मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव के बीच महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने एक ऐसा चुनावी वीडियो जारी किया है, जिसने राजनीतिक हलकों के साथ-साथ मराठी समाज के भीतर भी गहरी बहस छेड़ दी है.वीडियो की शुरुआत ही एक चौंकाने वाली पंक्ति से होती है कि अगर आप मराठी हैं, तो यह वीडियो मत देखिए. लेकिन इसके बाद जो दृश्य सामने आता है, वह मराठी मानुस के भविष्य को लेकर एक गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है.
2052 की डरावनी तस्वीर: मुंबई के चिड़ियाघर में ‘मराठी मानुस'
वीडियो में वर्ष 2052 की कल्पना की गई है, जहां एक मराठी मानुस मुंबई के चिड़ियाघर में पिंजरे में बंद दिखाया जाता है.वह खुद अपनी कहानी सुनाता है—कैसे मराठी लोग आपस में ही लड़ते रहे, कैसे विकास के झूठे सपनों में फंसते चले गए और अंततः मुंबई से बाहर खदेड़ दिए गए. वीडियो का कथानक यह संदेश देता है कि: मराठी समाज की आपसी फूट, राजनीतिक स्वार्थों में बंटवारा और अस्मिता के मुद्दों की अनदेखी.इन सबका नतीजा यह हुआ कि मराठी मानुस अपने ही शहर में हाशिये पर चला गया.
“एक नेता चेतावनी देता रहा, लेकिन हमने नहीं सुना…”
वीडियो में एक अहम मोड़ तब आता है जब वह किरदार कहता है कि एक व्यक्ति था, जो हमें लगातार आगाह करता रहा (राज ठाकरे का भाषण) लेकिन हमने उसकी बात नहीं सुनी. यह संकेत साफ तौर पर राज ठाकरे की ओर है, जो वर्षों से मराठी अस्मिता, भाषा, रोजगार और जनसांख्यिकीय बदलावों को लेकर चेतावनी देते आए हैं.इसके बाद वह व्यक्ति अचानक नींद से जागता है—और तारीख होती है जनवरी 2026.यानी, अभी भी हालात बदलने का वक्त बाकी है.
आंकड़ों के जरिए चेतावनी
वीडियो के अंत में मुंबई में मराठी भाषी आबादी में लगातार गिरावट के आंकड़े दिखाए जाते हैं, जो मनसे के संदेश को और धार देते हैं.
1981 – 46%
2001 – 39%
2011 – 35%
2025 – 30%
2035 (अनुमानित) – 25%
मनसे का दावा है कि अगर यही रुझान जारी रहा, तो आने वाले दशकों में मराठी मानुस अपने ही शहर में अल्पसंख्यक बन जाएगा और यही इस वीडियो का केंद्रीय संदेश है.
मराठी अस्मिता पर मनसे की राजनीति
मनसे प्रमुख राज ठाकरे लंबे समय से कहते आए हैं कि मराठी लोगों को उनकी भाषा, संस्कृति, रोजगार और अस्तित्व को लेकर सजग रहना होगा.उनका मानना रहा है कि अगर मराठी समाज राजनीतिक रूप से संगठित नहीं हुआ, तो मुंबई से उसका वजूद धीरे-धीरे खत्म हो जाएगा.राज ठाकरे के शब्दों में अक्सर यह भाव रहा है. मराठी मानुस की पहचान उसकी भाषा, उसका स्वाभिमान और उसका हक है.अगर यह चला गया, तो सब चला जाएगा.
‘अस्तित्व की लड़ाई' का आह्वान
मनसे का यह वीडियो सिर्फ एक चुनावी प्रचार नहीं, बल्कि मराठी समाज के लिए एक चेतावनी और आह्वान माना जा रहा है.पार्टी का संदेश साफ है - अगर मराठी लोग अब भी नहीं जागे, अगर वे आपसी मतभेदों से ऊपर नहीं उठे और अगर उन्होंने अपने भविष्य को सुरक्षित करने का राजनीतिक संदेश नहीं दिया तो 2052 की यह कल्पना हकीकत भी बन सकती है.
बीएमसी चुनाव में यह वीडियो मराठी वोटरों को भावनात्मक रूप से जोड़ने की कोशिश है.मनसे इसे “विकास बनाम अस्तित्व” की बहस में बदलना चाहती है कि जहां सवाल सिर्फ सड़कों और इमारतों का नहीं, बल्कि मुंबई में मराठी मानुस के भविष्य का है.स्पष्ट है कि बीएमसी चुनाव 2026 में मनसे का यह अभियान मराठी राजनीति को एक बार फिर केंद्र में ले आया है, और यह तय करना अब मतदाताओं के हाथ में है कि वे इस चेतावनी को सपना समझकर नजरअंदाज करेंगे या भविष्य सुरक्षित करने का संदेश देंगे.
यह भी पढ़ें: 'परप्रांतीय' का विरोध करने वाली MNS ने चला 'उत्तर भारतीय' दांव, राज ठाकरे की रणनीति या मजबूरी?
यह भी पढ़ें: जालना से बीजेपी ने नहीं दिया टिकट तो फूट-फूट कर रोई महिला, पूर्व विधायक के पैरों में गिर पड़ी
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं