कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का प्रदर्शन ऐतिहासिक रहा. देश ने 13 गोल्ड समेत कुल 39 मेडल अपने नाम किए. भारत ने जूडो में पहली बार दो गोल्ड मेडल जीते, तो वहीं, भारत के मुक्केबाजों का प्रदर्शन भी यादगार रहा. भारतीय बॉक्सरों ने 7 गोल्ड मेडल जीते. गोल्ड मेडल जीतकर भारतीय मुक्केबाजों ने जो इतिहास रचा है वह यादगार है. CWG में गोल्ड मेडल जीतने के बाद भारत के बॉक्सरों ने NDTV से बात की. NDTV से बात करते हुए भारत की बेटियों ने परिवार के संघर्ष को याद किया और बताया कि गोल्ड तक का सफर उनके लिए कैसा रहा है.

जैस्मिन लंबोरिया
जैस्मिन लंबोरिया ने कहा कि, "मैं अपने घर में पहली बॉक्सर हूं, काफी गर्व हो रहा है कि अपने देश के लिए मैं मेडल लेकर आई हूं, मैंने पहले कभी भी ऐसा नहीं सोचा था कि अपने देश के लिए हम मेडल लेकर आएंगे. जब शुरू में गेम शुरू किया था तो था कि हां अच्छा करना है. लेकिन अब जब अपने देश के लिए मैंने मेडल लिया तो गर्व का एहसास हो रहा है. अब जब मेडल को मैं देखती हूं तो पुरानी बातें याद आ रही है कि कैसे हमने यह गेम शुरू किया था और कैसे यह जर्नी मेरी शुरू हुई थी". बता दें कि जैस्मिन लंबोरिया 2 बार के एशियाई खेल में गोल्ड मेडल विजेता और द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता कैप्टन हवा सिंह के परिवार से आते हैं. इस बारे में जैस्मिन ने कहा कि, मुझे गर्व है कि मैं इस परिवार से आती हूं लेकिन इसका दबाव नहीं रहा था. मैं घर जाकर घर का खाना खाउंगी.

अरुंधति चौधरी
राजस्थान के कोटा की रहने वाली 23 साल की अरुंधति ने कहा कि, गोल्ड मेडल जीतना मेरा सपना था. काफी अच्छा लग रहा है. मैं कहना चाहूंगी कि मेरे नाम से अब इतिहास लिखा जाएगा. मेरा हमेशा से सपना था कि मैं अपने करियर में कुछ ऐसा करुं जिससे मेरा नाम रहे, अब मैं राजस्थान की पहली महिला बॉक्सर बन गईं हूं जिसके नाम CWG में गोल्ड मेडल जीतने का रिकॉर्ड है. यह रिकॉर्ड अब मेरे साथ हमेशा रहेगा. मुझे अच्छा लग रहा है. अपनी जर्नी को लेकर अरुंधति चौधरी ने कहा, "मैं राजस्थान से हूं और जाट परिवार से तालुक है. जाट परिवार के लोग लड़कियों को ज्यादा बाहर निकलने नहीं देते हैं. लेकिन आज मैं यहां हूं खड़ी हूं तो इसका पूरा श्रेय मेरे परिवार को जाता है. उनके कारण ही मैं आज गोल्ड मेडल जीतकर यहां पहुंची हूं. उन्होंने मेरे को यहां तक लाने के लिए दूसरे लोगों से काफी लड़ाई लड़ी. दूसरे लोग नहीं चाहते थे कि मैं घर से बाहर जाऊ लेकिन मेरे परिवार ने मुझे भरपूर सपोर्ट किया जिसके कारण आज मैं CWG में गोल्ड मेडल जीतने में सफल रही हूं. लोग मेरे परिवार वालों को ताना देते थे कि लड़की को आप क्यों आप बाहर जाने के लिए कह रहे हो, ये लड़के के साथ भी रहेंगे. ये कैसे कपड़े पहनते हैं. लेकिन मेरे परिवार वालों ने मुझे कभी भी किसी बात को लेकर नहीं टोका. मैं अपने परिवार को शुक्रिया कहना चाहती हूं.
सबसे पहला कॉल पापा को किया
अरुंधति चौधरी ने ये भी बताया कि "गोल्ड जीतने के बाद सबसे पहला कॉल मैंने अपने पापा को किया है. क्योंकि उन्होंने मेरे लिए काफी फाइट की है. उसका ही नतीजा है कि मैं आज यहां खड़ी हूं."

साक्षी चौधरी
25 साल की साक्षी भिवानी की एक और बॉक्सर हैं. ग्लासगो फाइनल तक पहुंचने के लिए उन्हें काफी हिम्मत दिखानी पड़ी. जूनियर लेवल पर शानदार प्रदर्शन किया जिसके दम पर वह CWG में पहुंची और गोल्ड मेडल जीतने में सफल रही, साक्षी ने अपनी जर्नी को लेकर कहा कि मैं काफी खुश हूं, मैं डिसिप्लिन में रहती हूं, अपनी फिटनेस पर मैं काफी मेहनत करती हूं, इसका ही फायदा मुझे यहां मिला है. बता दें कि साक्षी ने ग्लासगो जाने के लिए अपना वजन घटाकर 51kg किया, और फिर ज्योति गुलिया, निखत जरीन और मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन मीनाक्षी हुड्डा को हराकर CWG 2026 के लिए क्वालिफाई किया. साक्षी ने कहा, नेशनल ट्रायल के दौरान मेरे दिमाग में ये नहीं था कि मैं किसे हराउंगी, मुझे बस अपना बेस्ट देना था, मुझे बस भरोसा था कि गोल्ड मेडल जीतकर भारत लाना है, मुझे बस अपना बेस्ट देना है. साक्षी ने बॉक्सिंग में झुकाव को लेकर भी बात की और कहा कि, मैं जब छोटी थी तो काफी फिट थी. मैं थोड़ी शरारती भी थी, मेरी और भाई की लड़ाई भी होते रहती थी. वही पापा ने सोचा कि मेरी काबिलियत को बॉक्सिंग में परखा जाए, फिर भिवानी में विजेंदर सिंह की मेडल के बाद एक लहर सी बन गई थी. तो मैंने ये सोचकर बॉक्सिंग की शुरुआत की.

प्रिया घंघास
20 साल की प्रिया गंगहास इस दल की सबसे कम उम्र की खिलाड़ी हैं. भिवानी की रहने वाली प्रिया और साक्षी कजिन हैं और वे बड़े मंचों पर अपने परिवार का नाम रोशन कर रही हैं, CWG का यह गोल्ड मेडल उनकी लोकप्रियता और उन पर लोगों की उम्मीदों को और बढ़ाएगा. प्रिया ने NDTV से बात करते हुए कहा, मेरी मेहनत के कारण मुझे गोल्ड मेडल मिला है. प्रिया ने कहा कि, मेरा एक ही मकसद था कि CWG में गोल्ड मेडल लेकर आना है, गोल्ड ही सपना था. एक ऐसा रिकॉर्ड बनाना है जो लंबे समय से टूटे नहीं. प्रिया गंगहास ने कहा कि, "हम वेट काफी कम करते हैं इसलिए खाना कम खाते हैं. अब जब मैं घर जाउंगी तो सबसे पहले खाना जी भर के खाऊंगी, अपने परिवार से मिलकर उनके साथ बात करूंगी, मैं काफी खुश हूं कि अपने देश के लिए गोल्ड मेडल जीत पाई हूं.
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