महाराष्ट्र ट्रांसपोर्टर्स एक्शन कमेटी (M-TAC) ने 5 मार्च की मध्यरात्रि से राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का ऐलान कर दिया है, 2 मार्च को MSRTC मुख्यालय में हुई उच्चस्तरीय बैठक में ठोस लिखित आश्वासन न मिलने के बाद कमेटी ने आजाद मैदान में बड़े जमावड़े की तैयारी भी तेज कर दी है. यह आंदोलन सिर्फ भारी ट्रकों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्कूल बस, निजी टूरिस्ट बस, टेंपो, टैक्सी और ऑटो रिक्शा यूनियनों ने भी समर्थन दिया है, जिससे राज्य की परिवहन व्यवस्था पूरी तरह ठप होने की आशंका है
उबाल की वजह? ई-चालान पर ‘डिजिटल डकैती' का आरोप
कमेटी के वरिष्ठ सदस्य मलकीत बाल सिंह ने दावा किया कि 17 दिसंबर 2025 को सौंपी गई सिफारिशों पर सरकार ने अब तक कोई अमल नहीं किया है. ट्रांसपोर्टर्स का आरोप है कि एक ही दिन में एक ही उल्लंघन पर कई ई-चालान, पार्किंग व्यवस्था के अभाव में ‘नो पार्किंग' जुर्माना और 50% राशि जमा किए बिना कोर्ट में सुनवाई न होना जैसे नियम आर्थिक उत्पीड़न के समान हैं. कमेटी ने इसे कानूनी रूप से अव्यवहारिक और आम वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई बताया है.
निर्णायक बैठक आज
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने सरकार का रुख सकारात्मक बताया है, लेकिन कमेटी मौखिक आश्वासनों से संतुष्ट नहीं है. आज शाम ट्रांसपोर्ट कमिश्नर और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अहम बैठक प्रस्तावित है. सरकार की ओर से 6 मार्च को क्लीनर नोटिफिकेशन जारी करने और बॉर्डर चेक पोस्ट बंद करने पर मुख्यमंत्री स्तर पर निर्णय की संभावना जताई गई है. हालांकि, कमेटी ने साफ कर दिया है कि आधिकारिक सरकारी प्रस्ताव (GR) जारी हुए बिना हड़ताल टलेगी नहीं.
आम जनता पर कितना होगा असर?
यदि वार्ता विफल रहती है तो स्कूल-कॉलेज के छात्र, विशेषकर बोर्ड परीक्षा दे रहे विद्यार्थी, सबसे अधिक प्रभावित होंगे क्योंकि मुंबई स्कूल बस एसोसिएशन भी आंदोलन में शामिल है. सब्जी, दूध और ईंधन जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति 48 से 72 घंटे में प्रभावित हो सकती है. ऐप-आधारित टैक्सी और ऑटो सेवाओं में भारी कमी या किराए में उछाल देखने को मिल सकता है, जिससे मुंबई और पुणे जैसे शहरों की ‘लास्ट माइल कनेक्टिविटी' ठप पड़ सकती है
क्या है प्रमुख मांगें?
• अनुचित और समयसीमा पार ई-चालानों की रद्दीकरण
• कोर्ट सुनवाई के लिए 50% जमा नियम पर रोक
• पार्किंग और लोडिंग जोन बनने तक ‘नो पार्किंग' जुर्माना स्थगित
• वाहन क्लीनर नोटिफिकेशन और बॉर्डर चेक पोस्ट पर स्पष्ट निर्णय
• परिवहन विवादों के लिए अलग न्यायिक तंत्र/ट्रिब्यूनल की स्थापना
M-TAC ने इसे केवल श्रमिक आंदोलन नहीं बल्कि जवाबदेही की लड़ाई बताया है. अब नजर सरकार के फैसले पर है कि वह लिखित और समयबद्ध आश्वासन देती है या महाराष्ट्र को लंबे परिवहन गतिरोध का सामना करना पड़ेगा।
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