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सूर्यकुमार यादव ने गंवा दिया आखिरी मौका? यह बन सकता था टर्निंग प्वाइंट

बुधवार को सूर्यकुमार यादव को लेकर आई खबरों से भले ही फैंस चौंक गए हों, लेकिन न तो किसी पूर्व क्रिकेटर की ही आवाज निकली और न ही किसी विद्वान की.

सूर्यकुमार यादव ने गंवा दिया आखिरी मौका? यह बन सकता था टर्निंग प्वाइंट
सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में भारत को अभूतपूर्व सफलता मिली
source: social media

बुधवार को भारत के वर्तमान टी20 कप्तान सूर्यकुमार को कप्तान पद स हटाए जाने की खबर सामने आई, तो फैंस तो एक बार को हैरान रह गए, लेकिन तमाम पूर्व क्रिकेटरों और पंडितों के लिए इस खबर में कोई हैरानी नहीं थी. सूत्रों के अनुसार, 'बीसीसीआई की एपेक्स काउंसिल (अध्यक्ष मिथुन मिन्हास, उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला सहित कुल नौ लोग) वीरवार को भारत के अगले टी20 कप्तान के नाम पर भी मुहर लगा देगी. खबरें इस तरह की भी आई थीं कि इस बाबत चयनकर्ता और अधिकारी गौतम गंभीर के साथ मिलकर सलाह-मशविरा करेंगे, लेकिन ताजा हालात यही कह रहे हैं कि संभवत: बोर्ड के शीर्ष अधिकारी गंभीर से चर्चा किए बगैर ही बड़ा फैसला ले चुके थे. 

रोहित शर्मा की कप्तानी में साल 2024 में विश्व कप जीतने के बाद से भारत ने टी20 में इस फॉर्मेट में नए मानक स्थापित किए. भारत ने तब से अभी तक (3/6) तक खेले 51 मैचों में स 40 मुकाबलों में जीत दर्ज की. सात मैच गंवाए, 2 टाई हो गए और इतने ही मैचों में कोई रिजल्ट नहीं निकला. टीम इंडिया मैच दर मैच सीरीज दर सीरीज दुनिया में झंडे गाड़ती रही. इन 51 मैचों यादव ने सिर्फ 25.27 के औसत से 935 रन बनाए. और उनके बल्ले से सिर्फ 6 ही अर्द्धशतक निकले. साफ है बाकी खिलाड़ियों के तूफानी प्रदर्शन की छाया में सूर्यकुमार का चमकविहीन प्रदर्शन छिप गया. और इसका चरम पिछले साल रहा, जब उनका औसत करीब 19 पारियों में 13.62 पर सिमट कर रह गया. 


हालांकि, पिछले 2 साल में यादव की कप्तानी में भारत ने 45 में से 35 मैच जीते, लेकिन इसमें उनका औसत लगभग 25 था.  और अगर इसके बावजूद BCCI ने उन्हें इसीलिए कप्तान पद से नहीं हटाया क्योंकि टीम लगातार जीत रही थी और सिर पर विश्व कप खड़ा था. लेकिन इतना होने पर भी यादव यहां से स्लॉग ओवरों में चल रहे करियर को 'टर्निंग प्वाइंट' रूप दे सकते थे, लेकिन यह मौका भी उन्होंने गंवा दिया. 

फिसल गया आखिरी मौका भी

निश्चित रूप से यह मौका इस साल इंडियन प्रीमियर लीग थी. सूर्यकुमार के पास फिर से सेलेक्टरों और चाहने वालों को संदेश देने के लिए थोक के भाव में पूरे 14 मैच थे, लेकिन खेले 13 मैचों में सूर्यकुमार यादव करियर के सबसे बड़े संकट के समय सिर्फ 20.76 के औसत से 270 रन ही बना सके. वह लगातार उन शॉटों पर आउट हो रहे थे, जिन्हें फ्लिक करते ही या छू भर देते ही गेंद बाउंड्री के पार पहुंच जाया करती थी. यादव छोटी बाउंड्री के बावजूद सीमारेखा पर लपके जा रहे थे, तो मानो पेसरों ने उनकी खामी पकड़ ली थी और पारी दर पारी तमाम टीमों ने यादव को नाकाम किया. और जब औसत, कॉन्फिडेंस, उम्र, शानदार भविष्य दरवाजे पर मानो 'बड़े हथौड़े ' से दरवाजा पीट रहा हो, तो BCCI के पास भी शायद कोई विकल्प नहीं ही बचा था. 


 

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