सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए भर्ती परीक्षाओं में फर्जीवाड़े का जाल कितना गहरा था, इसका अंदाजा जालौर में हुई कार्रवाई से लगाया जा सकता है. पिछले पांच साल में हुई सरकारी नियुक्तियों की जांच के दौरान शिक्षा विभाग में नकल, डमी अभ्यर्थी, फर्जी डिग्री, फोटो और हस्ताक्षर मिसमैच सहित कई तरह की अनियमितताएं सामने आई हैं. विभागीय कार्रवाई के अनुसार, अब तक बर्खास्तगी और निलंबन की कार्रवाई की गई है, जबकि तृतीय श्रेणी के 113 शिक्षक SOG जांच के दायरे में हैं. विभागीय रिकॉर्ड के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, जालौर में 15 शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया गया है.
शारीरिक शिक्षा शिक्षक भर्ती-2022 में 11 बर्खास्त
शारीरिक शिक्षा अध्यापक भर्ती-2022 में जांच के बाद 11 शिक्षकों की सेवाएं समाप्त की गईं. इनमें परमेश्वरी विश्नोई, विमला, एलची, विक्रम, सुरेश कुमार, चेतन पुरोहित, भारमल, राजाराम, मनोहरलाल, गणपतलाल और अशोक कुमार शामिल हैं. इनके खिलाफ कार्रवाई 15 जनवरी 2025 से 5 जून 2025 के बीच की गई.
प्रारंभिक शिक्षा में 5 शिक्षकों की सेवाएं समाप्त
प्रारंभिक शिक्षा विभाग में भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता और नकल से जुड़े मामलों में 5 शिक्षकों की सेवाएं समाप्त कर दी गई है. जिन पांच शिक्षकों की सेवा समाप्त की गई, उनमें दलपत सिंह पर प्राध्यापक हिंदी स्कूल शिक्षा प्रतियोगी परीक्षा-2022 में संलिप्तता, गणपतराम गोदारा पर कनिष्ठ अभियंता भर्ती परीक्षा-2020, सुरील कुमार बेनीवाल पर उप निरीक्षक भर्ती परीक्षा-2021, अरविंद कुमार पर तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती-2022 में अपने स्थान पर डमी अभ्यर्थी बैठाने तथा राजीव कुमार पर उप निरीक्षक भर्ती परीक्षा-2021 में संलिप्तता के आरोप थे.
15 शिक्षक निलंबित
प्रारंभिक शिक्षा के अंतर्गत 15 शिक्षकों को निलंबित किया गया है. इनमें रीट भर्ती-2021, उप निरीक्षक भर्ती-2021, पटवारी परीक्षा-2021, द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती-2022 और शारीरिक शिक्षा शिक्षक भर्ती-2022 से जुड़े मामले शामिल हैं. इनमें कुछ शिक्षकों पर परीक्षा में संलिप्तता के आरोप हैं, जबकि कुछ पर डमी कैंडिडेट बैठाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं.
माध्यमिक शिक्षा में भी फर्जीवाड़े के मामले
माध्यमिक शिक्षा विभाग में भी फर्जीवाड़े से जुड़े मामलों में कार्रवाई हुई है. किशोर कुमार पर कनिष्ठ अभियंता भर्ती-2020 नकल प्रकरण में संलिप्तता, हरीराम पर डमी अभ्यर्थी के रूप में परीक्षा देने, मनोहरलाल पर डमी अभ्यर्थी बैठाने और फर्जी डिग्री के इस्तेमाल तथा सुरेश कुमार पर फर्जी डिग्री इस्तेमाल करने के आरोप हैं. एक अन्य मामले में न्यायालय से स्थगन भी बताया गया है.
113 तृतीय श्रेणी शिक्षक जांच के घेरे में
जालौर में शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़े का सबसे बड़ा आंकड़ा 113 तृतीय श्रेणी शिक्षकों से जुड़ा है. विभाग के अनुसार, इन शिक्षकों के खिलाफ मामले दर्ज हैं, और प्रकरण एसओजी मुख्यालय जयपुर में विचाराधीन हैं. इन मामलों में हस्ताक्षर और फोटो मिसमैच के मामले अधिक बताए जा रहे हैं. फिलहाल ये शिक्षक ऑन ड्यूटी हैं. जांच में आरोप पुख्ता होने के बाद इनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई हो सकती है.
द्वितीय श्रेणी हिंदी भर्ती-2022 में जीजा-साला का खेल
भर्ती फर्जीवाड़े का एक ताजा उदाहरण द्वितीय श्रेणी हिंदी शिक्षक भर्ती परीक्षा-2022 में सामने आया है. आरपीएससी की वरिष्ठ अध्यापक हिंदी भर्ती परीक्षा में मूल अभ्यर्थी के स्थान पर उसका साला डमी बनकर परीक्षा देने पहुंच गया. एसओजी ने इस मामले में जालौर के खारा निवासी दिनेश कुमार पुत्र किशनलाल विश्नोई को गिरफ्तार किया है. आरोपी पर 10 हजार रुपए का इनाम घोषित था और वह करीब दो साल से पहचान छिपाकर फरार चल रहा था.
जांच के अनुसार, मूल अभ्यर्थी रानीवाड़ा क्षेत्र का सैलाराम और आरोपी दिनेश कुमार आपस में जीजा-साला हैं. ऑनलाइन आवेदन के दौरान दिनेश कुमार ने अपनी और मूल अभ्यर्थी की तस्वीरों को मॉर्फ कर आवेदन में इस्तेमाल किया. इसके बाद परीक्षा केंद्र पर मूल अभ्यर्थी के स्थान पर स्वयं उपस्थित होकर परीक्षा दी. आरोपी ने प्रवेश पत्र और उपस्थिति पत्रक पर भी फर्जी हस्ताक्षर किए.
चयन के बाद खुला फर्जीवाड़ा
परीक्षा में चयन के बाद दस्तावेज सत्यापन के दौरान आवेदन में अपलोड फोटो और वास्तविक अभ्यर्थी की फोटो में अंतर सामने आया. इसके बाद राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से मूल अभ्यर्थी को नोटिस जारी किया गया, लेकिन वह आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ.
इसके बाद एसओजी थाने में मामला दर्ज किया गया. एसओजी ने मूल अभ्यर्थी सैलाराम को 23 अगस्त 2024 को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ चार्जशीट पेश कर दी थी. डमी अभ्यर्थी दिनेश कुमार गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदल रहा था. लगातार तलाश के बाद एसओजी टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया. उससे पूछताछ जारी है, और मामले में आगे जांच की जा रही है.
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