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उद्धव ठाकरे को फिर से पार्टी में टूट का डर, कितने सांसद देंगे साथ? मातोश्री में आज बुलाई निर्णायक बैठक

पिछले कुछ दिनों से चर्चा है कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना, उद्धव गुट के सांसदों को तोड़ने की कोशिश कर रही है.

उद्धव ठाकरे को फिर से पार्टी में टूट का डर, कितने सांसद देंगे साथ? मातोश्री में आज बुलाई निर्णायक बैठक
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे आज पार्टी सांसदों के साथ करेंगे बैठक.
  • उद्धव ठाकरे को पार्टी में एक बार फिर से टूट का डर.
  • शिवसेना (UBT) के कुछ सांसदों के एकनाथ शिंदे की पार्टी से संपर्क की अटकलें.
  • मातोश्री में होने वाली आज की बैठक रहेगी अहम.

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से चर्चा में रहे कथित 'ऑपरेशन टाइगर' के बीच शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने आज दोपहर 12 बजे मातोश्री पर पार्टी के सभी लोकसभा सांसदों की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है. इस बैठक को लेकर राजनीतिक गलियारों में उत्सुकता बढ़ गई है, क्योंकि पार्टी के कुल 9 सांसदों में से कितने सांसद बैठक में उपस्थित रहते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं.

पिछले कुछ दिनों से ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसद उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के संपर्क में हैं. केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने हाल ही में दावा किया था कि "ऑपरेशन टाइगर" अंतिम चरण में पहुंच चुका है. इसके बाद मंत्री भरत गोगावले ने भी संकेत दिए थे कि विपक्षी खेमे के कुछ नेता संपर्क में हैं. इन बयानों के बाद महाराष्ट्र का राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है.

उद्धव गुट के पास 9 लोकसभा सांसद

शिवसेना (यूबीटी) के पास वर्तमान में 9 लोकसभा सांसद हैं और यदि किसी प्रकार का विभाजन होता है तो दल-बदल कानून से बचने के लिए कम से कम 6 सांसदों का समर्थन आवश्यक होगा. इसी पृष्ठभूमि में उद्धव ठाकरे ने सभी सांसदों को मुंबई में मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं.

हालांकि, पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय राउत और विधायक अंबादास दानवे ने टूट की अटकलों को खारिज किया है. वहीं, हिंगोली के सांसद नागेश पाटिल अष्टिकर और नासिक के सांसद राजाभाउ वाजे ने भी सार्वजनिक रूप से कहा है कि वे उद्धव ठाकरे के साथ हैं और पार्टी छोड़ने का कोई सवाल ही नहीं है.

लोगों को साथ लाने की कोशिश- प्रवक्ता

शिवसेना (UBT) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने बताया कि बैठक में सभी लोगों को साथ लाने कोशिश कर रहे हैं. अगर कोई नहीं आ पा रहा है तो वो अपना कारण बताएगा कि क्यों नहीं आ पा रहा है. संगठन की मीटिंग तो होते रहती है, कोई नई बात थोड़ी है, हर दल करता है. हम भी कर रहे हैं तो इसमें कोई बहुत ज्यादा चिंता का विषय नहीं होना चाहिए.

'क्यों तोड़ रहे हो पार्टियां?'

उन्होंने सवाल किया कि 2024 से कभी 'ऑपरेशन टाइगर' तो कभी 'ऑपरेशन लोटस' के बारे में सुनते आ रहे हैं. हमारे 9 सांसद चुनकर आए हैं तो 240 भाजपा के और शिंदे के 7 सांसद. अब भाजपा ने टीडीपी और जेडीयू के साथ मिलकर सरकार बना ली है तो क्यों आप क्यों पार्टियां तोड़ रहे हो? टीएमसी तोड़ दी, हमारी पार्टी तोड़ दी, शरद पवार जी की पार्टी तोड़ दी. इस देश में विपक्ष रहेगा कि नहीं रहेगा? कभी ऑपरेशन लोटस, कभी ऑपरेशन टाइगर.... आप लोग पार्टी चलाते हैं कि ऑपरेशन थिएटर चलाते हैं? आप लोग डॉक्टर का काम कर रहे हैं? डॉक्टर को डॉक्टर का काम करने दीजिए, बाकी हम लोग को हमारा काम करने दीजिए. ​भारतीय जनता पार्टी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना को देश की जनता ने विकास के लिए चुन के दिया है, न कि ऑपरेशन करने के लिए दिया है.

आज की मीटिंग है बहुत अहम

पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में हुई कथित बैठकों और सांसदों के संपर्क में होने की चर्चाओं ने शिवसेना (यूबीटी) नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है. ऐसे में आज की बैठक केवल संगठनात्मक समीक्षा तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे पार्टी की एकजुटता का शक्ति प्रदर्शन भी माना जा रहा है.

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि मातोश्री में होने वाली इस बैठक में पार्टी के सभी 9 सांसद उपस्थित रहते हैं या नहीं. बैठक में उपस्थिति का आंकड़ा ही 'ऑपरेशन टाइगर' की चर्चाओं के बीच उद्धव ठाकरे की पकड़ और पार्टी की एकजुटता का महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश दे सकता है.

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