- पंजाब से शुरू हुई यह गुटबाजी अब दिल्ली के सियासी गलियारों तक पहुंच चुकी है.
- दिल्ली में कर रहे पंजाब कांग्रेस के कुछ नेता नेतृत्व के बुलावे का इंतजार
- विरोधी खेमे ने खरगे और राहुल गांधी से मिलने का मांगा है समय
पंजाब कांग्रेस के भीतर मची रार अब थमने का नाम नहीं ले रही है. राज्य से शुरू हुई यह गुटबाजी अब दिल्ली के सियासी गलियारों तक पहुंच चुकी है. प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग की कार्यशैली से नाराज विरोधी गुट उन्हें पद से हटाने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है. वहीं, कांग्रेस आलाकमान के लिए यह स्थिति एक बड़े राजनीतिक संकट में बदलती नजर आ रही है.
दिल्ली में कर रहे पंजाब कांग्रेस के कुछ नेता नेतृत्व के बुलावे का इंतजार
सुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रताप सिंह बाजवा और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी समर्थित गुट के कई विधायक दिल्ली में मौजूद हैं. यह सभी नेता कांग्रेस आलाकमान से मुलाकात का इंतजार कर रहे हैं. विरोधी खेमे ने मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी से मिलने का समय मांगा है, लेकिन फिलहाल उन्हें मुलाकात का समय नहीं मिला है, चन्नी कैंप का रुख स्पष्ट है कि वह राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष के रूप में स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं. करीब एक महीने पहले कांग्रेस केंद्रीय नेतृत्व पहले ही संकेत दे चुका है कि फिलहाल प्रदेश नेतृत्व में बदलाव का कोई इरादा नहीं है.
विरोधी खेमे का 'मिशन वडिंग': दिल्ली में रणनीति तैयार
पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और विधायकों का एक बड़ा वर्ग इस समय दिल्ली में डेरा डाले हुए है. सूत्रों के मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी गुट के नेताओं ने प्रताप सिंह बाजवा से बीते दिन मुलाकात की है और अब सब कांग्रेस नेतृव के मुलाकात के समय का इंतजार कर रहे हैं.
विरोधी गुट का आरोप है कि संगठन में सभी को साथ लेकर चलने की जगह मनमाने फैसले लिए जा रहे हैं. इस असंतोष को लेकर पंजाब के कई प्रमुख चेहरे आलाकमान के सामने अपनी बात रखने की फिराक में हैं. हालांकि, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी की ओर से अभी तक नेताओं को मुलाकात का समय नहीं दिया गया है, जिससे नेताओं की बेचैनी और बढ़ गई है.
कांग्रेस आलाकमान के सामने धर्मसंकट
पंजाब का यह आंतरिक संकट पार्टी नेतृत्व के लिए एक बड़ी सिरदर्दी बन चुका है. एक तरफ जहां शीर्ष नेतृत्व राहुल गांधी और खरगे ने पूर्व में यह संकेत दिए थे कि राज्य में अध्यक्ष बदलने की कोई योजना नहीं है, वहीं दूसरी तरफ पंजाब के क्षत्रप इस फैसले को स्वीकार करने को तैयार नजर नहीं आ रहे हैं. अगर आलाकमान विरोधी गुट के दबाव में झुकता है, तो इससे पार्टी में गलत संदेश जाएगा और बार-बार नेतृत्व बदलने की परिपाटी को बढ़ावा मिलेगा. दूसरी ओर, यदि आलाकमान राजा वडिंग पर हटा देता है, तो राज्य में पार्टी के भीतर बड़ी बगावत का खतरा मंडरा रहा है, जो आगामी चुनावों में कांग्रेस के लिए भारी पड़ सकता है.
संगठन पर असर और आगे की राह
पंजाब में आम आदमी पार्टी और भाजपा जैसी चुनौतियों से निपटने के बजाय कांग्रेस नेता आपस में ही उलझे हुए हैं. गुटबाजी के इस माहौल से न केवल कार्यकर्ताओं का मनोबल गिर रहा है, बल्कि संगठन की पकड़ भी ढीली हो रही है.
आने वाले दिनों में यह देखना बेहद अहम होगा कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे इस अंदरूनी कलह को कैसे शांत करते हैं. फिलहाल, राहुल गांधी के करीबी सूत्रों का कहना है कि फिलहाल राहुल गांधी का पंजाब पर कोई फोकस नहीं है, लेकिन पंजाब कांग्रेस में सियासी उठापटक बढ़ती जा रही है, अब देखना होगा कि क्या आलाकमान बीच का कोई रास्ता निकालेगा, या फिर असंतुष्ट नेताओं को कड़ा संदेश देकर अनुशासन कायम रखेगा? पंजाब कांग्रेस का यह घमासान किस मोड़ पर खत्म होता है इस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं.
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