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जमीन, हवा और समंदर... कहीं से भी मौत बनकर गिरेगा ब्रह्मोस-2, दुश्मन को संभलने का मौका भी मिलेगा!

BrahMos-2: मैक-8 की रफ्तार, 1500 KM तक मार और तीनों सेनाओं की ताकत; क्यों खास है भारत की अगली सुपर मिसाइल?

जमीन, हवा और समंदर... कहीं से भी मौत बनकर गिरेगा ब्रह्मोस-2, दुश्मन को संभलने का मौका भी मिलेगा!
BrahMos-2 बनेगी भारत की अगली सुपर मिसाइल
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भारत डिफेंस सेक्टर में कई इतिहास रच रहा है. भारत के पास अग्नि मिसाइल से लेकर ब्रह्मोस जैसी खतरनाक मिसाइलें हैं. भारत अब मिसाइल टेक्नोलॉजी में काफी तरक्की कर चुका है. ब्रह्मोस के बाद अब भारत ब्रह्मोस-2 मिसाइल पर काम कर रहा है. रूस के साथ भारत का यह प्रोजेक्ट भारतीय डिफेंस सेक्टर के लिए बड़ा गेमचेंजर माना जा रहा है. यह हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जो मैक-8 की रफ्तार, 1500 किमी तक मारक क्षमता और थल-नभ-जल से हमला करने की ताकत रखती है. इस मिसाइल के डेवलेप होने के बाद दुश्मन की नींद उड़ना तय है. आज हम इसी ब्रह्मोस-2 के बारे में बता रहे हैं.

थल, नभ और जल.. तीनों मोर्चों से हमला

ब्रह्मोस-2 मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसकी ट्राई-सर्विस क्षमता होगी. यानी इसे भारतीय सेना, नौसेना औप वायुसेना तीनों ही इस्तेमाल कर सकेगी. इस हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल को जमीन से मोबाइल लॉन्चर के जरिए सीमावर्ती इलाकों में लॉन्च किया ज सकेगा. वहीं इसे सुखाई-30 जैसे फाइटर जेट से हवा में फायर किया जा सकता है. इसके अलावा भारतीय नौसेना अपने वॉर शिप से वर्टिकल लॉन्च सिस्टम से भी ब्रह्मोस-2 मिसाइल को लॉन्च कर सकेगी. यानी जब तक दुश्मन कुछ समझ पाएगा हमारी सेनाएं हमला कर सकेंगी.

ब्रह्मोस-2 का इंजन भी है बेहद खास

ब्रह्मोस-2 मिसाइल बेहद एडवांस है, इसकी वजह मिसाइल में इस्तेमाल होने वाला खास इंजन है. मिसाइल में स्क्रैमजेट एयर-ब्रीदिंग इंजन होगा. पारंपरिक मिसाइल इंजनों से अलग यह तकनीक उड़ान के दौरान वातावरण की ऑक्सीजन का इस्तेमाल करती है, जिससे मिसाइल लंबे समय तक हाइपरसोनिक स्पीड बनाए रख सकती है. हाइपरसोनिक स्पीड की वजह से जब मिसाइल अपने टारगेट को हिट करती है, तो इसका असर कई गुना बढ़ जाता है. इसी वजह से इस मिसाइल को भविष्य के सबसे घातक हथियारों में गिना जा रहा है.

भारत और रूस की टेक्नोलॉजी

ब्रह्मोस-2 मिसाइल को रूस की हाइपरसोनिक जिरकोन टेक्नोलॉजी की डिजाइन और भारत की एडवांस नेविगेशन क्षमता को मिलाकर डेवलेप किया जा रहा है. मिसाइल में स्वदेशी G3OM नेविगेशन सिस्टम और मल्टी-सैटेलाइट गाइडेंस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे टारगेट पर बेहद सटीक प्रहार संभव होगा. रिपोर्टों के अनुसार इसकी सटीकता कुछ मीटर के दायरे तक सीमित रह सकती है.

1500 किलोमीटर तक होगी मारक क्षमता

पहले ब्रह्मोस मिसाइल की रेंज करीब 300 किलोमीटर तक ही सीमित थी. लेकिन 2016 में भारत के MTCR का सदस्य बनने के बाद लंबी दूरी वाली मिसाइलों के विकास का रास्ता खुल गया. इसका असर अब ब्रह्मोस-2 प्रोजेक्ट में भी दिख रहा है. रिपोर्ट्स के अनुसार इसकी मारक क्षमता 600 से 1500 किलोमीटर तक बताई जा रही है. यानी भारत बिना दुश्मन की सीमा में दाखिल हुए दूर-दराज ठिकानों को भी तबाह कर पाएगा.

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