- महाराष्ट्र के बारामती उपचुनाव में उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार नामांकन दाखिल कर चुनावी मैदान में उतरी
- सुनेत्रा पवार ने दिवंगत अजित पवार की विरासत और विकास के सपनों को आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया है
- एनसीपी प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने बारामती के लोगों से सुनेत्रा पवार को समर्थन देने की अपील की है
महाराष्ट्र की सियासत का केंद्र बने बारामती विधानसभा उपचुनाव ने अब पूरी तरह चुनावी रंग ले लिया है. उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने आज आधिकारिक रूप से अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया, जिससे अब सीधा मुकाबला राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) और कांग्रेस के बीच सीधा हो गया है. नामांकन दाखिल करने से पहले आयोजित सभा में सुनेत्रा पवार ने भावुक अपील करते हुए कहा कि यह चुनाव केवल एक राजनीतिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि दिवंगत नेता अजित पवार के सपनों और विकास के विजन को आगे बढ़ाने का संकल्प है. दो महीने पहले हमने अजित दादा को खोया, लेकिन आज भी ऐसा नहीं लगता कि वे हमारे बीच नहीं हैं. बारामती की यह उपचुनाव उनकी कर्मभूमि से जुड़ी भावनाओं का प्रतीक है.
“यह नामांकन नहीं, विकास का संकल्प” – सुनील तटकरे
एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद सुनील तटकरे ने इस मौके पर कहा, “यह केवल नामांकन नहीं, बल्कि अजित दादा के विकास के मार्ग को आगे बढ़ाने का संकल्प है. बारामती के लोगों के दिलों में आज भी दादा के लिए अपार प्रेम है.” उन्होंने बारामती की जनता से अपील की कि जिस तरह उन्होंने अजित पवार का साथ दिया, उसी तरह अब सुनेत्रा पवार को समर्थन दें.
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भावनात्मक अपील और विकास का वादा
सुनेत्रा पवार ने अपने संबोधन में बारामती के लोगों से सीधा संवाद करते हुए कहा, “बारामती का हर नागरिक मेरे परिवार का सदस्य है. मैं आपको कभी अकेला नहीं छोड़ूंगी. बारामती का विकास पहले की तरह तेज़ी से जारी रहेगा.” उन्होंने आगे कहा कि कानून व्यवस्था को मजबूत रखा जाएगा और गुंडागर्दी व खंडणी (वसूली) को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
बड़े नेताओं की मौजूदगी
नामांकन के दौरान महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, वरिष्ठ मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले, साथ ही एनसीपी के दिग्गज नेता प्रफुल्ल पटेल और अन्य मंत्री व कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहे.
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कांग्रेस ने उतारा उम्मीदवार, मुकाबला दिलचस्प
जहां एनसीपी की ओर से बिना विरोध के चुनाव कराने की कोशिश की जा रही थी, वहीं कांग्रेस ने एडवोकेट आकाश मोरे को मैदान में उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है. आकाश मोरे ने भी आज अपने समर्थकों के साथ नामांकन दाखिल किया. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस का यह फैसला महायुति के खिलाफ सीधी लड़ाई का संकेत है. यह कदम यह भी दर्शाता है कि कांग्रेस अब बारामती जैसी प्रतिष्ठित सीट पर भी आक्रामक रणनीति अपनाने के मूड में है.
क्या होगा निर्विरोध चुनाव का प्रयास?
एनसीपी के वरिष्ठ नेताओं ने संकेत दिए हैं कि वे अंतिम समय तक कांग्रेस को मनाने की कोशिश करेंगे ताकि चुनाव निर्विरोध हो सके. हालांकि, वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए यह संभावना कम नजर आ रही है.
बारामती: प्रतिष्ठा और विरासत की लड़ाई
बारामती सीट को महाराष्ट्र की सबसे प्रतिष्ठित राजनीतिक सीटों में से एक माना जाता है. यह चुनाव केवल एक विधानसभा सीट का नहीं, बल्कि राजनीतिक विरासत, भावनात्मक जुड़ाव और विकास मॉडल की परीक्षा भी बन गया है. अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि बारामती की जनता किसे अपना समर्थन देती है. अजित पवार की विरासत को आगे बढ़ाने का दावा करने वाली सुनेत्रा पवार को या कांग्रेस के नए चेहरे आकाश मोरे को.
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