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पंजाब सरकार का दावा, 2026 में राज्य में पराली जलाने की घटनाओं में आई कमी

पंजाब सरकार ने राज्य में पराली जलने की घटनाओं पर बयान दिया है. राज्य सरकार ने पराली जलाने को लेकर कई दावे किए हैं.

पंजाब सरकार का दावा, 2026 में राज्य में पराली जलाने की घटनाओं में आई कमी
पराली जलाने को लेकर पंजाब सरकार का बड़ा दावा
चंडीगढ़:

पंजाब की भगवंत सिंह मान सरकार ने दावा किया है कि राज्य में पिछले चार साल में पराली जलाने की घटनाओं में कमी दर्ज की गई है.  मान सरकार ने आरोप लगाया कि बीजेपी शासित मध्य प्रदेश में पराली जलाने की घटनाएं बढ़ी हैं. राज्य सरकार ने दावा किया है कि पंजाब में यह गिरावट किसानों की भागीदारी, आधुनिक कृषि मशीनों की बढ़ती उपलब्धता और भगवंत मान सरकार की ओर से लागू की गई सब्सिडी योजनाओं के कारण आई है. 

राज्य सरकार ने भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के CREAMS कार्यक्रम द्वारा 6 अक्टूबर 2026 को जारी बुलेटिन के हवाले से दावा किया है कि 15 सितंबर से 6 अक्टूबर के बीच सात राज्यों में पराली जलाने की कुल 287 घटनाएं दर्ज हुईं. इनमें सबसे ज्यादा 118 घटनाएं मध्य प्रदेश में दर्ज की गईं, जबकि पंजाब में 88, उत्तर प्रदेश में 65 घटनाएं सामने आईं. रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवधि के दौरान पंजाब में किसी भी दिन पराली जलाने की घटनाएं दहाई के आंकड़े तक नहीं पहुंचीं, जबकि मध्य प्रदेश में पांच दिन ऐसे रहे जब घटनाओं की संख्या दहाई में दर्ज हुई. 

पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां के अनुसार, 2026 के सीजन में किसानों ने 21,155 फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें खरीदी हैं. इनमें सबसे अधिक 14,384 सुपर सीडर शामिल हैं. इसके अलावा 1,721 मल्चर, 1,346 हाइड्रोलिक रिवर्सिबल एमबी प्लाऊ, 1,123 जीरो टिल ड्रिल, 927 बेलिंग मशीनें और 874 स्ट्रॉ रेक खरीदी गई हैं. इन मशीनों के जरिए किसानों को पराली जलाए बिना अगली फसल की बुवाई करने और फसल अवशेषों का दूसरे कार्यों में उपयोग करने की सुविधा मिल रही है.

पंजाब सरकार ने दावा किया है कि राज्य सरकार व्यक्तिगत किसानों को कृषि मशीनों पर 50 प्रतिशत से ज्यादा सब्सिडी दे रही है, जबकि कस्टम हायरिंग सेंटरों, किसान उत्पादक संगठनों, सहकारी समितियों और पंचायतों को 80 प्रतिशत तक सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है। इस व्यवस्था का उद्देश्य उन छोटे और सीमांत किसानों को भी आधुनिक मशीनों की सुविधा देना है, जो अपने स्तर पर महंगी मशीनें खरीदने में सक्षम नहीं हैं. दरअसल, पंजाब के किसानों के सामने पराली जलाने की समस्या सिर्फ पर्यावरण से जुड़ी नहीं रही है। धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच बहुत कम समय मिलता है. खेतों से पराली हटाने में मशीनों, मजदूरी और परिवहन का अतिरिक्त खर्च आता है. छोटे किसानों के लिए यह खर्च उठाना आसान नहीं होता. 

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