विज्ञापन
This Article is From Dec 04, 2019

मध्यप्रदेश में यूरिया की किल्लत, किसान सड़कों पर उतरे; केंद्र पर सौतेले व्यवहार का आरोप

राज्य में औसत से 30 से 40 फीसदी ज्यादा बारिश होने की वजह से किसानों में अच्छी रबी फसलों की उम्मीद, लेकिन यूरिया की कमी से परेशानी

मध्यप्रदेश में यूरिया की किल्लत, किसान सड़कों पर उतरे; केंद्र पर सौतेले व्यवहार का आरोप
मध्यप्रदेश में यूरिया की कमी के कारण किसान परेशान हैं.
  • गुना में नाराज किसान यूरिया की किल्लत की वजह से सड़क पर उतरे
  • सागर में किसानों ने नाराज होकर चक्काजाम कर दिया
  • यूरिया की कालाबाजारी, दुकानदार साथ में जबरन सल्फर, डीएपी बेच रहे
भोपाल:

मध्यप्रदेश में रबी के सीजन में बुवाई के वक्त यूरिया की भारी किल्लत सामने आ रही है. कई किसानों का आरोप है कि उनसे दोगुने दाम लिए जा रहे हैं. यूरिया की कालाबाजारी हो रही है. इधर राज्य सरकार का कहना है कि केंद्र मांग के मुताबिक यूरिया नहीं दे रहा है. हालांकि सरकार ने भरोसा दिया है कि वह यूरिया की कमी नहीं होने देगी, लेकिन हालात ये हैं कि कहीं थाने से यूरिया बिक रहा है तो कहीं नाराज किसान सड़क जाम कर रहे हैं.
        
मध्यप्रदेश के गुना में नाराज किसान यूरिया की किल्लत की वजह से सड़क पर उतरे. ऐसे ही हालात सागर, खंडवा, उज्जैन, विदिशा, रायसेन, सीहोर, अशोकनगर जैसे कई जिलों से बन गए हैं. सागर में तो किसानों ने नाराज होकर चक्काजाम तक कर दिया. कुछ दिन पहले सागर के गढ़ाकोटा में विपणन संघ के कर्मचारी किसानों की भीड़ देखकर ऐसे घबराए कि थाने के अंदर बैठकर पर्ची काटी, तब जाकर किसान यूरिया ले पाए. किसानों का यह भी आरोप है कि दुकानदार यूरिया के साथ जबरन सल्फर, डीएपी बेच रहे हैं. 268 रुपये का यूरिया 350 से लेकर 500 रुपये प्रति कट्टा बेचा जा रहा है.
राज्य में औसत से 30 से 40 फीसद ज्यादा बारिश होने की वजह से हर किसान रबी फसलें अधिक से अधिक लेना चाहता है, जिसके लिए उसे यूरिया चाहिए. राज्य ने इस वजह से केंद्र सरकार से रबी सीजन के लिए 18 लाख मीट्रिक टन यूरिया देने की मांग रखी थी, लेकिन काफी चर्चा के बाद भी दो लाख 60 हजार मीट्रिक टन मांग घटाकर पूरे सीजन के लिए कोटा 15 लाख 40 हजार मीट्रिक टन तय कर दिया. अक्टूबर में 4,25,000 मीट्रिक टन की मांग थी, मिला 2,98,000 मीट्रिक टन. नवंबर में 4,50,000 मीट्रिक टन मांगा था तो मिला 4 लाख टन.
      
सरकार कह रही है कि केन्द्र का रवैया सौतेला है तो वहीं बीजेपी का आरोप है कि सरकार ने योजना नहीं बनाई. कृषि मंत्री सचिन यादव ने केन्द्र पर आरोप लगाते हुए कहा केन्द्र सरकार सौतेला व्यवहार प्रदेश की सरकार के साथ कर रही है. चाहे वह यूरिया का मामला हो, चाहे मुआवजे का, या फिर विभिन्न योजनाओं का, केन्द्र से जो राशि मिलनी चाहिए, नहीं मिल रही. 

भोपाल गैस त्रासदी : पीढ़ियों को निगल रहा जहर, सरकारें यूनियन कार्बाइड के हितों की रक्षक

दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ''मध्यप्रदेश में मामा होता तो अब तक एक दर्जन बार पैसे डाल देता, अलग-अलग योजनाओं के माध्यम से, किसानों के खाते में. ऊपर से खाद की मार, इससे लोग परेशान हैं. मैं अग्रिम भंडारण करके रखता था. किसानों से कहता था घर ले जाओ और तीन महीने का जो ब्याज है, वो भी सरकार के खजाने से भरवाते थे. एडवांस प्लानिंग करनी थी, इस सरकार ने नहीं की.''

लोकसभा अध्‍यक्ष रहते हुए भी मैं अपनी पार्टी की सरकार के ख़िलाफ आवाज़ नहीं उठा सकती थी क्‍योंकि... : सुमित्रा महाजन
     
वैसे सरकार का कहना है कि कुछ रैक अभी परिवहन में हैं, जिलों में पहुंचने से हालात सुधरेंगे. एक रैक में 26 हजार मीट्रिक टन यूरिया आता है.  

खूंखार डकैत बालकिशन चौबे को पकड़ने के लिए महिला पुलिस अधिकारी बनी 'दुल्हन'

ainanjdg

      

ज्यादा बारिश और बाढ़ की वजह से खरीफ फसलें चौपट होने के बाद किसान रबी फसलों से उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन यूरिया की किल्लत उसे परेशान कर रही है. मुख्यमंत्री कमलनाथ ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर यूरिया की मांग और आपूर्ति पूरी करने की बात उठाई है. अधिकारी भी केन्द्र के संपर्क में हैं, लेकिन चूंकि किसान मुद्दा है, सो यूरिया भी सियासी चाल में है.

VIDEO : प्याज से भरा ट्रक रास्ते में हुआ चोरी

लेखक के बारे में
img
अनुराग द्वारी
पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Urea Crisis, Madhya Pradesh
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com