कुख्यात डकैत जगन गुर्जर करीब 4 साल से जेल में बंद था. बाड़ी (धौलपुर) के विधायक रहे गिर्राज सिंह मलिंगा को धमकी देने के बाद उस पर दबाव बढ़ गया था. इसी वजह से डकैत ने साल 2022 में करौली पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया था. फिर उसे अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में शिफ्ट किया गया था. इसी जेल में आरोपी विष्णु ने उसकी हत्या कर दी. हालांकि, पहली बार नहीं था जब उसने आत्मसमर्पण किया. इससे पहले भी साल 2009 में जगन गुर्जर ने कांग्रेस नेता सचिन पायलट के सामने सरेंडर किया था.
डकैत का भाई जेल में बंद, एक भाई पैरोल पर
धौलपुर के बसई डांग के रहने वाले जगन गुर्जर ने तीन शादियां की थी. उसके भाई लाल सिंह गुर्जर, पान सिंह और पप्पू गुर्जर भी खूंखार अपराधी हैं. सबसे बड़े भाई लाल सिंह गुर्जर के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज है. पप्पू गुर्जर धौलपुर जेल में बंद है. जबकि पान सिंह गुर्जर को आजीवन कारावास की सजा मिली हुई है, लेकिन पैरोल पर बाहर बताया जा रहा है.
जेल में बंद रहने के 8 साल बाद मिली थी जमानत
जगन के खिलाफ राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की पुलिस ने भारी इनाम घोषित किया था. लंबे वक्त तक पुलिस की गिरफ्त से दूर जगन गुर्जर 30 जनवरी 2009 को करौली के कैमरी गांव में आयोजित एक मेले में पहुंचा था. मेले में कांग्रेस नेता सचिन पायलट मौजूद थे. जगन ने पूरे गिरोह के साथ पायलट के सामने उसने हथियार डाले थे. करीब 8 साल तक जेल में रहने के बाद 6 मार्च, 2017 डकैत को राजस्थान हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी. जमानत मिलने के बाद उसने फिर से अपराध की दुनिया में वापसी कर ली.
पत्नी चुनाव हारी, फिर किया आत्मसमर्पण
जेल से बाहर आने के बाद जगन लोगों से वसूली करने लगा था. कई लोगों के साथ मारपीट की थी और हत्या की धमकी दी थी. कई जगहों पर फायरिंग भी की थी, जिसके बाद पुलिस उसकी तलाश में जुट गई थी. साल 2017 में डाकू जगन ने पत्नी को निर्दलीय चुनाव में उतारा, लेकिन उसकी छवि के चलते लोगों ने साथ नहीं दिया. चुनाव हारने के बाद एक बार फिर उसने आत्मसमर्पण कर दिया.
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