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परगट सिंह कौन हैं, जिन्हें कांग्रेस ने बनाया पंजाब का अध्यक्ष, 1998 में मिला था पद्म श्री

एक समय परगट सिंह को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ डिफेंडरों में से एक माना जाता था. 1985 पर्थ चैंपियंस ट्रॉफी में जर्मनी के खिलाफ ऐतिहासिक मैच में जब भारत 1-5 से पीछे था, तब परगट सिंह ने खेल के आखिरी 6 मिनटों में 4 गोल दागकर मैच 5-5 से बराबर कराया. इस करिश्मे ने उन्हें रातों-रात भारत तो भारत ग्लोबल स्टार बना दिया था.

परगट सिंह कौन हैं, जिन्हें कांग्रेस ने बनाया पंजाब का अध्यक्ष, 1998 में मिला था पद्म श्री
परगट सिंह मीठापुर के रहने वाले हैं.
  • कांग्रेस ने अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के इस्तीफे के बाद परगट सिंह को पंजाब प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है
  • परगट सिंह का जन्म जालंधर जिले के मीठापुर गांव में हुआ और वे भारतीय हॉकी के विश्वस्तरीय खिलाड़ी रहे हैं
  • उन्होंने 1992 और 1996 के ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम की कप्तानी की और कई राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किए

कांग्रेस ने परगट सिंह को पंजाब प्रदेश अध्यक्ष बनाया है. अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने आज ही अपना इस्तीफा दिया और कांग्रेस ने झटपट अपना नया अध्यक्ष चुन लिया. इससे साफ लग रहा है कि इसकी पूरी स्क्रिप्ट बहुत पहले ही लिखी जा चुकी थी और वडिंग की जगह नये प्रदेश अध्यक्ष को लेकर भी काफी माथा-पच्ची के बाद फैसला लिया गया. 

कौन हैं परगट सिंह

परगट सिंह का जन्म 5 मार्च 1965 को पंजाब के जालंधर जिले के मीठापुर गांव में हुआ. मीठापुर को भारतीय हॉकी की नर्सरी माना जाता है, जहां से देश को कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी मिले. परगट सिंह ने अपनी स्कूली और कॉलेज की शिक्षा जालंधर से पूरी की. बचपन से ही हॉकी स्टिक थामने वाले परगट ने अपनी लगन और अनुशासन के दम पर बहुत कम उम्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमा ली थी.

परगट सिंह कैसे बने थे स्टार

एक समय परगट सिंह को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ डिफेंडरों में से एक माना जाता था. 1985 पर्थ चैंपियंस ट्रॉफी में जर्मनी के खिलाफ ऐतिहासिक मैच में जब भारत 1-5 से पीछे था, तब परगट सिंह ने खेल के आखिरी 6 मिनटों में 4 गोल दागकर मैच 5-5 से बराबर कराया. इस करिश्मे ने उन्हें रातों-रात भारत तो भारत ग्लोबल स्टार बना दिया था. फिर 1986 कराची चैंपियंस ट्रॉफी में हॉलैंड के खिलाफ उन्होंने अकेले दम पर गोल दागकर भारत को 3-2 से रोमांचक जीत दिलाई. उन्होंने 1992 बार्सिलोना ओलंपिक और 1996 अटलांटा ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम की कप्तानी भी की. 1996 के अटलांटा ओलंपिक के उद्घाटन समारोह में वे भारतीय दल के ध्वजवाहक भी रहे.

खेल में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 1989 में अर्जुन पुरस्कार और 1998 में देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया था. खेल के साथ-साथ परगट सिंह ने पंजाब पुलिस में पुलिस अधीक्षक (एसपी) और पंजाब खेल विभाग के निदेशक के रूप में भी प्रशासनिक सेवाएं दीं.

परगट सिंह का राजनीतिक करियर

साल 2012 में उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा. शुरुआत में वे शिरोमणि अकाली दल में शामिल हुए और जालंधर कैंट विधानसभा सीट से शानदार जीत दर्ज कर पहली बार विधायक बने. हालांकि, मतभेद के चलते उन्होंने अकाली दल छोड़ दिया. इसके बाद नवजोत सिंह सिद्धू के साथ मिलकर 'आवाज-ए-पंजाब' मोर्चा बनाया और अंततः 2017 में कांग्रेस पार्टी का दामन थाम लिया. परगट सिंह ने 2017 और फिर 2022 के पंजाब विधानसभा चुनावों में लगातार जालंधर कैंट सीट जीतकर अपनी मजबूत जमीनी पकड़ साबित की. 2021–2022 में चरणजीत सिंह चन्नी की सरकार में उन्हें स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा, खेल एवं युवा मामले और एनआरआई मामलों का कैबिनेट मंत्री बनाया गया. वे पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव (संगठन) और उपाध्यक्ष जैसी प्रमुख जिम्मेदारियों को संभाल चुके हैं.अब उन्हें अध्यक्ष बना दिया गया है. देखना है कांग्रेस के ये दांव क्या उसे पंजाब की सत्ता दिला पाता है या नहीं.

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