पताल के एआरटी बैंक, एआरटी क्लिनिक लेवल-1 व 2 और सरोगेसी क्लिनिक के पंजीकरण प्रमाण-पत्रों को आगामी आदेश तक तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. सेंटर के खिलाफ यह कार्रवाई एक अखबार में छपे विज्ञापन के बाद की गई. चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने ‘सहायक प्रजनन तकनीक (एआरटी) और सरोगेसी' सेवाओं के नियमन में उल्लघंन के आरोप में निजी क्षेत्र के इस फर्टिलिटी अस्पताल के नौ केंद्रों का पंजीकरण निलंबित कर दिया है. स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि राज्य में सहायक प्रजनन तकनीक (एआरटी) और सरोगेसी सेवाओं को नियंत्रित करने वाले प्रावधानों के प्रथम दृष्टया उल्लंघन सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई है.

अखबार में छपा था विज्ञापन

यह पूरी कार्रवाई 23 अगस्त 2026 को एक प्रमुख अंग्रेजी दैनिक के जयपुर संस्करण में प्रकाशित विज्ञापन के आधार पर की गई है. नीलकंठ आईवीएफ फर्टिलिटी एंड टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर के इस विज्ञापन में नीले रंग के मोजे को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाते हुए संतानहीन दंपतियों को आईवीएफ के जरिए लड़का होने की गारंटी का भरोसा दिया गया था.

सेंटर की सफाई

वहीं संस्थान का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई एक समाचार-पत्र में प्रकाशित विज्ञापन में मात्र नीले रंग के मोज़े दिखाए जाने के आधार पर की गई है, जबकि विज्ञापन में मेल चाइल्ड जेंडर सिलेक्शन” या “सेक्स सेलेक्शन” जैसा कोई उल्लेख नहीं था और न ही किसी विशेष लिंग के बच्चे के जन्म की पेशकश की गई थी. इसके अलावा, कार्रवाई से पहले संस्थान को न तो कोई कारण बताओ नोटिस दिया गया और न ही सुनवाई का अवसर मिला, जो कि एआरटी रेगुलेशन एक्ट, 2021 की धारा 18 के अनिवार्य कानूनी प्रावधानों का सीधा उल्लंघन है.

नियम और कार्रवाई

चिकित्सा विभाग की जांच में इस प्रचार को सहायक जनन प्रौद्योगिकी यानी एआरटी (विनियमन) अधिनियम, 2021 की धारा 26(2) और 26(3) का सीधा उल्लंघन पाया गया. इसके अलावा, अधिनियम के अध्याय-5 में उल्लिखित दंड प्रावधानों के बिंदु संख्या 32 के तहत भी भ्रामक और प्रतिबंधित विज्ञापनों पर रोक का नियम लागू होता है. नियमों की अनदेखी पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्वास्थ्य विभाग ने 24 अगस्त 2026 को आधिकारिक आदेश जारी कर क्लिनिक की सभी संबंधित पंजीकरण सेवाओं को सस्पेंड कर दिया.

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