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बीजेपी से मिलाया हाथ तो कांग्रेस ने अंबरनाथ में पूरी स्थानीय इकाई को ही कर दिया निलंबित

महाराष्ट्र के अंबरनाथ नगर परिषद में बीजेपी के साथ गठबंधन करने वाले कांग्रेस नेताओं को पार्टी ने निलंबित कर दिया है. इस गठबंधन की खबरों ने राज्य की सियासत में भूचाल ला दिया था.

बीजेपी से मिलाया हाथ तो कांग्रेस ने अंबरनाथ में पूरी स्थानीय इकाई को ही कर दिया निलंबित
बीजेपी और कांग्रेस में गठबंधन
  • महाराष्ट्र कांग्रेस ने अंबरनाथ इकाई के नेताओं पर की सख्त कार्रवाई
  • अंबरनाथ ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रदीप पाटिल को किया निलंबित
  • गौरतलब है कि कांग्रेस ने अंबरनाथ नगरपालिका परिषद में कर लिया था गठबंधन
मुंबई:

अंबरनाथ नगर परिषद में बीजेपी के साथ स्थानीय स्तर पर गठबंधन को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच महाराष्ट्र कांग्रेस ने बड़ा और कड़ा कदम उठाया है. पार्टी अनुशासन को प्राथमिकता देते हुए कांग्रेस नेतृत्व ने अंबरनाथ में अपनी पूरी संगठनात्मक इकाई पर कार्रवाई की है.

क्या है कांग्रेस की कार्रवाई?

महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ के निर्देश के बाद वहां पार्टी की कमिटी निलंबित कर दिया गया है.  पार्टी ने अंबरनाथ ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रदीप पाटिल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. अंबरनाथ नगर परिषद में कांग्रेस के सभी निर्वाचित पार्षदों को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निलंबित किया गया है. इसके अलावा अंबरनाथ ब्लॉक कांग्रेस कमेटी को भंग कर दिया गया है.

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बीजेपी से गठबंधन पड़ा भारी

यह कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब अंबरनाथ नगर परिषद में कांग्रेस के स्थानीय नेताओं और पार्षदों ने बीजेपी के साथ मिलकर सत्ता गठन में भूमिका निभाई थी. इस कदम को कांग्रेस हाईकमान और प्रदेश नेतृत्व ने पार्टी की घोषित नीति और विचारधारा के खुले उल्लंघन के तौर पर देखा है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस नेतृत्व ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि बीजेपी के साथ किसी भी स्तर पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष गठबंधन अस्वीकार्य है. इसके बावजूद अंबरनाथ में स्थानीय कांग्रेस इकाई द्वारा बीजेपी के साथ सत्ता साझा करने को अनुशासनहीनता और पार्टी लाइन के खिलाफ कदम माना गया.

कांग्रेस का सख्त संदेश

इस कार्रवाई के जरिए कांग्रेस ने यह साफ संदेश दिया है किसत्ता के लिए पार्टी सिद्धांतों से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. स्थानीय स्तर पर लिए गए ऐसे फैसले, जो पार्टी की राष्ट्रीय और प्रदेश नीति के खिलाफ हों, उन पर कठोर कार्रवाई तय है. राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, यह फैसला केवल अंबरनाथ तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्यभर के कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं के लिए चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है.

गठबंधन राजनीति में बढ़ा दबाव

अंबरनाथ में बीजेपी-कांग्रेस गठबंधन पहले ही महाराष्ट्र की राजनीति में बहस का बड़ा मुद्दा बन चुका है. अब कांग्रेस की इस सख्त कार्रवाई से यह साफ हो गया है कि पार्टी नेतृत्व बीजेपी के साथ किसी भी तरह की नजदीकी को स्वीकार करने के मूड में नहीं है, चाहे वह स्थानीय मजबूरी के नाम पर ही क्यों न हो. सूत्रों के अनुसार, वहीं निलंबित नेताओं पर आगे और अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा.

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