इंदौर में रेमडेसिविर के लिए लगी लंबी कतार, इंजेक्शन की कालाबाजारी भी जोरों पर

गंभीर मरीज को सामान्यत: रेमडेसिविर (Remdesivir) के 6 इंजेक्शन की खुराक लगाई जाती है. कालाबाजारी का आलम यह है कि 750 से 1400 रुपये तक के होलसेल रेट वाले इंजेक्शन की बाजार में कीमत 1200 से लेकर 6000 रुपये तक वसूली जा रही है.

इंदौर में रेमडेसिविर के लिए लगी लंबी कतार, इंजेक्शन की कालाबाजारी भी जोरों पर

इंदौर में रेमडेसिविर के लिए लंबी लाइन लगी.

खास बातें

  • इंदौर में दवा पाने के लिए लगी लंबी लाइन
  • रेमडेसिविर की कालाबाजारी भी जोरों पर
  • MP-छत्तीसगढ़ में तेजी से बढ़ रहे कोरोना केस
इंदौर:

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) और छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में कोरोनावायरस (Coronavirus) से हालात भयावह होने लगे हैं. कई शहरों में लॉकडाउन (Lockdown) लग गया है. कई बातों पर पाबंदी भी, लेकिन कोरोना के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं और इंजेक्शन से लोग खासे परेशान हैं. वहीं अस्पतालों में भी भयानक दिक्कत सामने आने लगी हैं. इंदौर में रेमडेसिविर (Remdesivir) इंजेक्शन की किल्लत है. लोग लाइनों में हैं. कई दुकानदारों ने तो दुकानों के बाहर बोर्ड भी लगवा दिए कि रेमडेसिविर इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है. जिन मेडिकल दुकानों पर रेमडेसिविर इंजेक्शन उपलब्ध था, उनके बाहर सैकड़ों खरीदारों की भीड़ मौजूद दिखी.

रेमडेसिविर मिलने की आस लगाए लोग लंबी कतार देख परेशान हैं. लाइन में खड़े एक शख्स ने कहा, 'लाइन में खड़े 2 घंटे हो गए. 200 लोगों की लाइन है. पिता भर्ती हैं ट्रॉमा अस्पताल में. 3 दिन से सिर्फ इजेक्शन का इंतजार कर रहे हैं.' न ऑक्सीजन है, ना दवा है, इंदौर की जनता बाजार में खड़ी है.

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गंभीर मरीज को सामान्यत: छह इंजेक्शन की खुराक लगाई जाती है. कालाबाजारी का आलम यह है कि 750 से 1400 रुपये तक के होलसेल रेट वाले इंजेक्शन की बाजार में कीमत 1200 से लेकर 6000 रुपये तक वसूली जा रही है. मुख्यमंत्री ने इंजेक्शन को लेकर कड़े निर्देश दिए थे, लेकिन असर नहीं दिख रहा है.

वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश के सागर में बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में बुधवार को ऑक्सीजन की कमी से अचानक अफरा-तफरी मच गई. एसएनसीयू में भर्ती 12 गंभीर शिशुओं को तत्काल जिला अस्पताल में शिफ्ट किया गया.

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उज्जैन में माधव नगर अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से कथित तौर पर 5 मरीजों की मौत के बाद संक्रमित मरीज के परिजन ऐसा भड़के कि एडिशनल कलेक्टर सुजान सिंह रावत को मारने दौड़ पड़े.

दुर्ग की तस्वीरें तो दहला देने वाली थीं. जिला अस्पताल के मुर्दाघर में 20 लाशें पहुंचीं. फ्रीजर में रखने की जगह कम पड़ गई तो वॉश बेसिन के पास लाशें रखनी पड़ीं, हालांकि प्रशासन का कहना है मौतें अकेले दुर्ग में नहीं, आसपास के जिलों में भी हुई हैं.

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दुर्ग के कलेक्टर सर्वेश्वर भूरे ने कहा, 'यहां आसपास के जिलों से भी डेड बॉडी आती हैं. कोरोना से मृत्यु की संख्या में वृद्धि हुई है. परिजन समय से उपस्थित नहीं रहते, कोविड का रिपोर्ट अवेटेड रहता है इसलिए मॉर्चुरी में बॉडी आ गई थीं.'


दोनों राज्यों में कोरोना के खतरे का आलम यह है कि बुधवार को छत्तीसगढ़ में कोरोना के 10,310 नए मामले आए थे और 53 लोगों की मौत हुई थी, जबकि मध्य प्रदेश में 4,043 नए मामले सामने आए थे और 13 लोगों की मौत हुई थी. बहरहाल मध्य प्रदेश और पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में सरकार संक्रमण रोकने के कई उपाय कर रही है लेकिन साफतौर पर रफ्तार थामे नहीं थम रही है. लोग तो लापरवाह हैं ही, कई आपदा में अवसर भी ढूंढने लगे हैं.

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