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अंबरनाथ में राजनीतिक 'खेला', निलंबन के बाद 12 कांग्रेस पार्षदों ने थामा भाजपा का दामन

अंबरनाथ नगरपालिका परिषद के नवनिर्वाचित जिन 12 पार्षदों को चुनाव के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ जुड़ने के कारण कांग्रेस ने निलंबित कर दिया था, वे अब औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल हो गए हैं.

अंबरनाथ में राजनीतिक 'खेला', निलंबन के बाद 12 कांग्रेस पार्षदों ने थामा भाजपा का दामन
X- Ravindra Chavan
  • अंबरनाथ के 12 नवनिर्वाचित कांग्रेस पार्षद निलंबन के बाद भाजपा में शामिल हो गए हैं.
  • भाजपा अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने पार्षदों के भाजपा में शामिल होने को विकास के प्रति प्रतिबद्धता बताया है.
  • हालिया स्थानीय चुनाव में भाजपा, कांग्रेस और NCP ने मिलकर अंबरनाथ विकास आघाडी बनाई थी.
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महाराष्ट्र की सियासत में बड़ फेरबदल देखने को मिला है. ठाणे जिले के अंबरनाथ में कांग्रेस की कार्रवाई के बाद निलंबित किए गए 12 नवनिर्वाचित पार्षदों ने अब औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है. इस एक कदम ने न सिर्फ अंबरनाथ नगरपालिका परिषद के सत्ता समीकरणों को पलट दिया है, बल्कि महायुति की मजबूती और कांग्रेस की अंदरूनी कमजोरियों को भी उजागर कर दिया है. जो पार्षद बीजेपी में शामिल हुए हैं उनमें प्रदीप नाना पाटील, दर्शना उमेश पाटील, अर्चना चरण पाटील, हर्षदा पंकज पाटील, तेजस्विनी मिलिंद पाटील, विपुल प्रदीप पाटील, मनीष म्हात्रे, धनलक्ष्मी जयशंकर, संजवणी राहुल देवडे, दिनेश गायकवाड, किरण बद्रीनाथ राठोड और कबीर नरेश गायकवाड हैं.

भाजपा ने किया ऐलान

भाजपा की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने बुधवार देर रात पार्टी कार्यालय में इसकी घोषणा की. उन्होंने कहा कि पार्षदों का यह फैसला सत्ता की लालसा नहीं, बल्कि विकास और सुशासन के प्रति साझा प्रतिबद्धता का नतीजा है.

यह भी पढ़ें- बीजेपी से मिलाया हाथ तो कांग्रेस ने अंबरनाथ में पूरी स्थानीय इकाई को ही कर दिया निलंबित

चव्हाण ने कहा, 'जनता ने इन पार्षदों को विकास के लिए चुना है. वे इसलिए हमारे साथ आए हैं क्योंकि भाजपा नीत सरकार तेजी से काम कर रही है और लोगों को न्याय व विकास दे रही है.'

कैसे बदले राजनीतिक समीकरण?

20 दिसंबर को हुए स्थानीय चुनाव के बाद भाजपा ने कांग्रेस के साथ मिलकर ‘अंबरनाथ विकास आघाडी (AVA)' बनाई. इस गठबंधन में अजित पवार नीत राकांपा भी शामिल है. गठबंधन ने 60 सदस्यीय नगर परिषद में 31 सीटों के साथ बहुमत हासिल किया. शिवसेना 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन बहुमत से चार सीट दूर रह गई. भाजपा को 14, कांग्रेस को 12 और राकांपा को 4 सीटें मिलीं, जबकि 2 निर्दलीय भी जीते. एक निर्दलीय के समर्थन से AVA की संख्या 32 तक पहुंच गई, जो बहुमत के आंकड़े से अधिक है.

कांग्रेस ने अपनाया सख्त रुख

इस असामान्य गठबंधन से नाराज कांग्रेस ने बुधवार को अपने 12 नवनिर्वाचित पार्षदों और ब्लॉक अध्यक्ष को निलंबित कर दिया था. इसके बाद इन पार्षदों का भाजपा में शामिल होना स्थानीय राजनीति में बड़ा संदेश माना जा रहा है. भाजपा, NCP और शिवसेना राज्य में सत्तारूढ़ महायुति के सहयोगी हैं. चव्हाण ने कहा कि यह घटनाक्रम भाजपा नीत सरकार में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है.

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