Gyaneshwari's Yadav's inspirational story: ग्लास्गो में खेले जा रहे राष्ट्रकुल खेलों के पांचवें दिन सोमवार को भारत के पदकों की शुरुआत और संख्या में इजाफा करने का काम किया ज्ञानेश्वरी यादव (Gyaneshwari Yadav) ने. ज्ञानेश्वरी अपने करियर में 49 किग्रा और 53 किग्रा भार वर्ग में हिस्सा लेती रही हैं. और सोमवार को उन्होंने 53 किग्रा भार वर्ग में दूसरे नंबर पर रहने के साथ ही भारत को अभी तक का तीसरा रजत और कुल मिलाकर पांचवां पदक दिलवा दिया. वेटलिफ्टर मीराबाई चानू की तरह ही ज्ञानेश्वरी यादव के चैंपियन बनने तक का सफर बहुत ही सघर्ष भरा रहा है. वह मूल रूप से छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले की रहने वाली हैं.
Strength meets success! 💥
— Sony Sports Network (@SonySportsNetwk) July 27, 2026
Gyaneshwari Yadav smashes her personal best with a total lift of 199kg to bring home 🥈 in the Women's 53kg Weightlifting event. 🏋️
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पिता का संघर्ष और प्रेरणा
ज्ञानेश्वरी के पिता दीपक यादव एक प्राइवेट इलेक्ट्रीशियन के रूप में काम करते हैं और उन्हें अपनी बेटी को राष्ट्रकुल खेलों में चैंपियन बनने तक के सफर में बहुत ज्यादा संघर्ष करना पड़ा, लेकिन युवावस्था से ही बॉडी बिल्डिंग और वेटलिफ्टिंग से जुड़े रहने की वजह से उन्होंने अपने जुनून और सपने को मरने नहीं दिया. ज्ञानेश्वरी का परिवार मूल रूप से छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के पास स्थित छोटे से गांव 'गोरिया' में रहता था. शुरुआती दिनों में उनके पिता गांव से रोजाना स्कूल और प्रैक्टिस के लिए शहर आते-जाते थे. गांव से मुख्य शहर या ट्रेनिंग सेंटर की दूरी काफी थी, जिसे वे तय करने के लिए पूरी तरह साइकिल पर निर्भर थे.
त्याग और कड़ा संघर्ष, आर्थिक तंगी और डाइट की समस्या
वेटलिफ्टिंग एक ऐसा खेल है जिसमें उच्च स्तर की न्यूट्रिशन और ‘डाइट' की आवश्यकता होती है, जो काफी महंगी होती है. ऐसे में एक इलेक्ट्रिशियन पिता के लिए यह खर्च उठाना बहुत ही मुश्किल था. ऐसा भी समय आया, जब कोविड-19 महामारी के दौरान आर्थिक संकट और गहरा गया था. इस दौरान पिता के काम पर खासा असर पड़ा, लेकिन परिवार ने हार नहीं मानी
Commonwealth Games 2026: Weightlifter Gyaneshwari Yadav clinches a silver medal in the women's 53kg category.
— IANS (@ians_india) July 27, 2026
Gyaneshwari Yadav says, "I am feeling extremely happy. This is my first Commonwealth Games, and my motive was to give my personal best, and I did that..." pic.twitter.com/XuQtP1G6xN
सुविधाओं का अभाव बना ही रहा
छत्तीसगढ़ के छोटे शहर राजनांदगांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर तय करना आसान नहीं था. सीमित संसाधनों, आधुनिक उपकरणों की कमी और शाकाहारी पृष्ठभूमि से होने के कारण खान-पान की चुनौतियां भी ज्ञानेश्वरी के सामने लगातार बनी रहीं, लेकिन उन्होंने तमाम समस्या के बावजूद ट्रेनिंग पर कभी असर नहीं पड़ने दिया. उन्होंने रोजाना सुबह और शाम को घंटों तक कड़ा अभ्यास (रोजाना 6 घंटे तक पसीना बहाना) किया, जिसके पीछे उनकी और उनके कोच की भी वर्षों की तपस्या शामिल है.
टर्निंग पॉइंट्स और उपलब्धियां
ज्ञानेश्वरी के जीवन में बड़ा मोड़ तब आया जब उन्होंने ग्रीस के हेराक्लिओन में आयोजित आईडब्ल्यूएफ जूनियर वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन रजत पदक जीते. यह उपलब्धि हासिल करने वाली वह छत्तीसगढ़ की पहली महिला बनीं. इसके बाद उन्हें मीराबाई चानू से मुकाबला करना पड़ा. राष्ट्रीय स्तर पर रैंकिंग प्रतियोगिताओं के दौरान उन्होंने देश की दिग्गज ओलंपियन मीराबाई चानू को सीनियर वर्ग में कड़ी टक्कर दी. इस दौरान किए गए प्रदर्शन से वह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गईं. उनकी असाधारण प्रतिभा को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने उन्हें सम्मानित किया तथा राज्य पुलिस सेवा में एएसआई (ASI) के पद पर नियुक्ति की घोषणा की.
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