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घरेलू झगड़ों की वजह से पति की आत्महत्या के लिए पत्नी जिम्मेदार नहीं, बॉम्बे HC की अहम टिप्पणी

बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि महज वैवाहिक विवाद, गाली-गलौज या मायके चले जाने जैसी घटनाओं को 'आत्महत्या के लिए उकसाने' की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता.धारा 306 के तहत मामला तब बनता है जब आरोपी का इरादा स्पष्ट रूप से व्यक्ति को जान देने के लिए मजबूर करने का हो.

घरेलू झगड़ों की वजह से पति की आत्महत्या के लिए पत्नी जिम्मेदार नहीं, बॉम्बे HC की अहम टिप्पणी
बॉम्बे हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी. (AI फोटो)
  • बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने वैवाहिक विवादों और आत्महत्या के मामले में अहम फैसला दिया है
  • अदालत ने कहा कि घरेलू झगड़े या वैवाहिक विवाद को आत्महत्या के लिए उकसाने की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता
  • अमरावती के मामले में पति की आत्महत्या के बाद पत्नी के खिलाफ दर्ज एफआईआर को हाई कोर्ट ने रद्द किया
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मुंबई:

"अगर पति घरेलू झगड़ों या वैवाहिक विवाद की वजह से आत्महत्या करता है, तो पत्नी को उसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता", ये अहम टिप्पणी है बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच की. बेंच ने वैवाहिक विवादों और आत्महत्या के मामलों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया. अदालत ने कहा की अगर कोई पति घरेलू झगड़ों या वैवाहिक मतभेदों की वजह से  आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाता है, तो पत्नी को 'आत्महत्या के लिए उकसाने' का दोषी नहीं माना जा सकता.

बेटे की मौत के बाद बहू के खिलाफ दर्ज कराई थी शिकायत

मामला अमरावती जिले का है. 26 नवंबर 2019 को एक व्यक्ति ने ट्रेन के नीचे आकर अपनी जान दे दी थी. मृतक के पिता ने अपनी बहू के खिलाफ अमरावती के राजापेठ पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी. ससुर का आरोप था कि पत्नी अक्सर छोटी-छोटी बातों पर पति से झगड़ा करती थी और उसे गालियां देती थी. वह बार-बार बिना बताए मायके चली जाती थी. वह पति को झूठे केस में फंसाने की धमकी देती थी, जिससे तंग आकर उनके बेटे ने आत्महत्या कर ली.

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ये चीजें 'आत्महत्या के लिए उकसाने' की श्रेणी में नहीं

पुलिस ने ससुर की शिकायत के आधार पर पत्नी के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया था. पत्नी ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर और कानूनी कार्यवाही को रद्द करने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. इस मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि "महज वैवाहिक विवाद, गाली-गलौज या मायके चले जाने जैसी घटनाओं को 'आत्महत्या के लिए उकसाने' की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता.धारा 306 के तहत मामला तब बनता है जब आरोपी का इरादा स्पष्ट रूप से व्यक्ति को जान देने के लिए मजबूर करने का हो.

पति-पत्नी के बीच होने वाले सामान्य झगड़े उकसावे की श्रेणी में नहीं

अदालत ने यह भी साफ किया कि पति-पत्नी के बीच होने वाले सामान्य झगड़े या मतभेद उकसावे की श्रेणी में नहीं आते. को ने पत्नी की याचिका को मंजूर करते हुए पुलिस द्वारा दर्ज किया गया मामला और चल रहे मुकदमे को पूरी तरह रद्द कर दिया.अदालत के इस फैसले को उन मामलों में एक मिसाल माना जा रहा है, जहां वैवाहिक तनाव के दुखद अंत के बाद जीवनसाथी पर आपराधिक आरोप लगा दिए जाते हैं.
 

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