Pune Child Rape and Murder Case: महाराष्ट्र के पुणे जिले का नसरापुर में 4 साल की मासूम बच्ची के साथ हुई हैवानियत की घटना से पूरे राज्य में उबाल है. मामले में सामने आए पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि आरोपी भीमराव कांबले ने मासूम के मुंह मोजा ठूंसकर उसकी हत्या को अंजाम दिया था. सामने आई मासूम की प्राथमिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट आरोपी द्वारा मासूम के साथ की गई हैवानियत का भी खुलासा करती है.
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कांबेल की क्रिमिनल मेंटालिटी को उजागर करती हैं भोर और राजगढ़ पुलिस थानों में दर्ज केस
साल 1998 में भीमराव कांबेल की क्राइम की दुनिया में पर्दापण हुआ, जब साल 1998 में उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 354 (महिला की लज्जा भंग करना) और धारा 452 (हमले की तैयारी के साथ घर में अनधिकृत प्रवेश) के तहत मामला दर्ज किया गया था. इस मामले ने तभी संकेत दे दिए थे कि उसकी गतिविधियां समाज और महिलाओं की सुरक्षा के लिए खतरा हैं.
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साल 2015 नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज हआ, लेकिन वह बच गया
साल 2025 में कांबले पर एक नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज हुआ. इस घटना की भयावहता ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया था: आरोप के अनुसार, कांबले ने उस मासूम बच्ची को बड़े ही शातिराना ढंग से अपने घर बुलाया. उसने बहाना बनाया कि उसे "टीवी चालू करना" नहीं आ रहा है और बच्ची उसकी मदद कर दे. जैसे ही बच्ची घर के अंदर दाखिल हुई, कांबले ने बच्ची की गर्दन पर एक धारदार हथियार (कोयता) रख दिया और धमकी दी कि "अगर शोर मचाया तो काट डालूंगा" इसी डर के साये में उसने उस नाबालिग के साथ दरिंदगी की.
'बेनिफिट ऑफ डाउट' देते हुए न्यायालय ने भीमराव कांबले को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया
गौरतलब है तब प्रत्यक्षदर्शियों या तकनीकी साक्ष्यों की कमी के चलते, न्यायालय ने भीमराव कांबले को 'बेनिफिट ऑफ डाउट' देते हुए सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था. उसकी यह आपराधिक कुंडली बताती है कि वह पहले भी गंभीर कानूनी पचड़ों में फंस चुका है. भले ही वह अदालत से एक बार तकनीकी आधार पर बच निकला हो, लेकिन उसके खिलाफ दर्ज पुराने मुकदमे उसकी हिंसक और आपराधिक प्रवृत्ति की गवाही देते हैं. अब नए सिरे से उठ रहे सवालों ने प्रशासन को फिर से उसके पुराने रिकॉर्ड को खंगालने पर मजबूर कर दिया है.
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