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‘शिवाजी कोण होता?’ किताब विवाद: शिंदे गुट के MLA संजय गायकवाड़ पर FIR, प्रकाशक को जान से मारने की धमकी का आरोप

Shivaji Maharaj Book Controversy: शिवाजी महाराज पर लिखी किताब ‘शिवाजी कोण होता?’ के शीर्षक को लेकर विवाद बढ़ गया है. शिंदे गुट के विधायक संजय गायकवाड़ पर प्रकाशक प्रशांत आंबी को जान से मारने की धमकी देने का आरोप है. वायरल ऑडियो के बाद FIR दर्ज हुई. पढ़िए पूरी खबर.

‘शिवाजी कोण होता?’ किताब विवाद: शिंदे गुट के MLA संजय गायकवाड़ पर FIR, प्रकाशक को जान से मारने की धमकी का आरोप
शिवाजी महाराज पर किताब को लेकर विवाद में घिरे शिंदे गुट के विधायक संजय गायकवाड़

Shivaji Maharaj Book Controversy: महाराष्ट्र में एक बार फिर छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम से जुड़ा मामला सियासी और सामाजिक विवाद में बदल गया है. इस बार विवाद 38 साल पहले प्रकाशित एक चर्चित मराठी किताब ‘शिवाजी कोण होता?' (शिवाजी कौन होता?) के शीर्षक को लेकर सामने आया है. कोल्हापुर स्थित प्रकाशक प्रशांत आंबी ने शिवसेना (शिंदे गुट) के बुलढाणा से विधायक संजय गायकवाड़ पर गंभीर आरोप लगाए हैं. आरोप है कि विधायक ने कथित तौर पर फोन पर न केवल अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया बल्कि जान से मारने, जीभ काटने और घर में घुसकर हमला करने की धमकी भी दी. सोशल मीडिया पर वायरल एक ऑडियो क्लिप के बाद यह मामला तूल पकड़ गया है. शिकायत के आधार पर कोल्हापुर पुलिस ने विधायक के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है.

Shivaji Maharaj Book Controversy: इस किताब को लेकर है विवाद

Shivaji Maharaj Book Controversy: इस किताब को लेकर है विवाद

किताब के शीर्षक से शुरू हुआ विवाद

पूरा मामला गोविंद पानसरे द्वारा लिखित मराठी पुस्तक ‘शिवाजी कोण होता?' के शीर्षक को लेकर शुरू हुआ. यह किताब पहली बार 1988 में प्रकाशित हुई थी और लोकवाङ्मय गृह द्वारा इसका प्रकाशन किया गया था. पुस्तक में छत्रपति शिवाजी महाराज को केवल एक हिंदू राजा के रूप में नहीं, बल्कि एक धर्मनिरपेक्ष, जन-नायक और प्रगतिशील शासक के तौर पर प्रस्तुत किया गया है. यह किताब मराठी साहित्य की चर्चित कृतियों में शामिल मानी जाती है और इसके अब तक 75 से अधिक संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं. विधायक संजय गायकवाड़ ने किताब के शीर्षक को “अनौपचारिक और अपमानजनक” बताते हुए इस पर कड़ा एतराज जताया.

वायरल ऑडियो क्लिप ने बढ़ाया मामला

विवाद उस वक्त गंभीर हो गया जब सोशल मीडिया पर एक ऑडियो क्लिप वायरल हुई. इस क्लिप में कथित तौर पर विधायक संजय गायकवाड़ को प्रकाशक प्रशांत आंबी को गाली-गलौज करते और धमकियां देते हुए सुना जा सकता है. क्लिप सामने आने के बाद प्रशांत आंबी ने कोल्हापुर के राजारामपुरी पुलिस स्टेशन में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई. गायकवाड़ ने संवाददाताओं से बातचीत में स्वीकार किया कि ऑडियो में आवाज उनकी ही है, हालांकि उन्होंने यह भी दावा किया कि क्लिप को एडिट कर तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है.

Shivaji Maharaj Book Controversy: शिवाजी महाराज किताब विवाद

Shivaji Maharaj Book Controversy: शिवाजी महाराज किताब विवाद

‘जीभ काटने' और ‘पानसरे जैसा अंजाम' देने की धमकी का आरोप

शिकायत में प्रकाशक प्रशांत आंबी ने आरोप लगाया है कि विधायक ने उन्हें आधी रात के बाद फोन किया और करीब नौ मिनट तक बातचीत के दौरान किताब के शीर्षक को लेकर अपशब्दों का इस्तेमाल किया. अंबी का कहना है कि विधायक ने उनकी जीभ काटने, घर में घुसकर हमला करने और “पानसरे जैसा अंजाम भुगतने” की धमकी दी. गौरतलब है कि गोविंद पानसरे की 2015 में कोल्हापुर में उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जब वह सुबह की सैर पर निकले थे. इस संदर्भ ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है.

विधायक संजय गायकवाड़ की सफाई

संजय गायकवाड़ ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि प्रकाशक ने ही उनके प्रति अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और उन्हें अहंकारी कहा. उन्होंने दावा किया कि किताब में छत्रपति शिवाजी महाराज के खिलाफ “अपमानजनक संदर्भ” हैं, जिन्हें बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. उन्होंने यह भी कहा, “हम ऐसी किताबें नहीं पढ़ सकते जो छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान करती हों. इस किताब को नष्ट कर देना चाहिए.” गायकवाड़ के मुताबिक, यह किताब उनकी पत्नी को मंगलवार को मिली थी, जिसके बाद उन्होंने इसे पढ़ा और प्रकाशक को फोन किया.

विपक्ष का तीखा हमला, जांच की मांग

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस मामले को “खुली गुंडागर्दी” करार दिया है. कांग्रेस नेताओं ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और प्रकाशक को तत्काल सुरक्षा देने की मांग की है. कांग्रेस नेता हर्षवर्धन सपकाल ने ‘एक्स' पर पोस्ट कर गायकवाड़ पर बुलढाणा जिले की छवि खराब करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि एक जनप्रतिनिधि द्वारा इस तरह की भाषा और धमकी लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है.

पुराने विवादों से घिरे रहे हैं गायकवाड़

यह पहली बार नहीं है जब संजय गायकवाड़ विवादों में आए हों. वर्ष 2024 में वे गले में बाघ का दांत पहनकर उसे 1987 में शिकार किया हुआ बताने को लेकर चर्चा में आए थे. इसी साल उन्होंने विधायक आवास की कैंटीन में बासी खाना मिलने पर एक कर्मचारी को थप्पड़ मार दिया था. इसके अलावा, राहुल गांधी के आरक्षण संबंधी बयान पर “जीभ काटकर लाने” वाले को इनाम देने की घोषणा, पुलिस विभाग को “सबसे अक्षम” बताना और एक पुलिसकर्मी से कार धुलवाने जैसे उनके बयान और कृत्य पहले भी विवाद का कारण बन चुके हैं.

अब आगे क्या?

फिलहाल कोल्हापुर पुलिस द्वारा दर्ज FIR के बाद मामले की जांच शुरू हो चुकी है. यह देखना अहम होगा कि जांच में ऑडियो क्लिप की सत्यता और धमकी के आरोप किस हद तक साबित होते हैं. साथ ही, यह मामला एक बार फिर सवाल खड़ा करता है कि वैचारिक असहमति और ऐतिहासिक विमर्श को लेकर जनप्रतिनिधियों की भाषा और व्यवहार की सीमा क्या होनी चाहिए.

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