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राज्यसभा में शरद पवार की वापसी: 60 साल की संसदीय यात्रा, क्या फिर बदलेंगे महाराष्ट्र की राजनीति के समीकरण?

शरद पवार ने राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेकर सक्रिय राजनीति में मजबूत वापसी की है. 60 वर्षों के संसदीय अनुभव के साथ उनकी भूमिका महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण बना सकती है.

राज्यसभा में शरद पवार की वापसी: 60 साल की संसदीय यात्रा, क्या फिर बदलेंगे महाराष्ट्र की राजनीति के समीकरण?
सुप्रिया सुले के साथ शरद पवार
  • शरद पवार ने राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेकर महाविकास आघाड़ी के उम्मीदवार के रूप में निर्विरोध चुना गया है
  • पवार के राजनीतिक अनुभव की शुरुआत 1967 में हुई थी और अब उनका संसदीय अनुभव 65 वर्षों तक पहुंच जाएगा
  • महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ती ‘बाबा संस्कृति’ को चिंताजनक बताया और समाज सुधारकों के विचारों का समर्थन किया

महाराष्ट्र की राजनीति के सबसे अनुभवी नेताओं में शुमार शरद पवार ने आज राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेकर एक बार फिर सक्रिय राजनीति में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई. महाविकास आघाड़ी (MVA) के उम्मीदवार के रूप में वे निर्विरोध चुने गए, जो उनके राजनीतिक प्रभाव और स्वीकार्यता को दर्शाता है.

60 साल की संसदीय यात्रा की ओर बढ़ते पवार

शपथ के बाद शरद पवार ने कहा कि उनका राजनीतिक सफर 1967 से शुरू हुआ था और अब उन्हें अगले 6 वर्षों के लिए राज्यसभा में काम करने का अवसर मिला है. इसका मतलब है कि मेरा संसदीय अनुभव 65 वर्षों तक पहुंच जाएगा, जो मेरे लिए एक बड़ी जिम्मेदारी और अवसर है. उन्होंने अपने स्वास्थ्य को लेकर भी खुलकर बात की और बताया कि निमोनिया के कारण उन्हें कुछ समय के लिए व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ा, लेकिन अब वे तेजी से स्वस्थ हो रहे हैं और जल्द ही महाराष्ट्र का दौरा करेंगे.

सुप्रिया सुले का भावुक संदेश

इस मौके पर उनकी बेटी और सांसद सुप्रिया सुले ने एक भावुक संदेश जारी करते हुए लिखा कि आदरणीय पवार साहेब ने आज राज्यसभा में शपथ ली. उन्होंने 59 वर्षों की संसदीय सेवा पूरी कर 60वें वर्ष में प्रवेश किया है. छह बार विधायक, एक बार विधान परिषद सदस्य, सात बार लोकसभा सांसद और अब तीसरी बार राज्यसभा सदस्य के रूप में उनका यह अविजीत प्रवास जारी है. उन्होंने बारामती और देशभर के लोगों का आभार जताते हुए कहा कि पवार साहेब को मिला जनसमर्थन परिवार के लिए अमूल्य धरोहर है.

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बारामती और उपचुनाव पर संतुलित रुख

बारामती उपचुनाव को लेकर पवार का रुख बेहद संतुलित नजर आया. उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्रीय पार्टी द्वारा उम्मीदवार उतारना लोकतंत्र का हिस्सा है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है. निर्विरोध चुनाव की मांग करना उचित नहीं है. लोकतंत्र में चुनाव लड़ना हर पार्टी का अधिकार है.

एनसीपी में अंदरूनी हालात और विलय पर सस्पेंस

पवार ने एनसीपी के अंदर चल रही हलचल और संभावित विलय की चर्चाओं पर भी खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि पहले जयंत पाटिल और अजित पवार के बीच विलय को लेकर कई दौर की बातचीत हुई थी. हालांकि, अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद ये चर्चाएं रुक गईं. भविष्य में विलय होगा या नहीं, इस पर अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी.

अजित पवार की विरासत और भावनात्मक संदर्भ

अजित पवार के निधन पर बोलते हुए शरद पवार ने उन्हें जनता के लिए काम करने वाला नेता बताया और कहा कि उनके प्रति लोगों के मन में गहरा सम्मान है. उन्होंने दुर्घटना को लेकर उठ रहे सवालों पर कहा कि शुरुआत में यह एक हादसा ही लगा, लेकिन कुछ लोगों ने इसकी गहराई से जांच की मांग की है.

महाराष्ट्र की राजनीति पर तीखी टिप्पणी

पवार ने राज्य में बढ़ती तथाकथित ‘बाबा संस्कृति' पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि एक तरफ समाज सुधारकों शाहू, फुले और आंबेडकर के विचारों की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर कुछ जनप्रतिनिधि ऐसे ‘बाबाओं' के संपर्क में रहते हैं, जो इन विचारों के विपरीत है. उन्होंने इसे महाराष्ट्र की सामाजिक और राजनीतिक संस्कृति के लिए चिंताजनक बताया.

कृषि, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मुद्दों पर चिंता

पवार ने बासमती चावल के निर्यात पर रोक से किसानों को हो रहे नुकसान पर भी चिंता जताई. साथ ही उन्होंने अपने इजरायल दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि वे हमेशा कृषि और नवाचार में रुचि रखते रहे हैं और इस क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता है.

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महिला आरक्षण और लोकतांत्रिक संतुलन

महिला आरक्षण विधेयक पर प्रतिक्रिया देते हुए पवार ने कहा कि निर्वाचन क्षेत्रों में जनसंख्या का संतुलन बनाए रखना जरूरी है, ताकि प्रतिनिधित्व न्यायसंगत हो सके.

क्या पवार की सक्रिय वापसी बदलेगी समीकरण?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शरद पवार की सक्रिय राजनीति में वापसी महाराष्ट्र की सियासत में बड़ा बदलाव ला सकती है. एनसीपी के भीतर चल रहे असंतोष, संभावित विलय की अटकी चर्चाएं और महाविकास आघाड़ी की रणनीति, इन सभी पर अब पवार की भूमिका निर्णायक हो सकती है. उनका जल्द राज्यव्यापी दौरा और कार्यकर्ताओं से संवाद पार्टी को नई दिशा दे सकता है.

आगे क्या?

क्या एनसीपी के दोनों गुटों में विलय होगा?

बारामती उपचुनाव का परिणाम किस दिशा में जाएगा?

क्या शरद पवार फिर से महाराष्ट्र की राजनीति के ‘किंगमेकर' बनेंगे?

इन सभी सवालों के जवाब आने वाले समय में मिलेंगे, लेकिन इतना तय है कि 60 वर्षों का अनुभव लेकर शरद पवार एक बार फिर सक्रिय भूमिका में लौट आए हैं और इससे महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज होना तय है.

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