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This Article is From Jan 14, 2019

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की साथी नेताओं को नसीहत, बोले- दूसरे क्षेत्र के मामलों में न दें दखल

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने अपने साथी नेताओं को सलाह दी है. उन्होंने कहा कि नेताओं को दूसरे क्षेत्रों में दखल नहीं देना चाहिए.

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की साथी नेताओं को नसीहत, बोले- दूसरे क्षेत्र के मामलों में न दें दखल
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने अपने साथी नेताओं को सलाह दी है.
मुंबई:

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने अपने साथी नेताओं को सलाह दी है. उन्होंने कहा कि नेताओं को दूसरे क्षेत्रों में दखल नहीं देना चाहिए, बल्कि विश्वविद्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, साहित्य और काव्य जगत के लोगों को अपने मामले खुद निपटाने देना चाहिए. नितिन गडकरी  (Nitin Gadkari) ने यह बात यवतमाल में सालाना मराठी साहित्य सम्मेलन के समापन समारोह में कही. आपको बता दें कि यह सम्मेलन लेखिका नयनतारा सहगल को दिया गया न्यौता वापस लेने की वजह से विवादों में रहा है. कार्यक्रम में गडकरी ने कहा कि ‘आपातकाल के दौरान दुर्गा भागवत और पीएल देशपांडे जैसे मराठी लेखकों के भाषणों के दौरान राजनीतिक रैलियों से ज्यादा भीड़ जुटती थी. ये दोनों लोग चुनावों के बाद साहित्य के क्षेत्र में लौटे थे. उन्होंने यहां तक कि राज्यसभा की सदस्यता जैसी राजनीतिक नियुक्ति की भी मांग नहीं की थी'. दुर्गा ने आपातकाल की खुल कर आलोचना की थी, जबकि देशपांडे ने आपातकाल हटने और 1977 में चुनाव की घोषणा होने के बाद जनता पार्टी के लिए प्रचार किया था.

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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने कहा कि लेखकों और नेताओं के बीच सहयोग, समन्वय तथा संचार होना चाहिए. संचार के अभाव में गलतफहमी होती है और फिर बहस होती है. मंत्री ने कहा कि हमें विपरित विचार प्रकट करने वालों का सम्मान करना चाहिए. गौरतलब है कि कुछ साल पहले पुरस्कार वापसी अभियान में अग्रिम पंक्ति में रही प्रख्यात अंग्रेजी लेखिका सहगल को 92 वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन का उदघाटन करने के लिए आमंत्रित किया गया था. यह सम्मेलन 11 जनवरी को शुरू हुआ. नयनतारा सहगल को न्यौता दिए जाने का मनसे द्वारा विरोध किए जाने पर आयोजकों ने आमंत्रण वापस ले लिया था. इस कदम की कई हलकों ने आलोचना की और यहां तक कि मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने कहा कि यह उनकी पार्टी का आधिकारिक रूख नहीं है. (इनपुट-भाषा)

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