आयुष्मान भारत योजना से इलाज में मध्यप्रदेश रहा फिसड्डी?

लेकिन केन्द्र सरकार का दावा है कि आयुष्मान भारत- देश की ही नहीं, दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम है- इस योजना के तहत ग़रीब परिवारों के हर सदस्य का आयुष्मान कार्ड बनता है, जिसमें अस्पताल में भर्ती होने पर 5 लाख रुपये तक का इलाज मुफ़्त होता है.

आयुष्मान भारत योजना से इलाज में मध्यप्रदेश रहा फिसड्डी?

भोपाल:

मध्यप्रदेश में बड़वानी ज़िले के पलवट गांव के सुंदर अलावे नीट की तैयारी के दौरान ही गंभीर रूप से बीमार पड़े. आष्युमान कार्ड था लेकिन कहते हैं लाभ नहीं मिला. कैबिनेट मंत्री प्रेमसिंह पटेल इलाके में आए थे उनसे शिकायत की तो जवाब मिला "जितने रूपये चाहिये उतने दिला देता कागज गलत लगे हैं तेरे, एस्टिमेट है क्या तेरे पास.. होशियार मत बन..  नहीं तो दूंगा ..."

मंत्रीजी का ये बयान अपवाद हो सकता है, लेकिन केन्द्र सरकार का दावा है कि आयुष्मान भारत- देश की ही नहीं, दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम है- इस योजना के तहत ग़रीब परिवारों के हर सदस्य का आयुष्मान कार्ड बनता है, जिसमें अस्पताल में भर्ती होने पर 5 लाख रुपये तक का इलाज मुफ़्त होता है. कोरोना जब पैर पसार रही थी, तब केंद्र सरकार ने कोविड-19 के मरीज़ों का इलाज भी आयुष्मान योजना के तहत करवाने की घोषणा की थी लेकिन हुआ क्या.

सुंदर कहते हैं, 'मेरा आष्युमान कार्ड बना है, 1-1.50 लाख रुपये का खर्चा इलाज में आया लोगों से उधार लिया था, सारे बिल लगाये थे लेकिन फिर भी मंज़ूरी नहीं मिली."

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भोपाल में अजहर के पिता कोरोना से चले बसे, 6 लोगों का परिवार है अकेले कमाने वाले बचे हैं, लाखों का कर्जा है, कहते हैं आष्युमान कार्ड का कोई फायदा नहीं मिला "पापा को अस्पताल ले गये, कोविड हो गया आष्युमान कार्ड लगाया अस्पताल नहीं माना, लोगों से पैसे लिया उधार में इलाज के लिये फिर भी पापा का इंतकाल हो गया ... कार्ड का कोई फायदा नहीं मिला."

कोविड के अलावा भी जो मरीज इस दौरान दूसरी बीमारियों से परेशान रहे उनमें भी आयुष्मान योजना के तहत इलाज में दिक्कत आई, बीमार लोगों ने आरोप लगाये कि उन्हें आष्युमान कार्ड से कोई फायदा नहीं मिला.

भोपाल में घरेलू काम करने वाली शबनम के बेटे का पैर जल गया था, मोहम्मद हसीब के पैर का ही ऑपरेशन हुआ लाखों खर्च हुए शबनम कहती हैं, "20 जनवरी को लड़का भर्ती था आष्युमान वगैरह चलता नहीं है, कहीं से कोई मदद नहीं मिली 1 लाख रु. के करीब लग गया, जिनके यहां काम करती थी उन्होंने मदद की. कार्ड बना था तो बोला था हर जगह चलेगा 5 लाख तक का इलाज फ्री है बच्चे को भर्ती किया तो अस्पताल ने साफ मना कर दिया."

भोपाल के ही मोहम्मद हसीब कहते हैं, 'मेरे पैर में मवाद भर गया अस्पताल ने कहा आष्युमान वैलिड है ही नहीं, 5 लाख की घोषणा लेकिन 5 रु के काम नहीं आया. महीनों बाद 58000 का अप्रूवल दिया जबकि मेरे 3.50-4 लाख रुपये खर्च हो गये थे.'

कुछ दिनों पहले भोपाल के चिरायु अस्पताल का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें अस्पताल का कर्मचारी तीमारदार से बदतमीजी कर रहा था, साफ कह दिया वो आयुष्मान कार्ड पर कोविड का इलाज नहीं करेंगे. सूचना के अधिकार के तहत रीवा के विवेक पांडे ने जो जानकारी जुटाई वो बताती है, देश में आयुष्मान भारत योजना के तहत 13.44 करोड़ कार्डधारक परिवार हैं.

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उनमें 6.05 लाख कोविड मरीजों का इलाज हुआ. इस पर 2223.57 करोड़ रुपए खर्च हुए. लेकिन आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और महाराष्ट्र ने 5.25 लाख मरीजों के इलाज पर 2,107 करोड़ रुपए खर्च किए. जबकि बाकी पूरे देश में मात्र 80000 संक्रमितों का इलाज हुआ और 116.57 करोड़ रुपए खर्च हुए. इनमें भी यूपी, एमपी सहित उत्तर के पांच बड़े राज्यों ने केवल 49.10 करोड़ रुपए खर्च किए. मध्यप्रदेश में 1.08 करोड़ पात्र परिवार में सिर्फ 18,309 मरीजों का इलाज हुआ और 34.4 करोड़ रुपए खर्च हुए.

ज्यादातर निजी अस्पतालों ने आयुष्मान कार्ड धारकों को भर्ती करने से ही मना कर दिया. चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग कहते हैं, "मुझे नहीं मालूम आपको किसने क्या कहा मुख्यमंत्रीजी की सार्थक पहल है कि कोविड का उपचार निशुल्क करने के लिये आष्युमान से इसको जोड़ा जाए, लगभद 88 फीसद परिवारों का इसका लाभ मिला." आयुष्मान भारत-PMJAY का सालाना बजट तकरीबन 6400 करोड़ रुपये का है.

जिसमें ग़रीब परिवारों के हर सदस्य का आयुष्मान कार्ड बनता है, अस्पताल में भर्ती होने पर 5 लाख रुपये तक का इलाज मुफ़्त होता है. इस योजना में देश भर में 20 हजार से ज़्यादा अस्पतालों में 1000 से ज़्यादा बीमारियों का इलाज मुफ़्त में करवाया जा सकता है.


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सरकारों ने सोशल मीडिया पर फ्री-फ्री के नाम पर वाहवाही तो खूब लूटी लेकिन स्वास्थ्य राज्य का विषय है और केंद्र सरकार ने PMJAY के तहत पैकेज और दरें तय करने का अधिकार राज्यों को दिया अब जिन शहरों में आईसीयू बेड के लिए मरीजों को रोजाना हजारों का भुगतान करना पड़ा वहां कोई सस्ते में बिस्तर क्यों देता.