मुंबई:
बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को महाराष्ट्र में बीफ पर विस्तृत पाबंदी लगाने वाले कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रखा। न्यायमूर्ति ए.एस. ओका और न्यायमूर्ति एस.सी. गुप्ते की खंडपीठ ने पिछले महीने अंतिम सुनवाई शुरू की थी।
राष्ट्रपति ने पिछले साल फरवरी में महाराष्ट्र पशु संरक्षण (संशोधन) कानून 1976 को मंजूरी दी थी। वर्ष 1976 के वास्तविक कानून में गौकशी पर पाबंदी लगाई गई थी जबकि संशोधित कानून में सांडों के वध के साथ बीफ रखने तथा खाने पर भी रोक लगा दी गई।
वध के लिए पांच साल की सजा और दस हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान है जबकि बीफ रखने पर एक साल की सजा और दो हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने बीफ रखने पर जमा के प्रावधान वाले हिस्से पर अंतरिम रोक लगाने से इंकार किया था।
राष्ट्रपति ने पिछले साल फरवरी में महाराष्ट्र पशु संरक्षण (संशोधन) कानून 1976 को मंजूरी दी थी। वर्ष 1976 के वास्तविक कानून में गौकशी पर पाबंदी लगाई गई थी जबकि संशोधित कानून में सांडों के वध के साथ बीफ रखने तथा खाने पर भी रोक लगा दी गई।
वध के लिए पांच साल की सजा और दस हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान है जबकि बीफ रखने पर एक साल की सजा और दो हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने बीफ रखने पर जमा के प्रावधान वाले हिस्से पर अंतरिम रोक लगाने से इंकार किया था।
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