भील प्रदेश की मांग को लेकर बांसवाड़ा के मानगढ़ धाम पर आदिवासी समाज के लोग इकट्ठा हुए. मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान से करीब 10 हजार लोग पहुंचे हैं. सभी ने एक स्वर में कहा कि हम भील प्रदेश बनवाकर दम लेंगे. कार्यक्रम को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं. मानगढ़ धाम और आसपास के क्षेत्र में जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई है, और पुलिस बल तैनात कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है. आने-जाने वाले मार्गों पर यातायात और भीड़ प्रबंधन के लिए भी पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारी निगरानी में खड़े हैं.
संगठित रहने का आह्वान
महासम्मेलन में भील प्रदेश मोर्चा के प्रतिनिधियों ने मंच से अलग भील प्रदेश की मांग को लेकर अपनी बात रखी. राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश से आए वक्ताओं ने अपनी-अपनी क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों में आदिवासी समाज को संबोधित करते हुए संस्कृति, इतिहास, सामाजिक एकता तथा जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के लिए संगठित रहने का आह्वान किया.

आदिवासी के लोग भारी संख्या में भीलवाड़ा पहुंचे. (NDTV)
"आदिवासी समाज की उपेक्षा"
अपने संबोधन में कई वक्ताओं ने आरोप लगाया कि लंबे समय से आदिवासी समाज की उपेक्षा की गई है, और उन्हें विकास की मुख्यधारा से दूर रखा गया. कुछ वक्ताओं ने वर्तमान सरकार पर भी आदिवासी समाज के अधिकारों की अनदेखी करने के आरोप लगाए. उनका कहना था कि अलग भील प्रदेश बनने पर आदिवासी बहुल क्षेत्रों को अपनी प्रशासनिक व्यवस्था मिलेगी, जिससे स्थानीय स्तर पर शासन और विकास को नई दिशा मिल सकेगी.
सम्मेलन के दौरान आदिवासी समाज के प्रमुख धर्मगुरु एवं विचारक भंवरलाल परमार भी मंच पर पहुंचे. उनके आगमन पर उपस्थित लोगों ने जोरदार स्वागत किया और उनके संबोधन को लेकर सम्मेलन में विशेष उत्साह देखने को मिला.
BAP के नेता भी पहुंचे मानगढ़ धाम
दोपहर 1 बजे के बाद भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के जनप्रतिनिधियों का भी मानगढ़ धाम पहुंचना शुरू हुआ. आसपुर से विधायक उमेश मीणा और मध्य प्रदेश के सैलाना से विधायक कमलेश्वर डोडियार सम्मेलन में पहुंचे. हालांकि, आयोजकों ने मंच से स्पष्ट किया कि भील प्रदेश की मांग किसी एक राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि पूरे आदिवासी समाज, उसकी संस्कृति और अधिकारों का विषय है. इसी कारण सम्मेलन को राजनीतिक मंच के बजाय सामाजिक और सांस्कृतिक आंदोलन के रूप में आयोजित किया गया तथा राजनीतिक दलों को केंद्र में रखने से परहेज किया गया.
सम्मेलन के दौरान भील प्रदेश के समर्थन में नारे गूंजते रहे, और आदिवासी एकता का संदेश दिया गया. मानगढ़ धाम पर देर शाम तक विभिन्न राज्यों से लोगों के पहुंचने और कई प्रमुख वक्ताओं के संबोधन का सिलसिला जारी रहने की संभावना है.
(कौशतुभ पांड्या की रिपोर्ट)
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