विज्ञापन

देश के लिए जीते 4 इंटरनेशनल गोल्ड, आज पेट पालने के लिए बेच रहे सब्जी और चला रहे कैब

भारत के लिए चार अंतरराष्ट्रीय मेडल जीतने वाले अमरदीप पेट पालने के लिए सड़क पर सब्जी बेच रहे हैं और रात में कैब चलाने को मजबूर हैं.

देश के लिए जीते 4 इंटरनेशनल गोल्ड, आज पेट पालने के लिए बेच रहे सब्जी और चला रहे कैब
Amardeep Kumar Won four international gold medals for the country today selling vegetables

झारखंड के 29 वर्षीय थ्रोबॉल खिलाड़ी अमरदीप ने देश के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चार गोल्ड मेडल जीते हैं. लेकिन इन उपलब्धियों के बावजूद आज वह अपने परिवार का पेट पालने के लिए रांची की सड़कों पर सब्जियां बेचने और कैब चलाने को मजबूर हैं. अमरदीप का आरोप है कि खेल प्रतिभाओं को लेकर राज्य की नीति और सरकारी तंत्र की उदासीनता के कारण उन्हें अब तक नौकरी और प्रोत्साहन राशि नहीं मिल सकी है. 

रांची के अरगोड़ा चौक पर रोजाना सब्जियों की दुकान लगाने वाले अमरदीप को देखकर शायद ही कोई अंदाजा लगा पाए कि यही युवा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुका है और देश के लिए चार गोल्ड मेडल जीत चुका है. खेल के मैदान पर मेडल जीतने वाला यह खिलाड़ी अब परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए कभी सब्जियां बेचता है तो कभी कैब चलाता है.

अमरदीप परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए सब्जियां बेचने को मजूबर हैं.

अमरदीप परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए सब्जियां बेचने को मजूबर हैं.

अमरदीप ने अपना पहला इंटरनेशनल गोल्ड मेडल 2015 में मलेशिया में हुई एशियन जूनियर थ्रोबॉल चैंपियनशिप में जीता था. इसके बाद 2017 में काठमांडू में इंडो-नेपाल थ्रोबॉल चैंपियनशिप, 2019 में बेंगलुरु में साउथ एशियन थ्रोबॉल चैंपियनशिप और 2026 में रांची में आयोजित इसके दूसरे संस्करण में भी उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया.

चार गोल्ड के बाद भी नौकरी का इंतजार

अमरदीप का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए उपलब्धियां हासिल करने के बावजूद उन्हें राज्य सरकार की ओर से अब तक सरकारी नौकरी नहीं मिली. कैश अवॉर्ड और सरकारी नौकरी के लिए उनके आवेदन लंबे समय से पड़े हुए हैं.

वह बताते हैं कि वर्ष 2016 से ही प्रोत्साहन राशि के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं. नौकरी के लिए उन्होंने 2020 से प्रयास शुरू किया था. इसी बीच कोरोना महामारी आ गई. इसके बाद 2022 से उन्होंने दोबारा लगातार सरकारी नौकरी के लिए कोशिश की, लेकिन अभी तक कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकला.

अमरदीप के मुताबिक, उन्होंने अपनी बात सरकार तक पहुंचाने की कोशिश भी की. वह पूर्व खेल मंत्री हफीजुल हसन से भी मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ.

दूसरे राज्यों में खिलाड़ियों को नौकरी, झारखंड में इंतजार

अमरदीप कहते हैं कि उनके कई साथी खिलाड़ी छत्तीसगढ़, हरियाणा और बिहार से हैं और उन्हें वहां सरकारी नौकरी तथा दूसरी सुविधाएं मिली हैं. उनका कहना है कि हरियाणा की ओर से खेलने वाले और उनके कप्तान रह चुके एक खिलाड़ी को वहां की सरकार ने कई सुविधाएं दीं.

अमरदीप का सवाल है कि अगर दूसरे राज्यों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और राज्य का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों को नौकरी और सम्मान मिल सकता है, तो झारखंड के खिलाड़ियों के लिए ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं है?

पिता सब्जी बेचते हैं, मां भी घर-घर बेचती हैं सब्जी

अमरदीप के परिवार की आर्थिक स्थिति भी संघर्ष की कहानी बयां करती है. परिवार में उनके माता-पिता और बड़े भाई हैं. पिता सब्जी बेचते हैं और इसी काम में अमरदीप भी उनका हाथ बंटाते हैं. उनकी मां गृहिणी हैं, लेकिन परिवार की आर्थिक जरूरतों के लिए वह भी करीब 35 किलो सब्जी सिर पर रखकर घर-घर बेचती हैं. उनके बड़े भाई फास्ट फूड का छोटा-सा स्टॉल लगाकर किसी तरह परिवार की जरूरतें पूरी करने में मदद करते हैं.

कर्ज लेकर खेलते रहे इंटरनेशनल टूर्नामेंट

अमरदीप के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना भी आसान नहीं रहा. कई बार उन्हें टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए कर्ज तक लेना पड़ा. हालांकि इस दौरान झारखंड थ्रोबॉल एसोसिएशन ने उनकी मदद की और उनके खेल करियर को आगे बढ़ाने में सहयोग किया. वह कहते हैं कि आर्थिक परेशानियों के बावजूद उन्होंने खेल छोड़ने का फैसला नहीं किया. लेकिन रोजी-रोटी और खेल के बीच संतुलन बनाना लगातार मुश्किल होता जा रहा है.

थ्रोबॉल खिलाड़ी अमरदीप ने देश के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चार गोल्ड मेडल जीते हैं

थ्रोबॉल खिलाड़ी अमरदीप ने देश के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चार गोल्ड मेडल जीते हैं

रात में कैब, सुबह मैदान में प्रैक्टिस

अमरदीप बताते हैं कि कई बार परिवार चलाने के लिए रात में कैब चलानी पड़ती है. रात में देर तक गाड़ी चलाने के बाद सुबह उठकर मैदान में प्रैक्टिस करना बेहद मुश्किल होता है. शरीर थका रहता है, लेकिन करियर बचाने के लिए वह किसी तरह दोनों चीजों को मैनेज कर रहे हैं.

 कई बार अमरदीप को रात में कैब चलाने पड़ती है.

उनका कहना है कि जिंदगी में काफी मेहनत और संघर्ष है, लेकिन उन्होंने अभी हार नहीं मानी है.

अमरदीप अब भी मैदान पर वापसी और देश के लिए खेलने का सपना देख रहे हैं. उन्होंने बताया कि अक्टूबर 2026 के आखिर में वह श्रीलंका में होने वाले एक टूर्नामेंट में हिस्सा लेने की तैयारी कर रहे हैं.

चार इंटरनेशनल गोल्ड मेडल जीत चुका यह खिलाड़ी आज भी सरकारी नौकरी और प्रोत्साहन राशि का इंतजार कर रहा है. अरगोड़ा चौक पर सब्जियां बेचते और कैब चलाते अमरदीप की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी के संघर्ष की कहानी नहीं, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करती है कि क्या देश और राज्य के लिए मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों को अपने भविष्य के लिए भी इसी तरह संघर्ष करना पड़ेगा?

(रांची से हरिबंश शर्मा की रिपोर्ट)

यह भी पढ़ें: 'हम चैन की नींद सो पाते हैं...' सचिन भी हुए 'ऑपरेशन सफेद सागर' के फैन, IAF के लिए कही दिल छूने वाली

यह भी पढ़ें: टीम इंडिया के दिग्गज भी हैं 'हनुमान अंश' के भक्त, जब लौटी विराट की फॉर्म

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Other Sports
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com