Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में उस वक्त नई चर्चा शुरू हो गई जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार ने विधानभवन में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कक्ष में अपनी पार्टी के विधायकों के साथ बैठक की. कई वर्षों बाद सत्र के दौरान विधानभवन पहुंचे शरद पवार की इस बैठक ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं. इस दौरान एकनाथ शिंदे ने उनका स्वागत भी किया. घटना ऐसे समय सामने आई है जब NCP (SP) के भविष्य और उसके संभावित राजनीतिक रुख को लेकर चर्चाएं चल रही हैं. वहीं शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने इस मुलाकात को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है और सांसद संजय राउत ने खुलकर नाराजगी जताई है.
शिंदे के कक्ष में बैठक से बढ़ी सियासी अटकलें
जानकारी के अनुसार शरद पवार कर्नाटक-महाराष्ट्र सीमा विवाद पर होने वाली बैठक के सिलसिले में विधानभवन पहुंचे थे. इसी दौरान उन्होंने उपमुख्यमंत्री और शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे के कक्ष में अपनी पार्टी के विधायकों के साथ बैठक की. इस बैठक की खबर सामने आते ही राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया. माना जा रहा है कि इस घटनाक्रम ने महाविकास आघाड़ी के भीतर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
रोहित पवार की नाराजगी की चर्चा
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार हाल ही में NCP (SP) विधायकों की एक बैठक हुई थी, जिसमें पार्टी की भविष्य की राजनीतिक दिशा को लेकर चर्चा हुई. बताया जा रहा है कि कुछ विधायकों ने नेतृत्व से यह जानना चाहा कि पार्टी आगे किस दिशा में जाएगी. सूत्रों के मुताबिक वरिष्ठ नेताओं की ओर से सत्ता पक्ष के साथ जाने की संभावना के संकेत दिए गए थे. इसी मुद्दे पर असहमति के चलते विधायक और शरद पवार के पोते रोहित पवार के नाराज होने की चर्चा है. खबरें हैं कि वह एक बैठक को बीच में छोड़कर चले गए थे. वहीं विधानभवन में हुई बैठक में भी उनकी अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही.
संजय राउत का तीखा हमला
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) सांसद संजय राउत ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी. संजय राउत ने कहा "एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र में गद्दारी की दीमक और भ्रष्टाचार का कीड़ा लगा दिया है. ऐसे कदमों से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की विश्वसनीयता कम होती है. हम होते तो अजित पवार की बेईमानी याद रखते, उनके केबिन में कभी बैठक नहीं करते. कल शरद पवार साहब ने जो कदम उठाया, उससे निश्चित रूप से सभी आहत हुए हैं. महाविकास अघाड़ी के सभी घटक दलों को गद्दारों से दूरी बनाए रखनी चाहिए. पार्टी बैठक के लिए क्या पूरा विधानभवन कम पड़ गया था? गद्दारों के कक्ष में जाकर बैठक करने के लिए हमारा दिल इतना बड़ा और सहिष्णु नहीं है. राज्य के मुद्दों पर सीएम से मिलना गलत नहीं, लेकिन वहां अपनी पार्टी की बैठक करना ठीक नहीं."
'विश्वसनीयता पर असर पड़ेगा'
राउत ने आगे कहा "जिसने हमारी सरकार गिराई, उन गद्दारों को आप सम्मान क्यों दे रहे हैं? इससे आपकी पार्टी की विश्वसनीयता कम होती है. शरद पवार एक बड़े नेता हैं. लेकिन जिस एकनाथ शिंदे ने राज्य में भ्रष्टाचार का कीड़ा और गद्दारी की दीमक लगाई है, उनके कक्ष में शरद पवार का बैठक करना सही नहीं है. क्या बैठक करने के लिए पूरा विधानभवन सूना पड़ा था?" राउत के इस बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है.
मुलाकात को लेकर बढ़ी राजनीतिक चर्चा
हालांकि शरद पवार या उनकी पार्टी की ओर से इस मुलाकात और बैठक को लेकर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे सामान्य शिष्टाचार से आगे की घटना के रूप में देख रहे हैं. विशेष रूप से तब, जब महाराष्ट्र की राजनीति में गठबंधन और राजनीतिक समीकरणों को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं.
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