
बीजेपी के दो विधायकों ने मध्यप्रदेश दंड विधि संशोधन विधेयक पर कमलनाथ सरकार के पक्ष में मतदान किया, जिसे लेकर राज्य की सियासत में बवाल मच गया है. मध्यप्रदेश बीजेपी में विधायकों के टूटने के बाद लगातार बैठकों का दौर चल रहा है. लेकिन बीजेपी दोनों विधायकों पर कार्रवाई को लेकर वेट एंड वॉच की मुद्रा में है. पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट लेकर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह दिल्ली पहुंच गए हैं. उधर बीजेपी की तरफ से पलटवार की योजनाएं भी बन रही हैं.
ब्यौहारी से बीजेपी विधायक शरद कोल, और मैहर के विधायक नारायण त्रिपाठी ने पार्टी के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया, लेकिन पार्टी कह रही है ऑल इज़ वेल. मध्यप्रदेश बीजेपी अध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा अभी कुछ भी नहीं हुआ, सब कुछ अनुकूल है, सब कंट्रोल में है. सूत्र कह रहे हैं दोनों विधायकों पर फिलहाल पार्टी जल्दबाज़ी में कोई कार्रवाई नहीं करेगी. पार्टी अभी दोनों बागी विधायकों को मनाने की कोशिश करेगी.
इस बीच कांग्रेस के नेता कह रहे हैं, बीजेपी के और विधायक उनके संपर्क में हैं. परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा नंबर वन-नंबर-2 ने क्या कहा पता नहीं, लेकिन नंबर-2 हमारे पास आ गए, दो और पाइप लाइन में हैं. वहीं खनिज मंत्री प्रदीप जायसवाल ने कहा उस चेहरे पर हमारे दो विधायक, और बता दूं तीन विधायक और हैं. जब उनकी आवाज़ उठेगी तो उसे बंद करने तीन और लाएंगे. वहीं खाद्य मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कोई शर्त नहीं है, ये तो शुरुआत है अभी.
नारायण त्रिपाठी और शरद कोल कांग्रेस में रहे फिर पाला बदला. ऐसे ही हैं बीजेपी विधायक संजय पाठक, इनके भी कांग्रेस में जाने की अटकलें हैं, लेकिन विधायक जी इसे नकार रहे हैं. वे कहते हैं कि 'मेरा पारिवारिक बैकग्राउंड कांग्रेस का रहा है. मेरे पिता मंत्री रहे हैं, मैं भी कांग्रेस में रहा हूं... ऐसी संभावनाएं वे तलाशते हैं लेकिन मेरे ख्याल से वह कल्पना मात्र है.'
बहरहाल बीजेपी की इस चूक से आलाकमान से लेकर संघ तक नाराज़ है. एक रिपोर्ट राज्य बीजेपी से तलब की गई है, जिसमें पूछा गया है कि सदन में जब वोटिंग की स्थिति बनी तो बीजेपी सियासी रणनीति बनाने में कैसे चूक गई? दंड संशोधन विधेयक पर बीजेपी के दो विधायकों ने कांग्रेस के पक्ष में वोट किया और पार्टी को भनक तक नहीं लगी.
उधर सत्ता पक्ष के आक्रमण का जवाब बीजेपी भी आक्रामक होकर देने की रणनीति के बारे में सोच रही है. सूत्रों के मुताबिक ग्वालियर चंबल के कद्दावर नेता के संपर्क में कांग्रेस के कुछ नाराज़ नेता हैं, इसलिए विधानसभा में डिवीजन मांगने वाले बसपा विधायक संजू कुशवाहा कह रहे हैं कि 'कांग्रेस को पहले अपने विधायकों पर ध्यान रखना होगा. कर्नाटक में जो स्थिति बनी वह अपने विधायकों की वजह से बनी, इसलिए मुझे लगता है कांग्रेस को अपने विधायकों पर नजर रखने की जरूरत है. हमारे ऊपर शक़ करने की कोई वजह नहीं है.'
बीजेपी की रणनीति राज्य के पूर्व संसदीय मामलों के मंत्री नरोत्तम मिश्रा के बयान में दिखी. उन्होंने कहा खेल उन्होंने शुरू किया, खत्म हम करेंगे.
पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान और राज्य पार्टी प्रमुख राकेश सिंह सहित बीजेपी के वरिष्ठ नेता वैसे तो यह कहते रहे हैं कि उनकी पार्टी कमलनाथ सरकार को गिराने का प्रयास नहीं करेगी, वह खुद अपने अंतर्विरोधों से गिरेगी. लेकिन हमारे सूत्रों के अनुसार बुंदेलखंड, ग्वालियर और विंध्य क्षेत्र में तीन पूर्व मंत्री असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों से संपर्क में हैं. इसके अलावा निर्दलीय, बसपा और सपा के विधायकों को भी साधने के प्रयास छोड़े नहीं गए हैं.
गुरु पूर्णिमा के दिन सत्ता पक्ष को झटका देने की तैयारी पूरी भी हो गई थी. बीजेपी के निशाने पर ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के अलावा मालवा-निमाड़ क्षेत्र के आदिवासी बहुल इलाके के कुछ विधायक थे. इसी के मद्दनेज़र बुधवार को मध्यप्रदेश में जो हुआ वह अप्रत्याशित नहीं था बल्कि इसकी बाकायदा योजना बनाई गई थी. भिंड सीट से बसपा विधायक संजीव सिंह, जिन्होंने बुधवार को विधानसभा में संशोधन विधेयक पर वोटों के विभाजन की मांग की थी, ने बताया कि कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे पर वोटों के विभाजन की योजना अग्रिम रूप से बनाई गई थी.
हालांकि सत्तारूढ़ कांग्रेस के भी कई नेता बीजेपी के खिलाफ आक्रामक बने रहे. उसके कई नेताओं जैसे परिवहन मंत्री गोविंद राजपूत, खनन मंत्री प्रदीप जयसवाल ने दावा किया कि पांच से अधिक भाजपा विधायक भी कांग्रेस के संपर्क में हैं. ये भी कहा गया कि जब वक्त आएगा तो विंध्य, मालवा से आठ विधायक कांग्रेस के पाले में आ सकते हैं.
VIDEO : कमलनाथ के साथ आए 122 विधायक